नवजात बच्चों का पेट बहुत ही नाजुक और छोटा है। जिसे वो जितना जल्दी भर जाता है, उतना ही जल्दी खाली भी हो जाता है। अगर आप नये नवेले माता-पिता बने हैं तो आपके लिए बच्चे के खाने के शेड्यूल को फॉलो करना किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। कई माता पिता ऐसे होते हैं, जिन्हें नवजात बच्चे की फीडिंग शेड्यूल के बारे में सही जानकारी नहीं होती और वो इसकी शिकायत भी करते हैं। यहां इस बात का खास ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चों के खाने का पैटर्न उनके विकास को भी प्रभावित करता है। अगर आप अपने नन्हे बच्चों की फीडिंग शेड्यूल सही तरीके से निर्धारित कर पाती हैं तो आपको इसके कई फायदे मिल सकते हैं। हम इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि एक महीन एके बच्चे की फीडिंग शेड्यूल करना काफी मेहनत का काम हो सकता है। इसलिए कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से आप अपने बच्चे की फीडिंग शेड्यूल को निर्धारित कर सकती हैं। ये कैसे करना है, उसके बारे में पूरी जानकारी देगा हमारा ये लेख।

1.उम्र से हिसाब से बनाएं फीडिंग शेड्यूल– नवजात बच्चे का पेट काफी छोटा होता है। एक बार की फीडिंग में दो से चार चम्मच तक तरल पदार्थ ले सकता है। लेकिन जैसे जैसे वो बड़ा होता है, वैसे-वैसे उसका पेट भी बढ़ता है। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान आपका बच्चा कितना दूध पी रहा है, इसक बात को जानना बेहद मुश्किल है। लेकिन अगर आप उसे बोतल से दूध पिला रही हैं तो आपके लिए जानने में आसानी होगी। शोध के मुताबिक बच्चे की उम्र के साथ आपको भी उसके खाने का अंदाजा बढ़ने लगता है।

2.बच्चे को कितनी बार चाहिए खाना– ऐसा माना जाता है कि ब्रेस्ट फीडिंग करने वाले बच्चे बोतल से फीडिंग करने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा बाद फीडिंग करते हैं। क्योंकि बस्तन का दूध जल्दी पच जाता है। शोध के मुताबिक बच्चे के जन्म के एक घंटे बाद उसे ब्रेस्ट फीडिंग करवानी चाहिए। बच्चा छोटा है तो भी उसे 4 घंटे से ज्यादा भूखा नहीं रहना चाहिए। जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है उसकी ब्रेस्ट फीडिंग की आदत भी छूट जाती है। ऐसे में जानना मुश्किल हो जाता है कि सही शेड्यूल को कैसे फॉलो किया जाए।

• एक से तीन महीने तक के बच्चे को 24 घंटे में सात से आठ बार फीडिंग कराएं।

• तीन महीन के बच्चे को 24 घंटे में छः से सात बार फीडिंग कराएं।

बेबी फीडिंग शेड्यूल

• 6 महीन के बच्चे को 24 घंटे में 6 बार फीडिंग कराएं।

• 12 महीने के बच्चे दिन में चार बार फीडिंग कराएं।

3.ये भी रखें ख्याल– यहां आपको ये भी ख्याल रखने की जरूरत है कि अगर आपका बच्चा एक साल से कम की उम्र का है तो उसे ब्रेस्ट फीडिंग के अलावा कोई दूसरा तरल पदार्थ ना दें। चाहे वो गाय का दूध ही क्यों ना हो। क्योंकि वो सही पोषक तत्व नहीं देते और बच्चे के पेट के लिए परेशानी बन सकते हैं। आप 6 महीन के बाद बच्चे को पानी पिलाना शुरू कर सकते हैं। बच्चे को शहद भी न दें। शहद बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।

4.बच्चे के लिए बेहद जरूरी स्तनपान– बात जब नवजात बच्चे की आती है तो हमेशा से इस बात पर जोर दिया जाता है कि वो स्तनपान ही करे। स्तनपान के अलावा कुछ भी बच्चे के लिए घातक हो सकता है। ये आपके बच्चे के लिए क्यों जरूरी है ये भी जान लीजिये।

• स्तनपान से बच्चा हेल्दी रहता है।

• स्तन का दूध बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व देता है।

• स्तन का दूध बच्चे को एलर्जी, मोटापे और बीमारी से बचाकर रखता है।

• बच्चे को डायबीटीज और दस्त से बचाता है।

• बच्चे की विकास के साथ हेल्दी वजन का भी विकास होता है।

• स्तन का दूध पर्यावरण के लिए भी सही है।

• बच्चा भूखा है तो स्तन का दूध उसे इन्तजार नहीं करवाता।

5.मां के लिए भी सेहतमंद– अपने बच्चे को स्तनपान कराने वाली मां के लिए उससे खूबसूरत कोई दूसरा पल हो ही नहीं सकता। अगर मां अपने बच्चे को स्तनपान करवाती है तो जितना ये बच्चे ही सेहत के लिए अच्छा है उतना ही मां भी सेहतमंद रहती हैं। तो चलिए इससे जुड़े मां को मिलने वाले फायदे भी जान लीजिये।

• बच्चे को ढूढ़ पिलाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लम रहता है।

• कैंसर होने का खतरा भी कम रहता है।

• अपने बच्चे के साथ रिश्ता और भी मजबूत होता है।

• बच्चे का आपसे जुड़ाव बढ़ता है।

6. कैसे जानें भूखा है बच्चा?- हालांकि ये आम बात है कि जब भी बच्चे को भूख लगने का अंदेशा तभी लगाया जा सकता है जब वो रोने लगता है या संकेत देते है। आप इसे कैसे पहचाने ये भी जानिए।

• गोद लेने में बच्चा निप्पल की तलाश करता है।

• मुंह में बार-बार हाथ डालता है।

• होठों का चाटता है।

• लगातार परेशान करता है।

7.बच्चों को कब खिलाएं ठोस फीडिंग-जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है उसमें कई तरह के बदलाव आने लगता है। जब बच्चा जब ठोस खाने लायक हो जाता है, तो यहां ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि शुरूआती दौर में उसे क्या-क्या खिलाया जाए।

• पॉपकार्न या नट्स खिला सकते हैं।

• ताजे फलों को नर्म करके खिला सकते हैं।

• अच्छे से उबला हुआ मांस खिला सकते हैं।

• पी नट्स बटर खिला सकते हैं।

• दाल में रोटी मसलकर खिलाएं।

तो ये कुछ ऐसी जानकारी है जिसकी मदद से आप पाने नवजात बच्चे की फीडिंग शेड्यूल को जान और समझ सकती हैं। साथ ही उसे निर्धारित भी कर सकती हैं। हालांकि यहां ये भी ध्यान रखें कि हर बच्चा दूसरे बच्चे से अलग होता है। इसलिए खान पान में जभी बदलाव करें, अपने डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

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