कोविड-19 एक वायरल संक्रमण है, जो हाल ही में पाए गए कोरोना वायरस के द्वारा होता है। यह वायरस किसी भी संक्रमित व्यक्ति के लार की ड्रॉपलेट या नाक के डिस्चार्ज, खांसने या छींकने से फैलता है, जो कि हमारे शरीर में नाक, मुंह और आंखों के द्वारा प्रवेश करता है। हालांकि कुछ शोध  का मानना है कि यह वायरस अब हवा के माध्यम से भी फैल सकता है। ऐसा बंद एयर कंडीशनर, ऑफिस, कैब या मॉल्स में होता है, जहां कोई संक्रमित व्यक्ति  छींक या खांस देता है। ऐसी जगहों में क्रॉस वेंटिलेशन की कमी होती है, इस कारण अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में नहीं भी आते हैं तो भी आप संक्रमित हो सकते हैं। लेकिन इसको फैलने से निम्न तरीकों से भी रोका जा सकता है-

कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम

आपको जितना हो सके उतना घर पर ही रहना चाहिए। खासकर जब आप 60 वर्ष से ऊपर हों या 5 साल से कम बच्चे आपके घर पर हों। अगर आपको डायबिटीज या हाइपरटेंशन या दिल की बीमारी या फिर कोई और अंडरलाइन कंडिशन है यानी कोई क्रोनिक बीमारी है तो भी आपको बाहर बिल्कुल ही नहीं निकलना चाहिए।

  • घर पर भी बाहर से आने वाले लोगों से मिलना कम चाहिए।
  • समय-समय पर अपने हाथ और मुंह को साबुन और पानी की मदद से धोते रहना चाहिए।
  • अगर घर से बाहर जा रही हैं तो निकलने पर मास्क का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
  • यही नहीं अपने घर की हर सरफेस को डिसइंफेक्ट रखें। ताजी हवा में रहें।
  • साथ में पर्याप्त पोषण वाली संतुलित डाइट लें। खुद को हाइड्रेट करने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पिएं।
  • इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हर्बल ड्रिंक, ताजे फलों और सब्जियों का जूस, काढ़ा बना कर पिएं।
  • रोजाना एक्सरसाइज और मेडिटेशन करें।
  • डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाइयों को रोजाना लें। स्वयं के मेडिकेशन से बचें।
  • कोशिश करें कि किसी बीमार के पास न जायें।
  • एक बात और यदि आप एक कोरोना संक्रमित फीडिंग मां हैं तो अपने बच्चे को दूध आप बचाव के उपायों का पालन करते हुए पिला सकती हैं। दूध पिलाते समय मास्क का प्रयोग करें। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि वायरस दूध के माध्यम से भी फैल सकता है।

मास्क पहनते समय क्या करें व क्या न करें?

जब आप मास्क पहनती हैं तो निम्न बातों का ध्यान जरूर रखें- 

  • मास्क पहनते समय इलास्टिक बैंड को अच्छे से बांध कर सिक्योर कर लें।
  • मास्क की डोर को अपने सिर के पीछे से मिडिल से और नीचे से अच्छे से सिक्योर करें।

मास्क पहनते समय क्या न करें?

  • अपने मास्क को नाक से नीचे न रखें।
  • स्ट्रैप को गले के नीचे न लटकाएं और उन्हें क्रॉस भी न करें।
  • अपने हाथों को मास्क को छूने से पहले और बाद में साबुन से धोए बिना मुंह को न छुएं।
  • अपने सिर पर फेस मास्क को न पहनें।
  • अपनी गर्दन के आसपास मास्क को न पहनें।
  • अपनी बाजू के आसपास अपने फेस मास्क को लटका कर न रखें।

मास्क को हटाते समय क्या करें, क्या न करें?

  • अपने मास्क को उतारते समय केवल उसकी स्ट्रैप या टाई को ही हाथ लगाएं।
  • मास्क को उतारने के बाद अपने हाथों को अच्छे साबुन से धोएं और 70त्न अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
  • अगर किसी फेस मास्क में एक्जालेशन वाल्व है तो उसका प्रयोग न करें, क्योंकि उस वाल्व के द्वारा आप तो खुद को पर्यावरण के कुछ पैथोजन्स आदि से बचा लेंगे, लेकिन बाकी लोग आपकी सांसों से नहीं बच पाएंगे। 

कोविड-19 कैसे प्रत्यक्ष होता है?

कोविड-19 के सबसे मुख्य लक्षण निम्न हैं-

  • सूखी खांसी, जुकाम और गले में दर्द।
  • बुखार या बहुत ठंड लगना।
  • थकान होना शरीर या मसल्स में दर्द होना।
  • सिर दर्द।
  • नाक बहना
  • सांस लेने में दिक्कत होना या सांसे फूलना।
  • भूख न लगना, किसी चीज की गंध न आना या स्वाद न आना।

वायरस के लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। लगभग सभी लोगों को वायरस होने के एक से दो हफ्तों में लक्षण महसूस होते हैं और कुछ लोगों को लक्षण दिखते ही नहीं हैं। तो कुछ लोगों को लक्षणों की वजह से अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ सकती है। इससे रिकवर होने में भी हर व्यक्ति को अलग-अलग समय लग सकता है। 

घर पर इलाज करते समय क्या-क्या करना चाहिए?

  • हाइजीन बना कर रखें। कम से कम 20 सेकंड के लिए हाथ धोएं। 
  • हाथ धोते समय अपनी उंगलियों के बीच में, उंगलियों के ऊपर और नीचे, नाखूनों के आसपास साफ करें और इसके लिए पर्याप्त साबुन और पानी का प्रयोग करें। 
  • इसके अलावा 60त्न से अधिक अल्कोहल वाले सैनिटाइजर का प्रयोग करें। 
  • खांसते और छींकते समय अपने मुंह को ढकें। इसके लिए अपनी कोहनी का प्रयोग करें।
  • अलग कमरे में रहें और अपने कमरे का दरवाजा बंद रखें। अलग बाथरूम का ही प्रयोग करें।
  • घर की जिस चीज को भी आप छूते हैं उसे बाद में साफ करवाएं। किसी भी ब्लीच को इस काम के लिए प्रयोग कर सकते हैं।
  • अपने फोन को भी टच करने के बाद 70त्न आइसोप्रोपिल अल्कोहल या डिसइंफेक्टेंट वाइप के द्वारा साफ करें।
  • कैश या क्रेडिट कार्ड को हाथ लगाने के बाद अपने हाथों को साफ करें क्योंकि उन चीजों में वायरस हो सकता है।
  • अगर आप कमरे से बाहर जाते हैं या कोई अन्य व्यक्ति अंदर आता है तो मास्क का प्रयोग करें।
  • मास्क को पहनने से पहले अपने हाथ धोएं और केवल स्ट्रैप को ही छुएं।
  • अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए संतुलित मील लें।
  • हाइड्रेटेड रहने के लिए खूब सारा पानी पिएं, अल्कोहल का सेवन बंद करें और हेल्दी व संतुलित वजन बना कर रखें।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद लें।
  • हर रोज अपने लक्षणों जैसे- सूखी खांसी, बुखार, सांस कम आना, स्वाद और गंध कम आना आदि को देखें। 
  • अगर हो सके तो ऑक्सीजन लेवल नापने के लिए फिंगर पल्स ऑक्सीमीटर रखें।
  • अपने परिवार के सदस्यों के लिए कीमोप्रोफिलेक्स की मेडिकल जानकारी लें।

घरेलू उपचार के दौरान क्या न करें?

  • घबराएं नहीं।
  • पब्लिक प्लेस में न निकलें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग भी न करें।
  • अपने हाथों को धोए बिना अपने मुंह, आंख, नाक को न छुयें।
  • अपना पानी, बर्तन, बिस्तर अन्य परिवार के सदस्यों के साथ साझा न करें।
  • वृद्ध रिश्तेदारों के पास न जाएं क्योंकि उन्हें वायरस होने का सबसे अधिक खतरा होता है। अपने घर पर भी उन्हें न बुलाएं।
  • किसी से मिलते समय हाथ न मिलाएं या गले न लगें। किसी का अभिनन्दन करते समय उनसे 6 से 8 फीट दूर रहें।

कोविड-19 की दूसरी लहर में बच्चों में लक्षण 

कोविड की दूसरी लहर में बच्चे भी बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं और अगर पिछले साल बच्चे एक प्रतिशत प्रभावित थे तो इस साल बच्चे 1.2 प्रतिशत प्रभावित हैं। इस म्यूटेंट में इम्यून एस्केप फिनोमिना होता है अर्थात यह हमारे शरीर का ही सिस्टम बन कर हमारे शरीर में प्रवेश करता है और फिर इम्यूनिटी सुरक्षा से बच निकलता है। इसी कारण बच्चे इस बार अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन यह इस बात का प्रमाण बिल्कुल नहीं है कि बच्चों को संक्रमण बड़े लोगों के मुताबिक अधिक होने वाला है। इस बार 30 वर्ष से कम लोगों को होने वाला संक्रमण 32त्न है जबकि पिछली लहर में यह 31त्न था। यानी अभी तक युवा ज्यादा खतरे में हैं।

बच्चों में पाए जाने वाले लक्षण

बच्चों को ज्यादातर बुखार, ठंड लगना, सांस कम आना खांसी, सुगंध न आना, गले में दर्द, मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम, भूख न लगना, डायरिया और उल्टियां, पैंक्रियाटाइटिस, लीवर की बीमारियां, कुछ गंभीर लक्षण जैसे- सांस फूलना, इंफ्लेमेशन, आलस आदि लक्षण दिखाई देते हैं। डॉक्टर के मुताबिक जिन बच्चों को लक्षण देखने को मिल रहे हैं उन्हें 14 दिन तक घर पर ही क्वारंटाइन कर डॉक्टर की सलाह से दवाइयां देते रहें और ऑक्सीजन लेवल चेक करें।

घर पर यदि किसी मरीज की देखभाल कर रहे हैं 

यदि आपके घर में कोई कोविड-19 संक्रमित है और आप उसकी देखभाल कर रहे हैं, तब मरीज के कमरे में जाते समय ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क को अच्छे से पहनें। आपको मास्क का आगे का हिस्सा नहीं छूना है। अगर मास्क आपके पसीने या ड्रॉपलेट के कारण ज्यादा गीला हो जाए तो तुरंत बदलें। प्रयोग करने के बाद मास्क को फेंक दें और अपने हाथों का हाइजीन मेंटेन करें। खाना बनाने और खाने से पहले और बाद में हाथ कम से कम 40 सेकेंड तक अवश्य धोएं। मरीज के आसपास जाएं तो उसके बॉडी फ्लूइड जैसे- थूक या छींक या बलगम से दूरी रखें। ग्लव्स के प्रयोग करें। उनके द्वारा छुए गए पदार्थों को न छुएं। उनके प्रयोग किए गए टॉवल को छूने से परहेज़ करें। यही नहीं देखभाल कर रहे व्यक्ति को भी अपना स्वास्थ्य और अपने तापमान को नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए और अगर कोई लक्षण देखने को मिलता है तो तुरंत डॉक्टर को इस बारे में बताएं। गंध या स्वाद के न आने पर, सांस फूलना, खांसी और बुखार जैसे लक्षणों को इग्नोर न करें।

भावनात्मक तौर पर भी रहें मजबूत

वायरस से संक्रमित होने का अनुभव बहुत डरावना और चिंताजनक हो सकता है। यह बीमारी न केवल आपको शारीरिक रूप से बल्कि आपको मानसिक और जज्बाती रूप से भी प्रभावित करती है। साइकोलॉजिकल प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। मानसिक रूप से आपका स्वस्थ रहना जरूरी है।

इमरजेंसी मेडिकल एडवाइस कब लें?

अपने लक्षणों को नियमित रूप से मॉनिटर करे और अगर निम्न लक्षण देखने को मिलें तो तुरंत आपातकालीन रूप से मेडिकल हेल्प ले-

  • खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षणों का बहुत गंभीर हो जाना।
  • अगर आप पल्स ऑक्सीमीटर का प्रयोग कर रहे हैं तो ऑक्सीजन लेवल का 95त्न से कम हो जाना। ध्यान लगाने में बहुत ज्यादा दिक्कत होना।
  • होठों या फेस का नीला पड़ जाना।
  • नया बुखार होना या पहला बुखार ही दुबारा हो जाना और तापमान का 101 डिग्री से अधिक होना।
  • छाती में दर्द का या प्रेशर का लगातार रहना।
  • जागते रहने या जागने में असमर्थ होना।
  • एक वयस्क जिसे किसी प्रकार की बीमारी नहीं है और जो स्वस्थ है उसे एक दिन में 2000 कैलोरी की आवश्यकता होती है।
  • जिन लोगों को डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हाइपरटेंशन, हृदय रोग आदि बीमारियां हैं, उन्हें अपनी रोजाना डाइट के लिए अपने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

एक हेल्दी डाइट जरूरी

शरीर में अच्छे पोषण का होना बहुत जरूरी है। यह इंफेक्शन के दौरान, पहले और बाद में हर हाल में होना चाहिए। हालांकि कोई सप्लीमेंट या डाइट्री बदलाव आपके लक्षणों को कम नहीं कर देने वाला है। लेकिन एक अच्छे इम्यून सिस्टम के लिए आपको अच्छी डाइट लेने का भी बहुत ध्यान रखना चाहिए।

अब बात करते हैं ऑक्सीमीटर की

ऑक्सीजन सेचूरेशन लेवल आप सभी के शब्दकोष में अब शामिल हो चुका है। इसलिए ऑक्सीमटर की वैल्यू रीड करने का तरीका भी मालूम होना चाहिए। ऑक्सीमीटर की एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति की रीडिंग 95 से 100 के बीच होती है। जबकि 92 से 95 तक का लेवल बॉर्डर लाइन माना जाता है। इससे कम चिंतनीय है। बहुत बार आपका पल्स ऑक्सीमीटर सही रीडिंग नहीं दिखाता क्योंकि हो सकता है उंगली पर किसी प्रकार का पिगमेंट जैसे नेलपॉलिश, मेंहदी, डाई आदि लगी हो, प्रोब पर बहुत तेज लाइट हो, मरीज अधिक हिल रहा हो, कार्बन मोनोऑक्साइड प्वाइजनिंग हो। अगर आपको ऑक्सीमीटर का प्रयोग करते समय यह सब चीजें दिखाई दे रही हैं तो आपकी रीडिंग बिलकुल सटीक आए यह संभव नहीं है। यदि आपका ऑक्सीजन लेवल या किसी अन्य सदस्य का लेवल गिर रहा हो तो निम्न ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर या करने को बोल सकती हैं।

  • आधे घंटे से लेकर दो घंटे तक अपने पेट के बल लेट जाइए। अपने सिर को केवल बाएं या दाएं दिशा में ही रखें। 
  • अपने सिर के नीचे, छाती और पेल्विस को सपोर्ट प्रदान करने के लिए इनके नीचे एक तकिया लगाएं। 
  • पेट के नीचे किसी प्रकार का तकिया आदि न लगाएं।
  • अब आधे से दो घंटे तक अपनी बाईं ओर लेटें। फिर आधे से दो घंटे तक थोड़े बैठ जाइए। फिर रिपीट करें।
  • कई बार अधिक बीमार होने के बाद कुछ लोगों की आवाज में थोड़ी कमजोरी आ जाती है तब अपनी वॉइस को स्ट्रेन न करें। जितना संभव हो आराम करें, गुनगुनाते रहें लेकिन कोशिश करें कि आप ज्यादा न चिल्लाएं।
  • जो लोग लंबे समय तक बीमार रह जाते हैं या जिन्हें ऑक्सीजन ट्यूब लगाई जाती है उन्हें सोचने और ध्यान लगाने आदि चीजों में मुश्किल हो सकती है। लेकिन ये परेशानियां कुछ ही हफ्तों या दिनों में ठीक हो जाती हैं। आप इन्हें मैनेज करने के लिए शारीरिक स्ट्रेथनिंग एक्सरसाइज, कुछ ब्रेन एक्सरसाइज जैसे कोई नई हॉबी, कोई पजल या मेमोरी एक्सरसाइज को ट्राई कर सकते है

अब बात करते हैं म्यूकर माइकोसिस की

जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें म्यूकर माइकोसिस फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डायबिटिक, कैंसर, ट्रांसप्लांट, एचआईवी के पेशंट और जो लोग स्टेरॉइड्स या ऑक्सीजन पर होते हैं, उनमें इस संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

अगर आपने हाल ही में किसी अपने को खोया है

  • आप जैसा भी महसूस कर रहे हैं, उसके लिए खुद को दोष न दें। 
  • अपने इतने बड़े नुकसान के लिए खुद के जज्बातों को स्थिर करने के लिए अपने आपको थोड़ा समय दें। 
  • जिन लोगों पर आप अपने जज्बातों के बारे में भरोसा करती हैं उनसे नियमित रूप से बात करें ताकि आपको थोड़ा इमोशनल सपोर्ट मिले।
  • अपने नियमित रूटीन को जारी रखें।
  • आप उन लोगों से सलाह लें या बात करें जिन पर आप अधिक विश्वास करती हैं।
  • जिस प्रिय को आपने हाल ही में खोया है उनको आखिरी बार बाए कहने का तरीका ढूंढे। जैसे आप उन्हें एक गुड बाय लेटर लिख सकती हैं या ड्राइंग बना सकती हैं। 
  • कोरोना वायरस की वजह से हमारे जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। लेकिन महामारी के इस दौर में हम $खुद और अपनो को कैसे बचाएं और कैसे सुरक्षित रखें, इसके लिए तमाम तरह की जानकारी, सुझाव और सलाह मौजूद हैं।

म्यूकर माइकोसिस या ब्लैक फंगस के लक्षण

म्यूकर माइकोसिस की पहचान इसके लक्षणों से की जा सकती है। नाक बंद हो जाना, नाक और आंख के आस-पास दर्द और लाल होना, बुखार, सिरदर्द और खांसी, सांस फूलना और खून की उल्टियां, मानसिक रूप से अस्वस्थ होना, कन्फ्यूजन की स्थिति, नाक के आसपास सूजन। इसलिए धूल वाली जगहों पर मास्क लगाएं, गार्डनिंग या मिट्टी में काम करते वक्त जूते, हाथों पैरों को ढकने वाले कपड़े, ग्लव्स जरूर पहनें, रोजाना नहाएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें, बिना वजह स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल न करें। 

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