देवताओं की प्रसन्नता, चित्त की शुद्धि और विविध रोगों के नाश में मुद्राओं से बहुत सहायता मिलती है। मुद्रा तत्त्व को समझकर इनका साधन करना चाहिए।

सुमुखम्, सम्पुरम्, विततम्, विस्तृतम्, द्विमुखम्, त्रिमुखम्, चतुर्मुखम्, पंचमुखम्, षण्मुखम्, अधोमुखम्, व्यापकंजालिकम्, शकटम्, यमपाश्म्, ग्रन्थितम , सन्मुखोन्मुखम्, प्रलंबम्, मुष्टिका, मत्स्त्य, कूर्म, वराहक, सिंहक्रांतम्, महाक्रांतम्, मुग्दर और पल्लव, ये 24 मुद्राएं हैं, जो जप के आदि में दिखलाई जाती हैं। इनके दिखाए बिना जपादि का व्यर्थ होना कहा गया है।

योग की 24 मुद्राएं

1. सुमुखम्- दोनों हाथों की उंगलियों को मोड़कर परस्पर मिलाएं।

2. सम्पुरम्- दोनों हाथों को फुलाकर मिलाएं।

3. विततम्- दोनों हाथों की हथेली परस्पर सामने रखें।

4. विस्तृतम्- दोनों हाथों की उंगलियां खोलकर हाथों को कुछ अधिक अलग करें।

5. द्विमुखम्- दोनों हाथों की कनिष्ठिका से कनिष्ठका तथा अनामिका से अनामिका मिलाएं।

6. त्रिमुखम्- दोनों मध्यमाओं को भी और मिलाएं।

7. चर्तुमुखम्- दोनों तर्जनियां को भी मिलाएं।

8. पंचमुखम्- दोनों अंगूठे को भी मिलाएं।

9. षण्मुखम्- हाथ वैसे ही रखते हुए कनिष्ठिका खोलें।

10. अधोमुखम्- उल्टे हाथों की उंगलियों को मोड़ तथा मिलाकर नीचे की ओर करें।

11. व्यापकंजालिकम- वैसे ही मिले हुए हाथों को शरीर की तरफ से घुमाकर सीधा करें।

12. शकटम्- दोनों हाथ को उल्टा कर अंगूठे से अंगूठा मिला तर्जनियों को सीधी रखते हुए मुट्ठी बांधें।

13. यमपाश्म्- तर्जनी से तर्जनी बांधकर दोनों मुट्ठी बांधें।

14. गं्रथितम्- दोनों हाथों की उंगलियों को परस्पर गूंथें।

15. सन्मुखोन्मुखम्- हाथों की पांचों अंगुलियों को मिलाकर प्रथम बाएं पर दाहिना, फिर दाहिने पर बायां हाथ रखें।

16. प्रलंब- उंगलियों को कुछ मोड़ दोनों हाथों को उल्टाकर नीचे की ओर करें।

17. मुष्टिका- दोनों अंगूठे ऊपर रखते हुए दोनों मुट्ठियां बांधकर मिलाएं।

18. मत्स्त्य– दाहिने हाथ की पीठ पर बायां हाथ उल्टा रखकर दोनों अंगूठे अलग करें।

19. कूर्म- सीधे बाएं हाथ की मध्यमा, अनामिका तथा कनिष्ठिका मोड़कर उल्टे दाहिने हाथ की मध्यमा- अनामिकाओं को उन तीनों उंगलियों के नीचे देकर बाईं तर्जनी पर दाहिनी कनिष्ठिका और बाएं अंगूठे पर दाहिनी तर्जनी रखें।

20. बराहक- दाहिनी तर्जनी को बाएं अंगूठे से मिला, दोनों हाथों की उंगलियों को परस्पर बांधें।

21. सिंहक्रांतम्- दोनों हाथों को कानों के समीप करें।

22. महाक्रांतम्- दोनों हाथों की उंगलियों को कानों के समीप करें।

23. मुग्दर- मुट्ठी बांध दाहिनी कोहनी बाईं हथेली पर रखें।

24. पल्लव- दाहिने हाथ की उंगलियों को मुख के सम्मुख मिलाएं।

यह भी पढ़ें –Celebrity Bag collections – प्रियंका चोपड़ा के पास है शानदार लग्जरी बैग कलेक्शन, आप भी देखें तस्वीरें