‘‘मुझे डर है कि मुझे मूत्राशय मार्ग का संक्रमण हो गया है।”
आपके ब्लैडर को गर्भाशय के बढ़ते भार का दबाव सहना पड़ रहा है। इन दिनों संक्रमण फैलाने वाले कीटाणुओं (बैैक्टीरिया) को आगे आने का काफी मौका मिल जाता है इसलिए(यू.टी.आई.) होते देर नहीं लगती। गर्भावस्था के हार्मोन भी इसमें अपनी खास भूमिका अदा करते हैं। कई महिलाओं में तो इसके लक्षण
सामान्य से गंभीर हो सकते हैं; जैसे‒बार-बार मूत्र की इच्छा होना, मूत्र का रिसाव, मूत्र करते समय जलन, दर्द, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द या दबाव। मूत्र में से गंदी बदबू भी आ सकती है।
मूत्र की जांच से आसानी से इस संक्रमण का पता लगा सकते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं से रक्तस्राव व सफेद रक्त कोशिकाओं से संक्रमण का पता चलता है। एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स करके इस रोग से बचा जा सकता है। वैसे पहले तो आपको इससे बचाव की ही कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए आप गर्भावस्था के दौरान कई कदम उठा सकती हैं।
अधिक मात्रा में तरल पदार्थ व पानी लें ताकि बैक्टीरिया मूत्र-मार्ग से बाहर आ सके। इस दौरान चाय, कॉफी व एल्कोहल के सेवन से बचें। योनिमार्ग अच्छी तरह साफ करें व सेक्स के पहले व बाद में मूत्राशय अच्छी तरह खाली करें।
जब भी मूत्र के लिए जाएँ, ब्लैडर पूरी तरह खाली करें। मूत्र के बाद रुकें, फिर दोबारा कोशिश करें। मूत्र की इच्छा होने पर उसे रोकें नहीं, इस तरह संक्रमण की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अपने पैरीनियल एरिया को हवा लगने दें। सूती अधोवस्त्र पहनें। यदि संभव हो तो रात को सोते समय पजामे के साथ अधोवस्त्र न पहनें।
योनिमार्ग व इसके आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा व सूखा रखें। शौच के बाद आगे से पीछे की ओर पोंछें ताकि बैक्टीरिया योनिमार्ग में प्रवेश न करें। बबल बाथ व परफ्यूम युक्त पाउडर, शॉवर जैल, सोप, स्प्रे, डिटर्जेंट व टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल न करें। यदि पूल क्लोरीन युक्त न हो तो उसका इस्तेमाल न करें।
पौष्टिक आहार लें, भरपूर आराम करें। व्यायाम करें व ज्यादा तनाव न पालें।
कुछ डॉक्टर इस दौरान दही खाने की सलाह देते हैं ताकि एंटीबायोटिक लेने के साथ-साथ लाभदायक बैक्टीरिया का संतुलन भी बना रहे। आप इसके अलावा डॉक्टर से पूछकर और प्रोबायोटिक्स भी ले सकती हैं।
मूत्राशय मार्ग के निचले हिस्से का संक्रमण काफी गंभीर होता है लेकिन अगर इलाज न हो और ये किडनी तक पहुंच जाए तो इसकी वजह से प्रीमेच्योर प्रसव, जन्म से कम वजन वाला शिशु व दूसरी समस्याएँ जन्म ले सकती हैं। इसके लक्षण तो वही होते हैं लेकिन बुखार 103 से ज्यादा हो जाता है, सर्दी लगती है, मूत्र के साथ रक्त आने लगता है। पीठ में दर्द, उल्टी या चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे लक्षण सामने आते ही डॉक्टर को दिखाने में देर न करें।
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