जानवरों से प्रेम तो बहुत सारे लोगों को होता है, पर बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो इनकी सेवा के लिए तत्पर होते हैं। जर्मनी की सुश्री फ़्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग ऐसी ही गिनी चुनी लोगों में से एक हैं, जिन्होने अपना पूरा जीवन गौ सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और अब उनके इसी कार्य के लिए साल 2019 का ‘स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार’ मिलने जा रहा है। चलिए आपका परिचय कराते हैं फ़्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग और उनके इस सराहनीय कार्य से।
दरअसल, 61 वर्ष फ़्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग साल 1978 में 20 वर्ष की किशोरवय में पर्यटन के उद्देश्य से भारत आयी हुयी थीं, जिसके बाद से ये हमेशा-हमेशा के लिए भारत में रच-बस गयीं और ब्रज को अपनी साधना का केन्द्र बनाया। बीते 41 सालों से यहाँ रहकर फ़्रेडरिक भारतीय अस्मिता को आत्मसात कर रही हैं और पिछले 25 सालों से अनवरत गायों की देखभाल और उनकी सेवा के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं।इन्होंने उत्तर प्रदेश के मथुरा में कोन्हई गाँव के पास एक ‘राधा सुरभि गोशाला’ बनाई है, जहाँ ये लगातार लगभग डेढ़ हज़ार गायों की सेवा करती हैं। इनमें ज़्यादातर बूढ़ी, बीमार, रोगी, घायल और कमज़ोर गायें शामिल रहती हैं। अपने सम्पूर्ण जीवनवृत्त में अब तक इन्होंने लाखों गायों की सेवा का पुण्य लाभ उठाया है।
इनके ऐसे प्रेरणादायी कार्य के लिए लोग इन्हें ‘बछड़ों की माँ’ कहते हैं और ये ब्रज समेत पूरे भारतवर्ष में ‘सुदेवी दासी’ या ‘सुदेवी माता’ के नाम से पुकारी जाती हैं। इसलिए, गो-सेवा के क्षेत्र में सुश्री फ़्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग के द्वारा किए गये अद्वितीय, अप्रतिम एवं अनुकरणीय कार्यों के लिए इन्हें साल 2019 का स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार दिया जा रहा है।गौरतलब है कि स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार पूर्व सांसद स्वामी ब्रह्मानंद के नाम पर इस साल उनकी 125वीं जयंती-वर्ष से शुरू किया जा रहा है।