Enzymes Benefits for Digestion: मानव शरीर में कई ऐसी छोटी-छोटी गतिविधियां होती हैं जो शरीर को सुचारू रूप से काम करने में मदद करती हैं। जिसके बारे में सामान्यतौर पर हम नहीं जानते हैं। ऐसा ही एक शब्द है एंजाइम जिससे शायद आप परिचित होंगे। एंजाइम एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो शरीर के भीतर भोजन को पचाने में मदद करता है। एंजाइम कोशिकाओं के अंदर पाया जाता है और शरीर के भीतर केमिकल प्रतिक्रियाओं को तेज करने में सहायता करता है। एंजाइम भोजन को पचाने के साथ ही साथ मांसपेशियों का निर्माण करने और शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ को बाहर निकालने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। एंजाइम का निर्माण पैनक्रियाज, पेट और छोटी आंत में स्वाभाविक रूप से होता है। इसके अलावा मानव शरीर में निर्मित लार ग्रंथियां भी एंजाइम को बनाने में मदद करती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि पेट संबंधित समस्याओं के उपचार में दवाओं के तौर पर एंजाइम का भी उपयोग किया जा सकता है। एंजाइम क्या हैं और ये कैसे शरीर को प्रभावित करते हैं चलिए जानते हैं इनके बारे में आज सबकुछ।
क्या हैं एंजाइम (Enzyme)

एंजाइम को यदि सरल भाषा में समझा जाए तो ये एक प्रोटीन है और ये शरीर की तमाम गतिविधियों को सुचारू रूप से कार्य करने में मदद करता है। मानव शरीर मेटाबॉलिज्म जैसे केमिकल रिएक्शन पर निर्भर है, जबकि मेटाबॉलिज्म एंजाइम के कार्यों पर निर्भर करता है। यदि शरीर के भीतर आंतों में पर्याप्त मात्रा में एंजाइम्स न हों तो आपको खाना पचाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एंजाइम पर यदि बीमारियों, दवाइयों या केमिकल का असर पड़ता है तो ये नष्ट भी हो सकते हैं। कहा जा सकता है कि जीवित रहने के लिए शरीर के भीतर म्स का होना बेहद जरूरी है।
एंजाइम्स के प्रकार(Enzyme)

मानव शरीर में हजारों प्रकार के एंजाइम्स मौजूद होते हैं, जो पाचन और मेटाबॉलिज्म जैसी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
लैक्टेज – लैक्टेज एंजाइम का निर्माण मुख्यरूप से छोटी आंत के भीतर होता है। ये डेयरी प्रोडक्ट या दूध में मौजूद लैक्टोज को तोड़कर इसे ग्लूकोज और गैलेक्टोज में बदलने का काम करता है। जो लैक्टेज एब्जॉर्ब नहीं होते, उनके कारण गैस और पेट संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं।
एमाइलेस – एमाइलेस एंजाइम सलाइवा और पैंक्रियाज से निकलते हैं। ये मूल रूप से कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है। ये खाने में मौजूद स्टार्च को ब्रेक करके शुगर में परिवर्तित करने में मदद करता है। जब ब्लड में एमाइलेज का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो पैंक्रियाज डक्ट ब्लॉक हो जाते हैं। जिससे पैंक्रियाज में सजून और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा इसकी कमी से लिवर संबंधित कई अन्य बीमारियों भी हो सकती हैं।
ट्राईपसीन – ट्राईपसीन वह एंजाइम है जो छोटी आंत में पाया जाता है। इस एंजाइम का काम एमिनो एसिड को तोड़ना है। ये एंजाइम खाना पचाने में अहम भूमिका निभाता है।
लिपैसीस – लिपैसीस एंजाइम का एक ग्रुप होता है जो आंतों में फैट को पचाने में मदद करता है। ये फैटी एसिड्स को ग्लिसरॉल में बदलता है। ये अधिकांश पैंक्रियाज से निकलता है लेकिन इसकी कुछ मात्रा मुंह और पेट से भी निकलती है।
माल्टेज – माल्टेज एंजाइम मुंह की लार और स्मॉल इंटेस्टाइन में पाया जाता है। इसका काम शुगर को ग्लूकोज में बदलना है। जब माल्टेज ग्लूकोज में बदलता है तब उसका इस्तेमाल कई बार तुरंत हो जाता है या बाद में इस्तेमाल होने के लिए ग्लाइकोजन के रूप में लिवर में स्टोर हो जाता है। आपको बता दें कि माल्टेज आलू और गेहूं जैसे खाद्य पदार्थ में पाया जाता है।
एसिटाइलकोलेनेस्टेज – ये एंजाइम केमिकल एसिटाइलोक्लिन को तोड़ने का काम करता है। ये केमिकल शरीर की नसों और मांसपेशियों में ट्रेवल करता है और खाने को पचाने में मदद करता है।
हेलिकेज – ये एंजाइम शरीर के डीएनए के साथ मिलकर प्रतिक्रियाएं करते हैं। इसके अलावा ये डीएनए का निर्माण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुक्रेज – सुक्रेज सुक्रोज को फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में ब्रेक करने का काम करते हैं। इस शुगर को शरीर एब्जॉर्ब कर पाता है और आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से भी रोकता है। सुक्रेज स्मॉल इंटेस्टाइन से निकलता है।
एंजाइम (Enzyme) की संरचना

एंजाइम हर जीव में अलग-अलग प्रकार के होते हैं। लेकिन बेसिक एंजाइम्स सभी जीवों के एक समान ही होते हैं। माइक्रोस्कोपिक ऑर्गेनिज्म से मल्टी सेल्युलर ऑर्गेनिज्म द्वारा ये एंजाइम्स सभी के अंदर मौजूद होते हैं। मानव शरीर में ये एंजाइम्स एमिनो एसिड के कणों से बने हुए होते हैं, जिसे हम प्रोटीन के नाम से जानते हैं। शरीर में जब भी कोई एंजाइम का निर्माण होता है तो उसके अंदर लगभग 100 से 1000 तक अलग-अलग प्रकार के एमिनो एसिड के कण होते हैं। एमिनो एसिड एक-दूसरे से मिलकर कई तरह के एंजाइम का निर्माण करते हैं। ये एक तरह की केमिकल प्रकिया है जो शरीर में अलग-अलग शेप के एंजाइम का निर्माण करती है।
एंजाइम के प्रमुख कार्य (Enzyme)

एंजाइम एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो सभी जीवित शरीर में मौजूद होता है। ये विभिन्न स्त्रोतों द्वारा स्त्रावित होते हैं, जो बिना किसी स्थायी परविर्तन के केमिकल प्रतिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं। जब तक सब्सट्रेट मौजूद है तब तक ये अपना काम करना जारी रखते हैं।
-लॉक-एंड-की थ्योरी, ये उन सिद्धांतों में से एक है जो एंजाइमों के कार्य की वयाख्या करता है। इस सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक एंजाइम का एक विशिष्ट क्षेत्र होता है जो एक विशेष सब्सट्रेट को जोड़ने के लिए काम करता है।
-एंजाइम केवल एक निश्चित पीएच लेवल पर काम करते हैं और ये इस बात पर निर्भर करता है कि ये शरीर के किस हिस्से में पाए जाते हैं। यदि एंजाइम अधिक तापमान या अधिक अम्ल के संपर्क में आते हैं तो ये अपना आकार बदल लेते हैं।
-शरीर की प्रत्येक कोशिका में डीएनए मौजूद होता है। जब कोशिकाएं विभाजित होती हैं, डीएनए को इसकी कॉपी करने की आवश्यकता पड़ती है। एंजाइम इस प्रक्रिया में डीएनए की कॉपी बनाने में सहायक भूमिका निभाता है।
-कई तरह के एंजाइम के उपयोग से आपका लिवर शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है।
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एंजाइम हमारे लिए क्यों जरूरी हैं

हम जो भी खाते या पीते हैं उसे पचाने में एंजाइम्स बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। पाचन क्रिया के बेहतर होने के कारण शरीर भी हेल्दी रहता है। एंजाइम्स शरीर में मौजूद अन्य केमिकल्स जैसे एसिड और बाइल के साथ मिलकल खाने के मॉलिक्यूल को तोड़ने में मदद करता है। साथ ही शरीर के फंक्शन को बेहतर ढंग से काम करने के लिए तैयार करता है। एंजाइम्स कार्बोहाइड्रेट को एनर्जी में बदलने और प्रोटीन को मसल्स बनाने में मदद करते हैं।
एंजाइम का महत्व

एंजाइम शरीर को हेल्दी और फिट रखने में मदद करता है। सामान्यतौर पर एंजाइम शरीर में शांत पड़े रहते हैं लेकिन भोजन के संपर्क में आते ही ये एक्टिव हो जाते हैं। जिस पदार्थ की वजह से ये एक्टिव होते हैं उसे सबस्ट्रेट कहा जाता है। एंजाइम हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। ये न केवल पाचन में सुधार करते हैं बल्कि ये कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एचआईवी से सुरक्षा
मानव शरीर में पाए जाने वाले एंजाइम एचआईवी के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले वायरस को फैलने से रोकते हैं। अध्ययन के मुताबिक जब एड्स के वायरस आरएनए को डीएनए में चेंज कर रहे होते हैं तब ये एंजाइम इसके असर को कम कर देते हैं। जिससे एचआईवी की समस्या को रोकने में मदद मिलती है।
वजन पर कंट्रोल
स्कवालीन मोनो ऑक्सीजीनेस नामक एंजाइम कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रकिया को कंट्रोल करता है जिस वजह से वजन को कम करने या कंट्रोल करने में मदद मिलती है। एंजाइम शरीर के एक्स्ट्रा फैट को घटाने का काम करते हैं।
कोलेस्ट्रॉल करे नियंत्रित
शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल अधिक बढ़ने से मोटापा और हार्ट डिजीज तो बढ़ती ही हैं साथ ही डायबिटीज होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। शरीर में मौजूद एंजाइम्स कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रॉल लेवल सामान्य होने पर शरीर हेल्दी और एनर्जेटिक रहता है।
पाचन में सहायक
इंजाइम मुख्य रूप से आपके द्वारा खाए गए भोजन को पचाने का काम करता है। हम जो खाते है एंजाइम इसे छोटी-छोटे हिस्से में तोड़कर पचाने में मदद करता है। जिस वजह से फैट, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन शरीर को हेल्दी बनाने में काम सुचारू रूप से कर पाते हैं।
एंजाइम को क्या प्रभावित करता है

तापमान का असर
शरीर का तापमान जब नॉर्मल होता है तब एंजाइम अच्छी तरह से काम करते हैं। जब फीवर होने पर शरीर का तापमान अधिक होता है तो एंजाइम की संरचना पर प्रभाव पड़ता है और ये टूट जाते हैं। अधिक तापमान होने पर ये ठीक ढंग से काम नहीं कर पाते हैं। शरीर का तापमान नॉर्मल रखने पर ही एंजाइम काम कर पाते हैं।
डाइजेस्टिव एंजाइम प्रभावित
पैंक्रियाज में सूजन होने की स्थिति में डाइजेस्टिव एंजाइम्स की संख्या पर प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही पेट या इंटेस्टाइन का पीएच लेवल भी एंजाइम की गतिविधियों पर असर डालती हैं। इसका मतलब है कि एंजाइम ज्यादा एसिडिक और बेसिक माहौल में काम नहीं कर पाते हैं।
केमिकल डालते हैं प्रभाव
केमिकल्स भी एंजाइम के काम में रुकावट उत्पन्न करते हैं। ये एंजाइम के साथ मिलकर केमिकल रिएक्शन करते हैं। कई बार आप जो दवाएं खाते हैं खासकर एंटीबायोटिक कुछ एंजाइम्स के काम में बाधा उत्पन्न करते हैं और बैक्टीरियल इंफेक्शन को फैलने से रोकने में मदद करते हैं।
फूड आइट्म्स डालते हैं प्रभाव
हम जो खाते हैं उसे पचाने में एंजाइम मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन कुछ फूड आइट्म्स एंजाइम्स को काम करने से रोकते हैं। कुछ विशेष तरह के फूड्स में डाइजेस्टिव एंजाइम्स होते हैं जो नेचुरल एंजाइम्स से मिलकर काम में बाधा उत्पन्न करते हैं। जैसे कई हाई एंजाइम रिच फूड शरीर में मौजूद एंजाइम्स के साथ मिलकर एक्टिविटी को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा आपके खाने की आदतों के आधार पर आपकी हेल्थ प्रभावित होती है। इसलिए नियमित रूप से हेल्दी डाइट लेने से एंजाइम लंबे समय तक शरीर को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
उम्र और एंजाइम
जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, शरीर में एंजाइम का उत्पादन कम होता जाता है। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के साथ शरीर लाइपेज, प्रोटीज और एमाइलेज जैसे एंजाइम को कम उत्पन्न करता है। जिसके परिणामस्परूप प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट को पचाने में परेशानी आती है।
जीवनशैली पर प्रभाव
एक हेल्दी लाइफस्टाइल को बनाए रखना, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज करना शरीर में हेल्दी एंजाइम का उत्पादन करते हैं। वहीं बेढंगी लाइफस्टाइल और डाइट एंजाइम को प्रभावित करती है और उसके उत्पादन में कमी आती है।
FAQ | क्या आप जानते हैं
एंजाइम क्या होते हैं ?
मानव शरीर में कितने एंजाइम होते हैं ?
कौन सा अंग शरीर में एंजाइम पैदा करता है ?
एंजाइम कितने समय तक रहता है ?
एंजाइम की कमी से कौन सा रोग हो सकता है ?
सबसे अच्छा एंजाइम कौन सा है ?
एंजाइम कैसे काम करता है ?
