जानिए कितना घातक है धूम्रपान

धूम्रपान की लत के कारण देश के करोड़ों लोगों की सेहत धुएं में उड़ रही है। देश में धूम्रपान के कारण प्रतिवर्ष लाखों लोग अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। धूम्रपान की लत को पूरा करने और धूम्रपान के कारण पैदा हुई बिमारियों के इलाज पर अरबों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व में लगभग डेढ़ अरब लोग धूम्रपान करते हैं और लगभग 50 लाख लोग प्रतिवर्ष धूम्रपान के घातक प्रभावों के कारण अकाल मौत के शिकार हो जाते हैं।

धूम्रपान के कारण मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि को ध्यान में रखते हुए ही 2 अक्टूबर, 2008 को गांधी जयन्ती पर पूरे देशभर में अधिसूचना जीएसआर 417 (ई) दिनांक 30 मई, 2008 के अनुरूप केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान से संबंधित नियम संशोधित करके पूर्णत: लागू कर दिया गया था। इन संशोधित नियमों के अंतर्गत धूम्रपान सभी सार्वजनिक स्थानों पर सख्ती से निषिद्ध है। सार्वजनिक स्थलों में ऑडिटोरियम, अस्पताल भवन, स्वास्थ्य स्थान, मनोरंजन केन्द्र, रेस्टोरेंट, सार्वजनिक कार्यालय, न्यायालय भवन, शिक्षण संस्थान, पुस्तकालय, सार्वजनिक यातायात स्थल, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, कार्यशाला, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, रिफ्रेशमेंट रूम, डिस्को, कॉफी हाउस, बार, पब्स, एयरपोर्ट लॉज आदि शामिल किए गए हैं। इस एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति इसका उल्लंघन करेगा उस पर 200 रुपये के आर्थिक दण्ड के साथ दण्डात्म कार्यवाही करने का प्रावधान किया गया है।  

धूम्रपान का नकारात्मक पहलू उजागर करते आंकड़े

  • भारत में 50 प्रतिशत पुरुष और 20 प्रतिशत महिला कैंसर के शिकार हैं।
  • 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर, 90 प्रतिशत फेफड़े का कैंसर और 77 प्रतिशत नली का कैंसर धूम्रपान करने से होता है। 
  • धूम्रपान जनित रोगों से निपटने में भारत सरकार का लगभग 27 हजार करोड़ रुपया प्रतिवर्ष खर्च हो रहा है।
  • चीन और ब्राजील के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है।
  • 20 फीसदी तंबाकू का इस्तेमाल सिगरेट में होता है।
  • देश के 20 करोड़ लोग धूम्रपान की चंगुल में हैं। इनमें से 45 लाख लोग दिल की बीमारी से ग्रसित हैं।
  • मोंटाना (अमेरिका) में 2002 में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हार्ट अटैक की घटनाओं में 40 प्रतिशत की कमी आंकी गई।
  • शोध में पाया गया है कि तंबाकू से बोन कैंसर का संबंध बहुत गहरा है।
  • तंबाकू में मौजूद निकोटिन के कारण विटामिन सी और ई की शरीर में भारी कमी हो जाती है। 
  • निकोटिन का महिलाओं पर घातक असर पड़ता है और उनकी रीढ़ की हड्डी बेहद कमजोर हो जाती है और जोड़ों के दर्द की समस्या पैदा हो जाती है। धूम्रपान से महिलाओं में धमनी की बीमारी का खतरा पैदा हो जाता है।

पैसिव स्मोकिंग है खतरनाक

पैसिव स्मोकिंग का अर्थ है कि आप धूम्रपान नहीं करते हैं लेकिन किसी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के कारण आप धूम्रपान द्वारा छोड़े गए धुएं में ही सांस ले रहे होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जो बच्चे धूम्रपान के धुएं की चपेट में आते हैं उन्हें सांस के रोग हो जाते हैं, जिसके कारण उनकी मृत्यु तक हो जाती है। कोई व्यस्क अगर इस धुएं की चपेट में आ रहा हो तो उसे हृदय का दौरा (हार्टअटैक), कैंसर और फेफड़े के रोग होते हैं जिसके कारण उसकी मृत्यु हो सकती है। इसके कारण गर्भस्थ शिशु की भी मृत्यु हो सकती है। जो मांएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं उनके बच्चे या तो मरे हुए पैदा होते हैं या फिर कम वजन के होते हैं और हमेशा ही स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के शिकार होते रहते हैं। जिस प्रकार के खतरे धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को रहते हैं ठीक उसी प्रकार के रोगों से उस धुएं के संपर्क में आने वाला व्यक्ति भी प्रभावित होता है।

आपके अपनों के लिए भी घातक है धूम्रपान 3

धूम्रपान से होने वाले रोग

धूम्रपान से निम्न परेशानियां हो सकती हैं-

1. ज्यादा धूम्रपान करने से बाल झड़ने लगते हैं और आदमी गंजा होने लगता है। 

2. सिगरेट में मौजूद कठोर जहर पेट को क्षतिग्रस्त कर देता है और पाचन एंजाइमों को ठीक से काम नहीं करने देता। तभी तो धूम्रपान करने वालों का पेट सही नहीं रहता।

3. धूम्रपान करने से जीभ की टेस्टबड्स खराब हो जाती हैं जिससे मुंह में किसी भी मसाले का स्वाद पता नहीं चल पाता। तभी तो ज्यादा स्मोकिंग करने वाले लोगों को तीखेपन का एहसास नहीं होता। 

4. धूम्रपान फेफड़ों की क्षमता को कम कर के शरीर की ऊर्जा को कम कर देता है। 

5. जैसे ही आप धूम्रपान करते हैं वैसे ही खून में एक तार जैसा तत्त्व बन जाता है जो कि डीएनए को क्षतिग्रस्त कर देता है।

6. धूम्रपान से रक्त की नलिकाओं में थक्के जम जाने की प्रक्रिया जिसे कि एथरोस्कलेरोसिस कहते हैं, बढ़ जाती है और इसकी वजह से नलिका में वसा जमा हो जाती है और खून के दौरे में कठिनाई आती है।

7. खून का दौरा ठीक प्रकार से न होने के कारण ही दिल का दौरा (हार्टअटैक), लकवा (आघात/स्ट्रोक) व पेरीफ्रल वेस्क्यूलर डिसीज जिसमें कि खून की धमनियां फूल कर फट जाती हंै, जैसे रोग हो जाते हैं।

8. जितनी छोटी आयु में आप धूम्रपान शुरू करते हैं उतना ही रोगों का खतरा अधिक होता है। यदि किसी ने धूम्रपान किशोरावस्था में शुरू कर दिया हो तो ये खतरा यानी हार्टअटैक का खतरा 4-6 गुना अधिक बढ़ जाता है।

9. पुरुषों में नपुंसकता का होना धूम्रपान से जुड़ा हो सकता है।

10. महिलाओं में धूम्रपान के कारण प्रजनन क्षमता कम होती रहती है और वे बांझपन की शिकार भी हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चे मृत पैदा हो सकते हैं या अचानक से गर्भपात भी हो सकता है और देखा गया है कि ऐसी महिलाओं के बच्चे समय से पहले व कम वजन वाले पैदा होते हैं।

11. धूम्रपान करने वालों में मोतियाबिंद होने का खतरा अधिक रहता है।

आज ही छोड़ें धूम्रपान

धूम्रपान करके आप केवल अपनी ही सेहत को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं बल्कि अपने आसपास रहने वाले लोगों व अपने बच्चों की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं तो ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप आज ही अपनी ये बुरी लत छोड़ दें। इस लत से छुटकारा पाने के लिए सबसे जरूरी काम है कि आप अपने इरादे मजबूत बनाएं कि आपको किसी भी तरह इसे छोड़ना ही है। उसके बाद अपने आसपास रहने वाले उन मासूम व निर्दोष लोगों को ध्यान में रखें, जिनकी कोई गलती नहीं है लेकिन फिर भी उन्हें आपकी इस लत का खामियाता भुगतना पड़ेगा। इसके बाद इससे मुक्त होने की तैयारी या योजना बनाएं क्योंकि वास्तविक रूप से तंबाकू छोड़ने से पहले मस्तिष्क और शरीर को तैयार करना जरूरी है। इसके बाद अपनी जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन लाएं। नशामुक्ति केंद्र के चिकित्सकों से संपर्क करें। धूम्रपान छोड़ने के लिए निकोटिन रिप्लेसमेंट थैरेपी, साइकोलॉजिकल थैरेपी, निकोटिन नैजल स्प्रे, निकोटिन की चूसने की गोलियां, निकोटिन गम और धूम्रपान छुड़ाने की गोलियां भी आप चिकित्सक की सलाह से ले सकते हैं। निकोटिन की चाहत रह-रह कर पीछा करती है। इसलिए यदि एक बार छोड़ दें तो हमेशा के लिए तंबाकू मुक्त रहें। कई लोग छोड़ने के बाद केवल एक कश पीने का लालच कर लेते हैं। कुछ लोग पूरी तरह छोड़ कर फिर से पीने लगते हैं। छोड़ने के बाद तीन महीने जोखिम भरे होते हैं। इसलिए हर हालत में अपने निश्चय पर अडिग रहें और किसी भी परिस्थिति में दोबारा धूम्रपान शुरू न करें। 

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