हम दोनों भाई-बहन गांव के ही एक स्कूल में पढ़ने जाते थे। मैं पांचवी क्लास में व मेरी बहन तीसरी क्लास में थी, घरवालों ने सख्त हिदायत थी कि मैं अपनी बहन का बस्ता स्कूल से आते-जाते स्वंय ही पकड़ुं। मुझे रोज-रोज उसका बस्ता पकड़ना अच्छा नहीं लगता था। मेरे दोस्त भी मेरा मजाक बनाते थे। मेरी बहन स्कू्ल आते-जाते समय मजे से खाली हाथ चलती थी। एक दिन स्कूल की छुट्टी होने के बाद मेरी बहन मेरे पीछे चल रही थी और मैं अपना व उसका बस्ता पकड़े आगे-आगे चल रहा था, तभी एक बड़ा – सा कुत्ता भौंकते हुए हमारी तरफ मुझे काटने को बढ़ा। मैं झट से अपनी बहन के पीछे हो गया और कुत्ते ने मेरी बहन को पैर में काट लिया। मेरी बहन जोर से रोने लगी और घर पहुंचकर मेरी बहन ने सारा वाक्या सुनाया। मैंने सफाई दी की मेरे दोनों हाथ घिरे थे। इसलिए कुत्ते को नहीं भगा पाया। खैर डांट तो नहीं पड़ी, लेकिन बहन को रोते देखकर मुझे स्वंय पर गलानि हुई कि मैं चाहता तो अपनी बहन को बचा सकता था। आज भी वह घटना याद आती है, तो अपनी बहन को रोना भी याद आ जाता है।