Peegasm Effects: पीगैज्म, जिसे यूरिन या पी ऑर्गेज्म के रूप में जाना जाता है। ये एक नया ट्रेंड है जिसका लाभ युवा उठा रहे हैं। ये सेंसेशन तब होता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर अपनी यूरिन को एक ज्यादा लंबी अवधि तक रोक के रखता है, जिसके परिणामस्वरूप ब्लैडर पर दबाव पड़ता है। इस स्थिति में यूरिन करने पर इंटेंस प्लेजर यानी ऑर्गेज्म की अनुभूति हो सकती है। हालांकि कुछ लोगों को पी-गैज्म एक सुखद अनुभव लग सकता है लेकिन इस कार्य से जुड़े संभावित जोखिम और दुष्प्रभाव हो सकते हैं। खासकर जब इस प्रक्रिया को नियमित रूप से किया जाता है। चलिए जानते हैं पीगैज्म यूरिनरी हेल्थ पर किस प्रकार प्रभाव डालता है।
पीगैज्म कैसे काम करता है

जब ब्लैडर यूरिन से अत्यधिक भर जाता है, तो ये दबाव न केवल अंगों को प्रभावित करता है बल्कि क्लाइटोरिस को भी प्रभावित कर सकता है। इस दबाव के अचानक रिलीज होने से ब्लैडर में नसें ट्रिगर करती हैं जिससे पीगैज्म हो सकता है। अधिक देर तक यूरिन को रोकने से ब्लैडर पर प्रभाव पड़ता है और इसकी वॉल को फैलाता है। ये दबाव ब्लैडर की नसों को उत्तेजित कर सकता है। जो यौन उत्तेजना के लिए मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं। जब व्यक्ति अंत में यूरिन पास करता है तो उसे सुखद अनुभूति हो सकती है। जिसे कुछ लोग ऑर्गेज्म के रूप में वर्णित करते हैं।
पीगैज्म के साइड इफेक्ट

पीगैज्म कई लोगों को अच्छा लगता है लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट हैं जिसके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती।
यूटीआई
सबसे आम और महत्वपूर्ण जोखिमों में से एक है यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन। जब यूरिन ब्लैडर में लंबी अवधि के लिए रहता है, तो ये बैक्टीरिया को जन्म दे सकता है जिसके परिणामस्वरूप संक्रमण हो सकता है। यूरिन के दौरान दर्द, जलन, बार-बार यूरिन आना और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
ब्लैडर मसल्स को नुकसान
पीगैज्म का दूसरा संभावित दुष्प्रभाव है ब्लैडर मसल्स को नुकसान। जब ब्लैडर नियमित रूप से अपनी सीमा तक खिंचता है, तो ये यूरिन पास करने वाली मांसपेशियों या मसल्स को कमजोर कर सकता है। इससे ब्लैडर की विभिन्न समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी की समस्या

ज्यादा देर तक यूरिन रोकने से किडनी की समस्या हो सकती है। किडनी ब्लड से वेस्ट और एक्स्ट्रा फ्लूड को छानती है और यूरिन का उत्पादन करती है। जब यूरिन को बहुत देर तक रोका जाता है तो ये गंदगी किडनी में वापस आ सकती हे और समय के साथ नुकसान पहुंचा सकती है। इससे यूरिन में संक्रमण, किडनी स्टोन और कैंसर तक हो सकता है।
कंडीशनिंग प्रभाव
नियमित रूप से पीगैज्म का अभ्यास करने से कंडीशनिंग प्रभाव हो सकता है। इससे व्यक्ति का शरीर इस प्रक्रिया के माध्यम से केवल यौन सुख का अनुभव करने का आदि हो जाता है। ये सेक्स या मास्टरबेशन जैसे अन्य माध्यमों से सेक्स का अनुभव करना कठिन या असंभव बना सकता है।
असंयम
अधिक देर तक यूरिन को रोके रखने से ब्लैडर में बैक्टीरिया हो सकते हैं। इससे किडनी में परेशानी और शिथिलता के साथ-साथ असंयम भी हो सकता है। नतीजतन असंयम तब विकसित हो सकता है जब ब्लैडर की मांसपेशियों को समय रहते नॉर्मल न किया जाए।
