Stretching Exercises: कोई भी एक्सरसाइज को करते हुए ध्यान देने वाली बात यह होती है कि आप उसे सही से कर रहे हैं या नहीं। क्योंकि ज्यादातर लोगों को अपने आप एक्सरसाइज सही से करनी नहीं आती है और गलत एक्सरसाइज का भुगतान शरीर को उठाना पड़ता है। तो ऐसे में आप सबसे पहले कार्डियो करें उसके बाद किसी ट्रेनर के अंतर्गत स्ट्रेचिंग करें। जिससे वह आपको बता सकें कि आपको किस तरह से स्ट्रेचिंग करनी है। और उन लोगों के लिए भी इसे जानना बेहद आवश्यक है जो स्ट्रेचिंग को तवज्जो नहीं देते है। उन्हें ये जानना आवश्यक है कि स्ट्रेचिंग शरीर के लिए कितनी आवश्यक है। तो चलिए आइए आपको बताते है कि स्ट्रेचिंग के बारे में ये क्यों आवश्यक है साथ ही ही इसे करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए-
जब आप कार्डियो कर लेते है तो मांसपेशियों को आराम की जरूरत होती है। ऐसे में जरुरी है कि आप स्ट्रेचिंग करें क्योंकि स्ट्रेचिंग से शरीर में लचीलापन आता है साथ ही पैर में कोई भी झटका या चोट लगने का डर कम रहता है। इसलिए स्ट्रेचिंग को रोजमर्रा में जरूर करें। जिससे आपकी मांसपेशियों में किसी भी तरह की जकड़न नहीं रहती है। इसलिए यदि आप जिम जाते है तो स्ट्रेचिंग को करते समय सावधानियां जरूर बरतें। लेकिन उसके नियम के हिसाब से करने पर ध्यान जरूर दें।
स्ट्रेचिंग के फायदे

- स्ट्रेचिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपके शरीर की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। आप ज्यादा से ज्यादा कार्य कर पाते है। क्योंकि स्ट्रेचिंग आपके अंदर स्टेमिना को बढ़ाती है। और आप स्वयं को उर्जा से भरपूर महसूस करते है।
- कई लोगों आपने देखा होगा कि उनको थोड़ा ही कार्य करने पर कमर में दर्द पैरों मे दर्द या जल्दी-जल्दी मोच आना आदि परेशानी होने लगती है। इसका कारण शरीर मे लचक का नहीं होना है। इसलिए शरीर में लचीलेपन के लिए आपको स्ट्रेचिंग नियमित तौर पर करनी चाहिए। जिससे आपको इन परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा।
- जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे घुटनों में जकड़न बढ़ने लगती है और हमें उठने बैठने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में स्ट्रेचिंग करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। नियमित स्ट्रेचिंग करने वाले लोग आराम से जमीन पर भी बैठ पाते है और उन्हें बैठने में कोई दिक्कत महसूस नहीं होती है।
- स्ट्रेचिंग करने का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे हमारा ब्लड सर्कुलेशन तेजी से घूमता है। जिससे एंडॉर्फिन हॉर्मोन का रिसाव होता है। जिससे आपको खुशी महसूस होती है साथ ही नींद भी अच्छी आती है। यदि आप रात को सोने से पहले थोड़ी देर स्ट्रेचिंग कर लें। तो आपको अच्छी नींद आती है और आपको बेहद अच्छा महसूस होता है।
स्ट्रेचिंग करते समय बरतें सावधानियां

- स्ट्रेचिंग करते समय कई लोगों को पता नहीं होता है कि सांस लेना इसमें कितना जरूरी होता है। लेकिन कई लोग स्ट्रेचिंग करते समय सांस रोक लेते है जिसका शरीर पर गलत असर पड़ सकता है। इसलिए स्ट्रेचिंग करते समय सांस जरूर लें।
- जब आप स्ट्रेचिंग करते है तो उससे पहले लम्बी गहरी सांस लें। साथ ही सांस को रोकना नहीं है उससे धीरे धीरे छोड़ते जाना है जिससे आपको रिलैक्स महसूस होगा। स्ट्रेचिंग ज्यादा तनाव के साथ ना करके आराम से करें।
- स्ट्रेचिंग में जरूरी है कि आप कितने समय के लिए कर रहे है। स्ट्रेचिंग के लिए आपको वर्कआउट से पहले या बाद में 10 से 15 मिनट देने होते हैं। जिससे आपको इसका बेहतर रिजल्ट मिल सके। साथ ही स्ट्रेचिंग को आप कहीं भी आसानी से कर सकती है। जब आप कार्य करते थक जाए तब भी आप थोड़ी देर के लिए स्ट्रेचिंग कर सकती है।
- शुरुआत में कई लोग स्ट्रेचिंग सही से नहीं कर पाते है। जिससे वे और भी अधिक जोर लगाने लगते है इससे उनको झटका लग सकता है या फिर अंदूरूनी चोट लग सकती है। ऐसे में उन्हें चाहिए कि वे जोर जबरदस्ती करके कोई भी एक्सरसाइज न करें। नहीं तो आपके लिए स्ट्रेचिंग गलत साबित होगी।
- कई बार ऐसा होता है कि हम गलत मुद्रा में सो जाते है या फिर ऑफिस में काम करते-करते काफी समय हो जाता है, तो हमारी गर्दन अक्कड़ जाती है। ऐसे में आपके लिए गर्दन के लिए स्ट्रेचिंग जरूरी है। ऐसे मेें विशेषज्ञ बताते है कि आप दोनों को कलाइयों को पीछे के दूसरे स्ट्रेच करते हुए खींचे। लेकिन ऐसे में आप सही से नहीं करेंगे तो आपकी गर्दन में और भी झटका आ सकता है। तो जरूरी है कि दोनों को हाथों को प्रॉपर तरीके से मिलाना है।
- इसी तरह जब हम कंधों को स्ट्रेच करते है तो उनमें भी ध्यान देने वाली बात है कि आप कंधों को प्रॉपर तरीके से स्ट्रेच करें। अगर अपने कंधों को सही से स्ट्रेच करेंगे तो आपका कंधा फ्रिज भी हो सकता है। जिसमें कंधों को घुमाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए कंधों को स्ट्रेच करते समय सही से स्ट्रेच करें।
- स्ट्रेचिंग को आप जितना धीरे करेंगे वह आपके लिए उतनी फायदेमंद रहेगी। मांसपेशियों को आप बहुत ज्यादा खिंचाव न दें। साथ ही आपको स्ट्रेचिंग करते समय बहुत ज्यादा दर्द महसूस नहीं होना चाहिए। अगर आपको दर्द महसूस हो तुरंत रूक जाए।
- ध्यान रखें कि सुबह उठते ही स्ट्रेचिंग न करें। साथ ही स्ट्रेचिंग में एक ही पोजीशन में आपको ज्यादा देर नहीं रहना है। और सांस तो रोकना ही नहीं है क्योंकि इससे मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं या फिर तनाव पैदा होने लगता है। इसलिए स्ट्रेचिंग करते समय एक ही पोजीशन में न रहें। क्योंकि अगर एक बार आपके शरीर में दिक्कत आ गई तो आपके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है।
(योगा ट्रेनर सचिन चौधरी से बातचीत पर आधारित)
