एक से अधिक शिशु
क्या आपने एक से अधिक शिशुओं का गर्भ धारण किया? आपको यह खबर सुनते ही दुःख, खुशी व हैरत का एक साथ सामना करना पड़ा होगा। इन सब भावों के बीच ही कुछ सवालों ने भी सिर उठाया होगा‒क्या मेरे शिशु स्वस्थ होंगे? क्या मैं स्वस्थ रहूँगी? क्या मुझे अपना डॉक्टर बदल कर किसी विशेषज्ञ के पास जाना होगा?मुझे कितना भोजन करना होगा या कितना वजन बढ़ाना होगा? क्या मेरे पेट में दो शिशुओं लायक जगह होगी? क्या मेरे घर में दो शिशुओं लायक जगह होगी? क्या मैं पूरे नौ महीने तक अपना गर्भ रख पाऊँगी? क्या मुझे सारा समय बिस्तर पर काटना होगा? क्या दो शिशुओं को जन्म देना मुश्किल होगा?
मल्टीपल प्रेगनेंसी
इन दिनों मल्टीपल प्रेगनेंसी काफी बढ़ती जा रही है क्योंकि 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएँ माँ बन रही हैं। वे हारमोन में बदलाव की वजह से अधिकतर जुड़वाँ को जन्म देती हैं। इसके अलावा फर्टीलिटी के इलाज व मोटापे को भी इसकी एक वजह बताया जाता है।
आप क्या सोच रही होंगी ?
एक मल्टीपल गर्भावस्था का पता लगाना
‘‘मुझे हाल ही में पता चला कि मैं गर्भवती हूं और लगता है कि मैं जुड़वाँ बच्चों की माँ बनूँगी। इसका पक्का पता कैसे लगाऊँ?”
वो दिन चले गए, जब डिलीवरी कक्ष में अचानक जुड़वाँ बच्चे देख कर माँ-बाप हैरत में पड़ जाते थे अब तो माँ-बाप को काफी पहले ही यह खुशखबरी मिल जाती है।
अल्ट्रासाउउंड :– अल्ट्रासाउंड की तस्वीर में सबूत आपके सामने होगा। अगर आप पक्का सबूत चाहती हैं तो अल्ट्रासाउंड से बेहतर सबूत हो ही नहीं सकता। पहली तिमाही में इसे 6 से 8 हफ्ते के बीच एक अल्ट्रासाउंड होता है, जिसमें आपके मल्टीपल्स का पता चल सकता है लेकिन अगर आप इस मामले में और भी पक्का होना चाहती हैं तो 12 सप्ताह तक इंतजार करें। पहले अल्ट्रासाउंड में दोनों शिशु एक साथ दिखाई नहीं देते।
डॉपलट :– करीब नवें महीने के बाद डॉक्टर डॉपलर से शिशु के दिल की धड़कन जांचते हैं। हालांकि एक ही डॉपलर से दो शिशुओं के दिल की धड़कन जांचना थोड़ा मुश्किल है लेकिन अगर डॉक्टर अनुभवी हुए तो वे ऐसा कर पाएंगे और फिर अल्ट्रासाउंड से खबर पक्की हो जाएगी।
हार्मोन का स्तर :– गर्भधारण के 10 दिन बाद आपके मूत्र में प्रेगनेंसी हॉर्मोन एचसीजी आ जाता है जो कि पहली तिमाही में काफी तेजी से बढ़ता है। कई बार इसके बढ़ते स्तर से भी,एक से अधिक शिशु होने का अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन कई बार जुडवाँ होने पर भी हार्मोन का स्तर सामान्य होता है इसलिए आप पक्का संकेत नहीं मान सकते।
जांच के नतीजे :– दूसरी तिमाही में ट्रिपल या क्वैड स्क्रीन जांच से अच्छी तरह पता चल जाता है कि आपके पेट में एक से अधिक शिशु हैं।
आपकी माप :– शिशु जितने ज्यादा होंगे,गर्भाशय का आकार उतना ही ज्यादा होगा। हरबार डॉक्टर आपके गर्भाशय का आकार उतना ही ज्यादा माप होने पर भी मल्टीपल प्रेगनेंसी का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि हर बार ऐसा नहीं होता।
वैसे कई सारी बातों से जब आप अंदाजा लगा लेंगी तो अल्ट्रासाउंड से इसकी पुष्टि हो जाएगी।
फ्रेटरनल या आइडेंटिकल
फ्रेटरनल जुड़वाँ में दो अंडे एक साथ फर्टीलाइज होते हैं। आइडेंटिकल जुड़वां में एक ही अंडा फर्टीलाइज होकर दो भ्रूणों में बँट जाता है। इनके प्लेसेंटा एक से भी हो सकते हैं और अलग–अलग भी। आमतौर पर फ्रेटरनल जुड़वां शिशु ही अधिक होते हैं। यदि आपके परिवार में जुड़वां शिशुओं की परंपरा रही है तो हो सकता है कि आप भी जुड़वां शिशुओं को जन्म दें।
डॉक्टर का चुनाव
‘‘ मुझे हाल ही में पता चला कि मैं जुड़वाँ बच्चों को जन्म दूँगी। क्या मुझे अपनी नियमित प्रसूति विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए या फिर किसी दूसरी विशेषज्ञ को दिखाऊँ?
अगर आप अपने डॉक्टर से खुश हैं तो उसे जुड़वाँ बच्चों की वजह से बदलने की न सोचें। आप नियमित रूप से अपने चेकअप के लिए जाती रहें।
क्या आप इसके अलावा थोड़ी अतिरिक्त देखभाल भी चाहती हैं? कई बार डॉक्टर भी ऐसे मरीजों को विशेषज्ञ के पास सलाह-मशवरे के लिए भेजते हैं। अगर आप भी इन दोनों का मेल कर सकीं तो बेहतर होगा क्योंकि जुड़वां को जन्म देने वाली माँ की कुछ खास जरूरतें होती हैं। उनके लिए ‘प्रीनेटोलॉजिस्ट’ की सलाह काफी कारगर हो सकती है और अगर आपकी गर्भावस्था खतरे के निशान वाली है, तब तो यह सलाह और भी जरूरी हो जाती है।
ऐसे विशेषज्ञ को चुनते समय उनके अस्पताल पर भी ध्यान दें। आपको ऐसा अस्पताल चुनना होगा जहाँ प्रीमेच्चोर शिशुओं के लिए विशेष देखभाल की व्यवस्था हो क्योंकि जुड़वाँ के मामलों में अक्सर ऐसा होता है। डॉक्टर से इस बारे में उनकी नीतियों पर भी चर्चा करें। क्या 37-38 सप्ताह में डिलीवरी कर दी जाएगी या फिर सब कुछ ठीक रहने पर इंतजार कर सकते हैं? क्या योनि मार्ग से डिलीवरी होगी या ऐसे मामलों में ऑप्रेशन ही करना पड़ता है? आप लेबर या डिलीवरी रूम में शिशुओं को जन्म दे पाएँगीं या सुरक्षा के लिहाज से पहले ही ऑप्रेशन थियेटर में ले जाएँगे?
डॉक्टर के चुनाव के बारे में, इस पुस्तक में अन्यत्र जानकारी भी दी गई है।
गर्भावस्था के लक्षण
मैंने सुना है कि जुड़वां बच्चों का गर्भ होने पर लक्षण सामान्य के मुकाबले दुगने बुरे हो जाते हैं। क्या यह सच है?
कई बार जुड़वाँ बच्चों की वजह से गर्भावस्था में काफी मुश्किलें होती हैं लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।सिंगल प्रेनेंसी की तरह मल्टीपल प्रेगनेंसी भी अपने-आप में अलग होती है। हो सकता है कि एक शिशु वाली माँ सारी गर्भावस्था में उल्टियों से परेशान रहे और मल्टीपल प्रेगनेंसी वाली माँ का जी एक बार भी न मिचलाए। ऐसा ही बाकी लक्षणों के साथ भी होता है।
हालांकि आपको यह नहीं समझना चाहिए कि टाँगों की ऐंठन, उल्टियाँ, वैरीकोज़ वेन्स आदि दुगने हो जाएँगे। आप इन्हें गिन नहीं सकतीं। औसतन प्रेगनेंसी में ये लक्षण थोड़े ज्यादा हो सकते हैं।
ऐसे मामलों में मार्निंग सिकनेस, उल्टी व जी मिचलाना जैसे लक्षण ज्यादा हो सकते हैं जो कि जल्दी शुरू होते हैं व देर तक चलते हैं। ऐसा हार्मोन के बढ़े हुए स्तर की वजह से होगा।
पेट में जितने शिशु होंगे, अपच की तकलीफें (छाती में वजन, अपच व अफारा वगैरह) उतनी ज्यादा होंगीं।
‘थकान’- इसके बारे में क्या कहें। आप जितना भार उठाएँगी, थकान उतनी ही ज्यादा होगी। आपकी ऊर्जा का क्षय होने से भी थकान होगी। पेट बड़ा होने की वजह से नींद पूरी नहीं ले पाएंगी तो भी थकान होगी।
इसके अलावा बाकी सभी शारीरिक तकलीफें-हर गर्भावस्था अपने साथ दुःख और तकलीफे लाती हैं। हो सकता है कि जुड़वाँ गर्भावस्था में उससे कुछ ज्यादा हो। जितने ज्यादा शिशु गर्भ में होंगे; पेट में जलन, टाँगों में ऐंठन, टाँगों की सूजन वैरीकोज़ वेन्स व सांस लेने की तकलीफ उतनी ही बढ़ जाएगी।
बुरा न मानें, तकलीफ तो थोड़ी ज्यादा होगी लेकिन आपको ईनाम भी तो दुगना मिलेगा।
वजन बढ़ना
‘‘जुड़वाँ बच्चों के लिए मेरा वजन ज्यादा होना चाहिए लेकिन कितना ज्यादा?
वजन बढ़ाने को तैयार हो जाएं डॉक्टरों के अनुसार जुड़वाँ की माँ का वजन 35 से 45पौंड व तीन शिशुओं की माँ का वजन 50 पौंड तक बढ़ना चाहिए। हालांकि अगर आपका वजन पहले से कम ज्यादा है तो इसमें थोड़ा फेर-बदल हो सकता है। वैसे वजन बढ़ाना हमेशा इतना आसान भी नहीं होता। गर्भावस्था में वजन बढ़ाते समय कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पहली तिमाही की मॉर्निंग सिकनेस सबसे पहले आड़े आएगी आप चाहकर भी कुछ खा-पी नहीं पाएँगी। उस समय एक हफ्ते में एक पाउंडवजन बढ़ाने का लक्ष्य रखें, अगर न बढ़ा सकें तो निराश न हों। बस अपनी विटामिन की दवाएँ लेती रहें व खूब सारा पानी पीएँ।
दूसरी तिमाही थोड़ी आरम देह हो जाएगी,तब आप शिशुओं को काफी मात्रा में पौष्टिक तत्त्व देकर अपना वजन बढ़ा सकती हैं।अगर पहली तिमाही में बिल्कुल वजन नहीं बढ़ता या फिर वजन घट जाता है तो आपको जुड़वां के लिए हर सप्ताह 1 1/2 से 2 पौंड और तीन बच्चों के लिए 2 से 2 1/2 पौंड वजन बढ़ाने की सलाह दी जा सकती है।आपको प्रोटीन कैल्शियम व साबुत अनाज की फालतू सर्विंग लेकर अपना वजन तेजी से बढ़ाना होगा। अगर अपच व छाती में जलन से परेशान हों तो अपने खाने को 6 हिस्सों में बांट लें।
तीसरी तिमाही में सातवें महीने तक 1 1/2 से 2 पौंड वजन बढ़ाने का लक्ष्य रखें। 32 सप्ताह तक आपका हर बच्चा 4 पौंड तक हो जाएगा और पेट में ज्यादा खाने की जगह नहीं बचेगी।फिर भी आप काफी कुछ खा सकती हैं। संतुलित पौष्टिक आहार में मात्रा की बजाए गुणवत्ता पर ध्यान दें। आपको भूलना नहीं चाहिए कि मल्टीपल प्रेगनेंसी 40वें सप्ताह तक नहीं होती।
मल्टीपल प्रेगनेंसी में वजन
गर्भावस्था का स्तर पहली तिमाही वजन दूसरी तिमाही वजन तीसरी तिमाही वजन कुल वजन
जुड़वां के साथ कम वजन 4-6 पौंड 19-23 पौंड 17-21 पौंड 40-50 पौंड जुड़वां के साथ सामान्य से अधिक वजन 3-4 पौंड 19-22 पौंड 13-19 पौंड 34-45 पौंड तीन शिशु 4-5 पौंड 30 + पौंड 11-15 पौंड 45 + पौंड
मल्टीपल टाइम लाइन
आपको 40 सप्ताह तक गिनती नहीं करनी होगी।जुड़वां प्रेगनेंसी 37वें सप्ताह तक ही हो पाती है यानी 3 सप्ताह पहले! मल्टीपल प्रेगनेंसी भी आखिर तक माता-पिता को हैरानी में रखती है यानी कुछ भी निश्चित नहीं होता। वह 39 सप्ताह तक भी टिक सकती है या फिर 37वें सप्ताह से पहले ही शिशु का जन्म हो सकता है। यदि 37वें सप्ताह तक सब ठीक रहे तो डॉक्टर 38वें सप्ताह में प्रसव शुरू करवा सकते हैं। इस बारे में डॉक्टर से पहले ही पता कर लें कि वे मल्टीपल प्रेगनेंसी के आखिरी समय में कैसी नीति अपनाना चाहेंगे।
कसरत
‘‘मैं एक धावक हूँ लेकिन क्या मैं जुड़वां बच्चों के गर्भ के साथ अभ्यास जारी रख सकती हूँ?”
वैसे तो व्यायाम से गर्भावस्था में फायदा ही होता है लेकिन अगर आप जुड़वां बच्चों की माँ बनने वाली है। तो थोड़ी सावधानी रखनी होगी। डॉक्टर आपको दौड़ने की बजाय किसी दूसरे व्यायाम की सलाह दे सकते हैं। ऐसा कोई भी वर्क आउट न करें,जिससे सर्विक्स पर दबाव पड़े या शरीर का तापमान बढ़ जाए। इससे प्री-टर्म लेबर की संभावना बढ़ जाती है।
आप तैराकी, वाटर एरोबिक्स, स्ट्रैचिंग,योग या साइकलिंग चुन सकती हैं। इसके साथ ही कीगल करना न भूलें यह आपके पेल्विकफलोर को मजबूती देता है। किसी भी वर्कआउट के दौरान थकान हो, तो वहीं रुक जाएँ। थोड़ा पानी पी कर आराम करें। अगर तबीयत न संभले तो डॉक्टर को फोन करें।
