‘‘मेरी मां व दादी दोनों ही गर्भावस्था में वैरीकोज वेन्स का शिकार हुई थीं। क्या मैं गर्भावस्था में इनसे बचाव कर सकती हूं?”

ये अनुवांशिक हैं और उम्मीद है कि आपकी टांगों में भी होंगी। लेकिन यदि आप चाहें तो थोड़े से परहेज से इस पारिवारिक परंपरा को तोड़ सकती हैं। ये आमतौर पर पहली गर्भावस्था में उभरती हैं और बाद की गर्भावस्थाओं में काफी बुरी हो जाती हैं। गर्भावस्था में रक्त का अतिरिक्त प्रवाह रक्त नलिकाओं पर दबाव डालता है,खासतौर पर टांगों की नसों में, जिसे गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध काम करना पड़ता है यानी फालतू रक्त को आपके हृदय की ओर धकेलना पड़ता है। 

गर्भाशय की वजह से पेल्विक रक्त नलिकाओं पर भी दबाव पड़ता है। कुछ हार्मोन का असर होता है और आप वैरीकोज़ वेन्स से ग्रस्त हो जाती हैं। इसके लक्षण पहचानना मुश्किल नहीं हैं‒पर वे काफी हद तक अलग हो सकते हैं। जिनमें टांगों में हल्का या तेज दर्द, भारीपन,सूजन या फिर कुछ भी नहीं हो सकता। हल्की नीली नसों की रेखा दिख सकती है या फिर टखने से ऊपरी जांघ तक सर्पीली नसें हो सकती हैं।

  • गंभीर मामलों में नसों की ऊपरी त्वचा सूजी हुई व शुष्क हो जाती है। (डॉक्टर की राय से माइश्चराइज़र का इस्तेमाल कर सकती हैं)। कई बार नसों की सतह पर हल्की जलन भी हो सकती है इसलिए डॉक्टर से इसके लक्षण बताने में देर न करें।
  • रक्त का प्रवाह बनाए रखें। जरूरत से ज्यादा देर तक खड़ा होना या बैठना ठीक नहीं है। बीच-बीच में अपने टखने हिलाएं। लेटते समय अपनी टांगों के नीचे तकिया रख लें। आराम करते या सोते समय अपनी बाईं करवट लेटें इससे रक्त का प्रवाह सही रहेगा। (इसी तरह दूसरी ओर से भी रहेगा)
  • वजन पर नजर रखें। जरूरत से ज्यादा वजन होगा तो रक्त परिसंचरण तंत्र को दुगुनी मेहनत करनी पड़ेगी।
 
  • भारी सामान न उठाएं। इससे वे नसें सूज सकती हैं।
  • शौच के समय ज्यादा जोर न लगाएं। इससे नसों पर भी दबाव पड़ेगा कब्ज न रहने दें।
  • सहारा देने वाले पैंटी होज़ पहनें या इलास्टिक की स्टाकिंस पहनें। इन्हें रात को सोने से पहले उतार दें।
  • ऐसे कपड़े न पहनें, जिनसे रक्त के प्रवाह में बाधा आती हो।
  • टाइट पैंटी, बेल्ट, पैंटी होज़ या इलास्टिक वाली सॉक्स वगैरह न पहनें। ऊंची हील भी नुकसान पहुंचा सकती है।
  • हर रोज थोड़ी कसरत व चहलकदमी करें। यदि तकलीफ हो तो एरोबिक्स,जॉगिंग, साईकलिंग या भार उठाने जैसी कसरतें न करें।
  • आहार में विटामिन सी की भरपूर मात्रा शामिल करें ताकि नसों की लोच व सेहत बनी रहे।

गर्भावस्था में इन नसों की सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती है। इसे आप डिलीवरी के कुछ माह बाद करवा सकती हैं वैसे तो आमतौर पर डिलीवरी के बाद यह समस्या स्वयं ही सुलझ जाती है।

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