Summary: डिप्रेशन के बारे में 5 आम मिथक और सच्चाई
डिप्रेशन सिर्फ उदास रहना नहीं है और इसे केवल चेहरे या मुस्कान देखकर पहचाना नहीं जा सकता। इससे जुड़े कई मिथक हैं, जैसे सकारात्मक सोच से ठीक हो जाना या मानसिक कमजोरी होना। सही जानकारी, भरोसेमंद लोगों से बात करना और प्रोफेशनल मदद लेने से डिप्रेशन को मैनेज किया जा सकता है।
Depression Myths and Facts: डिप्रेशन जैसे मुद्दे पर कई मिथक है जिनके बारे मेंलोगों की राय अलग-अलग है। यह एक मुश्किल विषय है लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि आज के दौर में डिप्रेशन लगभग हर किसी को अपना शिकार बना रहा है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका निदान करना और इससे निपटना मुश्किल है। यह उदासी के उन पलों से अलग है जिनका हम समय-समय पर सामना करते हैं। यह सिर्फ एक मानसिक स्वास्थ्य विकार नहीं है बल्कि अन्य बीमारियों का मूल कारण भी है।
डिप्रेशन सबसे स्वस्थ व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। प्रेरणा की कमी, उदासीनता, कम उत्पादकता और निराशा डिप्रेशन के कुछ स्पष्ट संकेत हैं। आज इस आर्टिकल में हम डिप्रेशन से जुड़े कुछ आम मिथक के बारे में जानेंगे।
मिथक 1 : डिप्रेशन उदास महसूस करने जैसा ही है

डिप्रेशन से जुड़ा सबसे आम मिथक है कि डिप्रेशन का मतलब उदास महसूस करना है। उदास महसूस करना भी हमारे मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर का एक हिस्सा है लेकिन डिप्रेशन को सिर्फ उदास महसूस करने जैसे कुछ शब्दों में नहीं शामिल किया जा सकता है। कोई भी दुखद घटना डिप्रेशन के विकसित होने का जोखिम हो सकती है लेकिन हमेशा कारण नहीं। कई बार डिप्रेशन कुछ घटनाओं का मिला-जुला परिणाम भी हो सकता है। सच कहा जाए तो डिप्रेशन के सटीक कारण का पता करना मुश्किल है। लेकिन यह जरूर है कि डिप्रेशन आत्महत्या जैसे विचारों का जनक जरूर है। डिप्रेशन एक लगातार रहने वाला मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर है, जो किसी व्यक्ति के इमोशनल, फिजिकल और कॉग्निटिव वेलनेस को प्रभावित करता है। दुखी रहने से बिल्कुल अलग जो कि अस्थाई है और कुछ खास घटनाओं से जुड़ा है, डिप्रेशन हफ्तों, महीनों या इससे भी ज्यादा सालों तक रह सकता है।
मिथक 2 : डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति को पहचानना आसान है
जब भी हम डिप्रेशन की बात करते हैं तो हमारी कल्पना में कोने में बैठा एक व्यक्ति नजर आता है। जबकि असल में ऐसा नहीं होता है। डिप्रेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। यहां तक कि जो व्यक्ति हमेशा मुस्कुराता हुआ नजर आता है, हो सकता है कि वह अंदर से बहुत ज्यादा संघर्ष कर रहा हो। इसलिए किसी भी व्यक्ति के चेहरे को देखकर यह नहीं बताया जा सकता है कि वह डिप्रेशन से जूझ रहा है।
मिथक 3 : डिप्रेशन के बारे में बताना चीजों को और खराब कर देता है

कहा जाता है कि डिप्रेशन के बारे में बात करने से स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति को कई बार अकेले रहने की आदत पड़ जाती है, ऐसे में यदि कोई उसकी मदद करें तो वह इस अकेलेपन से बाहर निकलने में कामयाब हो सकता है। डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति यदि अपने विचारों और एहसासों को भरोसेमंद लोगों से शेयर करें तो यह उसके डिप्रेशन को कम करने में मदद कर सकता है।
मिथक 4 : डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होता है
यह सबसे बड़ा मिथक है कि डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होता है। सच तो यह है कि डिप्रेशन कभी भी किसी को भी प्रभावित कर सकता है, चाहे वह कितना ही मजबूत और सफल इंसान क्यों ना हो। डिप्रेशन को पहचानना और उसे पर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि बहादुरी की निशानी है।
मिथक 5 : सकारात्मक रहने से डिप्रेशन ठीक हो जाता है
यह उस व्यक्ति के डिप्रेशन की स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन क्लिनिकल डिप्रेशन को सही दवाइयों की मदद से ही ठीक किया जा सकता है। डिप्रेशन कुछ ऐसा नहीं है जिस व्यक्ति खुद कंट्रोल कर सके या खुद ठीक कर ले। इसलिए यह बहुत बड़ा मिथक है कि डिप्रेशन को सकारात्मक सोच के जरिए ठीक किया जा सकता है। डिप्रेशन को मैनेज करने में सेल्फ केयर प्रैक्टिस, लाइफ स्टाइल में बदलाव, प्रोफेशनल गाइडेंस और कई बार दवाइयों की जरूरत पड़ती है।
