वैसे तो ये विकृतियां थोड़ी-बहुत होती ही हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि माता-पिता के वे दोष बच्चों में भी दिखाई दें। गर्भाधान से पहले या बाद में माता-पिता या किसी एक की सारी जांच हो सकती है लेकिन इस जांच की हमेशा आवश्यकता नहीं होती। यह तभी करनी पड़ती है जब कोई निश्चित अनियमितता सामने आए। यह संकेत भौगोलिक या जातीय भी हो सकता है। जैसे सभी कॉकेशियंस को ‘सिस्टिक फाइब्रोसिस’ की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
जिन यहूदी दंपत्तियों के पूर्वज पूर्वी यूरोप से आए थे,उन्हें ‘टे-शेक’ व कानावान रोग के लिए जांच कराने की सलाह दी जाती है। अगर आपके परिवार में किसी भी रोग का इतिहास रहा हो तो उसकी जांच अवश्य की जानी चाहिए। उसी तरह काले रंग वाले दंपत्तियों को ‘सिकलसैल एनीमिया ट्रेट’ व एशियाई लोगों को पैलासीमिया की जांच करानी चाहिए। वैसे अधिकतर मामलों में दोनों में से किसी एक की जांच की ही जरूरत पड़ती है। अगर वह जांच पॉजिटिव आई तो दोनों की जांच करनी पड़ती है।
आपको अपने दादा-दादी व अन्य निकट संबंधियों से पुराने रोगों के इतिहास की सारी जानकारी ले लेनी चाहिए ताकि गर्भाधान से पहले ही अपनी तसल्ली की जा सके। आमतौर पर अधिकतर माता-पिता को किसी भी जेनेटिक सलाह की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ मामले ही ऐसे होते हैं, जब चिकित्सक को माता-पिता से इस विषय में बात करनी पड़ती है, वे हैं-
- जिन दंपत्तियों के रक्त की जांच में ऐसे जेनेटिक रोगों का पता चलता है, जो उनके बच्चों तक पहुंच सकते हैं।
- जिन दंपत्तियों के यहां तीन से अधिक गर्भपात हो चुके हैं।
- जिन दंपत्तियों के पारिवारिक इतिहास में कोई जेनेटिक रोग हो। कुछ मामलों में माता-पिता की डी.एन.ए. जांच से भी कई संदेह स्पष्ट हो जाते हैं।
- ऐसे माता-पिता, जिनमें से एक जन्मजात विकृति से ग्रस्त हो।
- ऐसी गर्भवती मां जिसके स्क्रीनिंग टेस्ट की जांच पॉजिटिव आई हो।
- निकट संबंधों वाले दंपत्तियों में भी यह शिकायत पाई जा सकती है।
पीढ़ी दर पीढ़ी एक से दूसरे व्यक्ति में चलती आ रही बीमारी को जेनेटिक डिजीज कहा जाता है। इनमें से कुछ बीामरियों का इलाज संभव तो कुछ का इलाज संभव नहीं होता है। इसलिए अगर आप गर्भधारण करने के सोच रही हैं तो गर्भधान से पहले जेनेटिक टेस्ट जरूर करवाएं ताकि दंपति एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे पाएं।
ये भी पढ़ें
ऐसे करें 35 वर्ष की आयु के बाद प्रेगनेंसी की प्लानिंग
पिता की अधिक आयु से भी बढ़ता है गर्भपात का खतरा
बुलीमिया से पीड़ित हैं तो गर्भावस्था में 11 बातों का रखें ध्यान
आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
