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ओव्यूलेशन
प्रेगनेंसी की शुरुआत होते ही तरह तरह के मिथक सुनने को मिलते हैं। लोग अपने अनुभव के आधार पर कई सलाह देते हैं। उनमें से कुछ सलाह तो मानने योग्य होते हैं तो कुछ मिथक होते हैं। अगर आपको सही जानकारी नही है तो अक्सर आप कई मिथक में फंस जाते हैं और कभी कभी इन मिथक की वजह से आप परेशानियों का सामना भी करते हैं। तो अब ध्यान दें कि आखिर क्या हैं वो मिथक जिसको ध्यान नहीं देना है।
 
मिथक :- हर रोज़ सेक्स करने से स्पर्म की गिनती कम होती है तथा गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है।
तथ्य :- हालांकि पहले इसे सच माना जाता था लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि ओव्यूलेशन के दौरान हर रोज सेक्स करने से कहीं बेहतर नतीजे सामने आ सकते हैं ।
 
मिथक :- बाॅक्सर शाॅट पहनने से प्रजनन क्षमता बढ़ती है।
तथ्य :- वैज्ञानिक तो अभी इसी ‘बाॅक्सर बनाम ब्रीफ’ के विवाद में उलझे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका थोड़ा बहुत फर्क तो पड़ता ही है। पुरूषों को ऐसे अंडरगारमेंट्स पहनने चाहिए जिससे वृषणों का तापमान ठंडा रहे व उन्हें हवा लगती रहे।
 
मिथक :- इंटरकोर्स में मिशनरी पोजीशन गर्भाधान के लिए सबसे बेहतर होती है।
तथ्य:- ओव्यूलेशन के समय जो म्यूकस पतला हो जाता है वहीं शुक्राणुओं को फेलापियन ट्यूब तक ले जाता है। यदि शुक्राणु वहां नहीं पहुंच पा रहे तो कोई भी पोजीशन काम नहीं आएगी। आपको इंटरकोर्स के बाद थोड़ी देर सीधा लेट जाना चाहिए ताकि स्पर्म, भीतर जाने से पहले वैजाइना से ही बाहर न आ जाए। 
 
मिथक :- लुब्रीकेंट स्पर्म को सही जगह पहुंचाने में मदद करते हैं। 
तथ्य :- यह सच नहीं है। इसकी वजह से वैजाइना का पीएच बैलेंस बदल सकता है जो कि स्पर्म के लिए अच्छा नहीं होता। 
 
मिथक :- दिन में सेक्स करने से गर्भधारण करने में आसानी होती है। 
तथ्य:- सुबह स्पर्म का स्तर उंचा होता है लेकिन इसके कोई मेडिकल प्रभाव नहीं है। आप चाहें तो सुबह भी इंटरकोर्स करें लेकिन यह न सोचें कि दोपहर को मन करने पर नहीं किया जा सकता। 
 
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