महिलाओं के जीवन में चालीस का पडाव एक महत्वपूर्ण दशा है। इस उम्र के बाद महिलाओं को सूक्ष्म परिवर्तन के दौरे से गुजरना पड़ता है। ये बदलाव गंभीर स्वास्थ्य समस्या बने, इससे पहले ही उन्हें सोचना शुरू कर देना चाहिए। प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ0 साधना जैन कहती हैं –
कुछ सामान्य स्वास्थ्य बदलाव, जिनसे महिलाओं को गुजरना पड़ता है …..
मेटाबाॅलिज्मः- प्रति दशक मे दो फीसदी की दर से धीमा।
मांसपेशीः- प्रत्येक 10 साल में 6.7 पाउंड की कमी।
हड्डीः- 30 के बाद प्रति वर्ष एक अनुपात की गिरावट।
हाॅर्मोनल बदलावः- उच्च तनाव स्तर एंव हाॅर्मोनल बदलाव से स्वास्थ्य में गिरावट।
तनावः- ज्यादा तनाव, खासकर बच्चों , माता-पिता , स्वास्थ्य, कॅरियर एंव आर्थिक चिंताओ की वजह से।
अवसादः-वर्तमान एंव आने वाले जीवन में अत्यधिक आंशका।
वर्तमान में कई सारी ऐसी जांचे उपलब्ध है, जो बीमारियों की रोकथाम और उनके बारे में जल्दी पता लगाने की दिशा में कारगर है।
40 की उम्र सीमा की महिलाओं के लिए सुझाए गए नियमित मेडिकल परीक्षणः
पेल्विक व पैप स्मीयर परीक्षण-ः 40 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद हमेशा एक सम्पूर्ण पेल्विक परीक्षण, पैप स्मीयर टेस्ट एंव एचपीईवी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ,सीने का एक्सरे टेस्ट, सीटी स्कैन, एमआरआई एंव पीईटी स्कैन जैसे परीक्षणों का उपयोग सर्वाइकल कैंसर, गर्भाशय कैसंर जैसी गंभीर बीमारियों के बारे मे पता लगाने के लिए किया जाता है। भारत मे गर्भाशय कैसंर महिलाओं की असामयिक मृव्यु का एक प्रमुख कारण है। सर्वाइकल कैंसर का इलाज कैसर के पूर्वानुमान का समय व चरण के साथ- साथ ट्यूमर के आकार पर भी निर्भर करता है। हाल में ही सर्वाइकल कैंसर के लिए टीका भी आया है।
मैमोग्राम एंव कम्प्लीट ब्रेस्ट टेस्टः:-देश मे ब्रेस्ट कैसंर से पीड़ित महिलाओ की संख्या मे लगातार इज़ाफा हो रहा है।यह युवतियां 30 से 40 के आयुवर्ग की हैै। हर महिला को मैमोग्राम व अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट ज़रूरी कराने चाहिए और उस दौरान दिए गए दिशा- निर्देशों का पालन भी कराना चाहिए और शुरूआती चरण मे ही गांठो व संबंधित विसंगतियों का पता लगाने के लिए योग्य चिकित्सक से टेस्ट कराना चाहिए । स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर की संवेदनशीलता के लिए बीआरसीए परिवर्तन परीक्षण कराने का सुझाव दिया जाता है। ,खासकर यदि कैसंर का कोई पारिवारिक इतिहास रहा हो।
बोन डेंसिटी टेस्टः– महिलाओ में पुरूषों की तुलना में आॅस्टियोपोरोसिस का खतरा काफी ज्यादा रहता हैैै। ऐसा एस्ट्रोजन हाॅर्मोन के घटते स्तर के कारण होता है, जो कि महिलाओं मेे हड्डियोे की वो अवस्था है, जहां हड्डियों में कैल्शियम व महत्वपूर्ण खनिजों की कमी होने के कारण वे कमजोर और भंगुर हो जाती है। महिलाओ मे पुरूषों की तुलना मे अधिक तेजी से हड्डी के घनत्व मंे कमी आती है। इससे कुछ महिलाओ मे आॅस्टियोपोरोसिस हो जाता है। कई चिकित्सकीय आंकड़ो के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक अम्र आॅस्टियोपोरोसिस से संबंधित फ्रैक्चर की दर से दोगुना है। हिप आॅस्टियोपोेरोसिस के सभी मामलो में से 75 प्रतिशत मामलों में प्रभावित महिलाएं ही होती है।
हाॅर्मोन्स टेस्टः- जीवनशैली मे बदलाव, हाॅर्मोनल परिवर्तनो के साथ- साथ संबंधित समस्याओ के कारण महिलाओं मे हड्डी संबंधित कई समस्याएं उभर जाती है। ऐसे में विटामिन डी, सीरम, कैल्शियम,थायराॅयड का निर्धारण करने वाले परीक्षणों की आवश्यकता होती है। ये हड्डी मेटाबाॅलिज्म और शरीर के कार्यो की पर्याप्त जानकारी देता है। 40 वर्ष की उम्र के आसपास महिलाओं के हार्मोनल चक्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है। इस समय मे वे रजोनिवृत्ति के करीब हो सकती है, जिससे मूड स्विंग्स व इससे संबंधित अन्य लक्षणों को सामना करना पड़ सकता है।
थायराॅइड टेस्टः– वनज बढ़ना , बालो का झड़ना, ज्यादा थकावट व अन्य चीजंे उन कई सामान्य समस्याओं मे से है, जिनका सामना आप 40 साल की उम्र के बाद करती है। थायराॅइड ग्रंथि से टी3 टी4 एंव टीएसएच जैसे हाॅर्मोन्स निकालते है, जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होते है। इन हाॅर्मोन में कोई भी बदलाव शरीर मे गंभीर परिवर्तन ला सकता है। गर्भावस्था, बच्चे को जन्म देना, स्तनपान और रजोनिवृत्ति के दौरान अनुभव होने वाले जटिल हाॅर्मोनल परिवर्तनों के कारण महिलाओं के बाद हर 3 साल मंे महिलाओ को ये परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।
डिम्ब ग्रंथि कैंसरः– मेनोपाज़ के बाद डिम्बग्रंथि का कैंसर महिलाओ में आम है। डीएनए कोशिकाओं मे परिवर्तन के कारण ये कैंसर उत्पन्न होता है। डिम्बग्रंथि के कैंसर के खतरे को रोकने के लिए रजोनिवृत्ति की आयु तक पहुंचने से पहले नियमित चेकअप कराना सर्वोत्तम तरीका होता है। नियमित अल्ट्रासाउंडए सीए 1.25 सीई आदि ट्यूमर मार्कर परीक्षण रोग के बारे में शुरूआत में ही पता लगा सकते है।
डायबिटीज, मोटपा और हाई ब्लडप्रेशरः-
पेेशेवर और व्यक्तिगत कारणों से भोजन छोड़ना, जीवनशैली के विकार, तनाव का बढ़ना स्तर इन गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। डायबिटीज प्री-डायबिटीज और संबंधित स्थितियों का निदान करने के लिए रक्त शुगर टेस्ट एचबी ए1 सी और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट किया जाना चाहिए। पहले की तुलना में अब बहुत कम उम्र में डायबिटीज के मामले सामने आ रहे है। यदि अधिक वजन है या हदय रोग, रक्तचाप या मधुमेह का परिवार में इतिहास रहा है, तो आपको इन परीक्षण की सलाह दी सकती है।
आखं और दृष्टि परीक्षणः–
40 वर्ष की आयु में आपकी मां को ये बेसलाइन टेस्ट कराना आवश्यक है । अगर उनको कोई पुरानी बीमारी है, तो टेस्ट की नियमितता के लिए अपने हेल्थकेयर प्रदाता से परामर्श ले सकते है।
मेडिकल स्क्रीनिंग टेस्ट्स करान व निर्देशों का पालन करनाः–
स्वास्थ्य को बेहतर रखने का ये एक शानदार तरीका हैै। किसी अन्य सामान्य दिनचर्या व काम की तरह इन परीक्षणों को बुनियादी रखरखाव की आवश्यकता की तरह सोचें और विशेषज्ञ द्वारा दिए निर्देशों का पालन कीजिए।
