गर्दन, कंधों और कमर का ये दर्द हैं

स्पॉन्डिलाइटिस, आर्थराइटिस का ही एक रूप है। इसे गर्दन के आर्थराइटिस के नाम से भी जाना जाता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के अन्य दूसरे नाम सर्वाइकल ऑस्टियोआर्थराइटिस, नेक आर्थराइटिस और क्रोनिक नेक पेन के नाम से भी जाना जाता है। यह गर्दन के जोड़ों में होने वाले अपक्षय से सम्बंधित है जो उम्र के बढ़ने के साथ बढ़ता है। यह समस्या मुख्यत: मेरुदंड को प्रभावित करती है। आमतौर पर इसके शिकार 40 की उम्र पार कर चुके पुरुष और महिलाएं होती हैं। आज की जीवनशैली में बदलाव के कारण युवावस्था में ही लोग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण गलत पाश्चर है, जिससे मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी दूसरा महत्त्वपूर्ण कारण है।

60 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों में प्राय: यह पाया जाता है।

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार 

शरीर के विभिन्न भागों को प्रभावित करने के आधार पर स्पॉन्डिलाइटिस तीन प्रकार का होता है: 

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस- गर्दन में दर्द, जो सर्वाइकल को प्रभावित करता है, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहलाता है। यह दर्द गर्दन के निचले हिस्से, दोनों कंधों, कॉलर बोन और कंधों के जोड़ तक पहुंच जाता है। इससे गर्दन घुमाने में परेशानी होती है और कमजोर मांसपेशियों के कारण बांहों को हिलाना भी मुश्किल होता है।

लम्बर स्पॉन्डिलाइटिस- इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।

एंकीलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस- यह बीमारी जोड़ों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। रीढ़ की हड्डी के अलावा कंधों और कूल्हों के जोड़ इससे प्रभावित होते हैं। एंकीलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने पर स्पाइन, घुटने, एड़ियां, कूल्हे, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।

बच्चों और युवाओं की तुलना में बूढ़े लोगों में पानी की मात्रा कम होती है जो डिस्क को सूखा और बाद में कमजोर बनाता है। इस समस्या के कारण डिस्क के बीच की जगह गड़बड़ हो जाती है और डिस्क की ऊंचाई में कमी आती है। ठीक इसी प्रकार गर्दन पर भी बढ़ते दबाव के कारण जोड़ों और गर्दन का आर्थराइटिस होता है।

कारण

कई बार गर्दन का दर्द हल्के से लेकर ज्यादा हो सकता है। ऐसा अक्सर ऊपर या नीचे अधिक बार देखने के कारण या गाड़ी चलाने, किताबें पढ़ने के कारण यह दर्द हो सकता है। यह आनुवांशिक रूप से भी हो सकता है। धूम्रपान, निराशा और चिंता जैसी समस्याओं के कारण हो सकता है। अगर आप ऐसा कोई काम करते हैं जिसमे आपको गर्दन या सिर को बारबार घुमाना पड़ता हो इस कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है। कोई गम्भीर चोट या सदमा गर्दन के दर्द को बढ़ा सकता है। इसके अलावा-

  • कब्ज बनने के कारण भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • अधिक चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, शोक या मानसिक तनाव की वजह से भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • मोटे गद्दे तथा नर्म गद्दे पर सोने के कारण गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • अधिक देर तक झुककर कार्य करने से गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • शारीरिक कार्य न करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • ऊंचे तकियों पर सर रख कर सोने से भी गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • सोते समय शरीर की गलत अवस्था होने पर गर्दन में दर्द हो सकता है।
  • जरूरत से ज्यादा वजन को ढोने से।
  • आज कल युवाओं में खास तौर पर मोबाइल में लंबे समय तक बात करने, तथा भारी हेलमेट पहन कर बाइक चलाने से भी गर्दन में दर्द होने लगता है।
  • टेढ़े-मेढ़े होकर सोना, हमेशा लचकदार बिछौनों पर सोना, आरामदेह सोफों तथा गद्देदार कुर्सी पर घंटो बैठे रहना, लेट कर टी वी देखना ।
  • गलत ढंग से वाहन चलाना या लंबे समय तक ड्राइविंग करना ।
  • बहुत झुक कर बैठ कर पढ़ना, लेटकर पढ़ना।
  • घंटों भर सिलाई, बुनाई, व कशीदा करने वाले लोगों को भी हो सकता है।
  • घंटों कम्प्यूटर के सामने बैठना और ब्लागिंग करना। 
  • गलत ढंग से और शारीरिक शक्ति से अधिक बोझ उठाना।
  • व्यायाम न करना।
  • संतुलित भोजन न लेना, भोजन मे कैल्शियम और विटामिन डी की कमी रहना, अधिक मात्रा मे चीनी और मीठाईयां खाना।

लक्षण 

रोग के लक्षण कोई आवश्यक नहीं कि सिर्फ गर्दन की दर्द और जकड़न को ही लेकर आयें। विभिन्न रोगियों मे अलग-अलग तरह के लक्षण देखे जाते हैं। 

  • इस रोग का दर्द हाथ की उंगलियों से सिर तक हो सकता है।
  • उंगलियां सुन्न हो जाती हैं।
  • कंधे, कमर के निचले हिस्से और पैरों के ऊपरी हिस्से में कमजोरी और कड़ापन आ जाता है।
  • कभी-कभी छाती में दर्द हो सकता है।
  • कशेरुकाओं के बीच की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है।
  • गर्दन से कंधों और वहां से होता हुआ यह दर्द हाथों, सिर के निचले हिस्से और पीठ के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकता है।
  • छींकना, खांसना और गर्दन की दूसरी गतिविधियां इन लक्षणों को और गंभीर बना सकती हैं।
  • दर्द के अलावा संवेदन शून्यता और कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • शारीरिक संतुलन गड़बड़ा सकता है।
  • सबसे पहले दिखाई देने वाले लक्षणों में से एक गर्दन या पीठ में दर्द और उनका कड़ा हो जाना है।
  • समय बीतने के साथ दर्द का गंभीर हो जाना।
  • स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या होने पर यह सिर्फ जोड़ों तक ही सीमित नहीं रहती। समस्या गंभीर होने पर बुखार, थकान, उल्टी होना, चक्कर आना और भूख की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

निवारण

  • शरीर में विटामिन ‘डी’ लोहा, फास्फोरस तथा कैल्शियम मात्रा को बनाये रखने के लिए व्यक्ति को अपने भोजन में गाजर, नींबू, आंवला, मेथी, टमाटर, मूली, आदि सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। फलों में रोगी को संतरा, सेब, अंगूर, पपीता, मौसमी तथा चीकू का सेवन अधिक करना चाहिए।
  • गर्दन में दर्द से पीड़ित व्यक्ति को चोकरयुक्त रोटी व अंकुरित खाना देने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
  • गर्दन के दर्द तथा अकड़न को दूर करने के लिए सूर्य किरणों द्वारा बनाए गए लाल व नारंगी जल का उपयोग करने से रोगी को बहुत फायदा होता है। सूर्य की किरणों से हड्डियों को मजबूत करने के लिए विटामिन ‘डी’ प्राप्त होता है। सूर्य की किरणों से शरीर में विटामिन ‘डी’ प्राप्त करने के लिए रोगी को पेट के बल खुले स्थान पर जहां पर सूर्य की किरणें पड़ रही हो उस स्थान पर लेटना चाहिए। ताकि सूर्य की किरणें सीधी गर्दन व रीढ़ की हड्डी पर पड़े। इस क्रिया को करते समय सिर पर कोई कपड़ा रख लेना चाहिए ताकि सिर पर छाया रहे।
  • गर्दन के दर्द तथा अकड़न को दूर करने के लिए भुजंगासन, धनुरासन या फिर सर्पासन करना लाभकारी रहता है।
  • गर्दन के दर्द तथा अकड़न की समस्या को दूर करने के लिए रोजाना सुबह के समय में खुली ताजी हवा में घूमें।
  • गर्दन के दर्द से पीड़ित रोगी को अपने कंधों को ऊपर से नीचे की ओर करना चाहिए।
  • कंधों को घड़ी की दिशा में सीधी तथा उल्टी दिशा में घुमाना चाहिए जिससे गर्दन का दर्द ठीक हो जाता है।
  • गर्दन में दर्द तथा अकड़न की समस्या से बचने के लिए प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की तनाव रहित नींद लेना बहुत ही जरूरी है।
  • जैतून के तेल को आप आसानी से बाजार से प्राप्त कर सकते हैं। इस तेल से मालिश करके आप अपने गर्दन के दर्द को दूर कर सकते हैं।
  • 5 से 6 चम्मच जैतून के तेल को गर्म कर ले, और उसे थोड़ा ठंडा होने दें। 10 मिनट तक उस हल्के गर्म जैतून तेल से अपने गर्दन की मालिश करें। 
  • मालिश करने के बाद एक तौलिए को गर्म पानी में भिगो कर के अपने गर्दन में हल्के से मोड़ कर 10 से 15 मिनट तक छोड़ दें। इस प्रक्रिया को दिन में कम से कम तीन बार दोहराएं।

अदरक वाली गर्म चाय- अगर आपके गर्दन में तेज दर्द हो तो गर्म चाय में 1 चम्मच अदरक का पेस्ट डालकर पिये इससे तुरंत राहत मिलती है।

लहसुन वाला तेल- गर्म तेल में लहसुन को मिलाकर उस तेल से भी मालिश कर आप अपने गर्दन के दर्द को दूर भगा सकते हैं।

  • सबसे पहले एक फ्राइंग पैन में 2 चम्मच सरसों का तेल डाल लें। अब लहसुन के 4 या 5 टुकड़ों को हल्के से किसी सिलबट से कुच कर उसे तेल में डाल दें। उस तेल को लहसुन के लाल होने तक गर्म करें। फिर तेल को उतार कर थोड़ा ठंडा कर लें। फिर उस तेल से प्रतिदिन तीन बार अपने गर्दन की मालिश करें।

गर्दन में दर्द होने पर किसी भी तेल से हल्के-हल्के मालिश करें। मालिश हमेशा ऊपर से नीचे की ओर ही करें, यानी गर्दन से कंधे की ओर करें। मालिश के बाद गर्म पानी की थैली से या कांच की बोतल में गर्म पानी भरकर सिकाई करें। सिकाई के बाद तुरंत खुली हवा में न जाएं।

सिकाई

तीव्र दर्द के हालात में गर्म पानी में नमक डाल कर सिकाई करें। यह क्रम दिन में 3-4 बार अवश्य करें। दर्द को जल्द आराम देने में यह काफी लाभदायक है।

यदि फिर भी दर्द से छुटकारा न मिले तो डॉक्टर से जांच कराएं। बगैर डॉक्टरी सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा न लें। फिजियोथेरेपिस्ट के बताए अनुसार ही गर्दन का व्यायाम करें।

बर्फ के टुकड़े- अगर गर्दन में दर्द किसी चोट के कारण हो रहा हो तो उसे बर्फ की सिल्ली तथा गर्म पानी से सेंकना चाहिए।

  • सबसे पहले चोट वाले भाग में बर्फ की सिल्ली को 3 से 4 मिनट तक रखें। उसके बाद गर्म पानी में किसी कपड़े को भिगो कर पुन: उस दर्द वाले भाग को सेंके। लगातार आधे घंटे तक इस प्रक्रिया को करें। रोजाना दिन में दो से तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

सर्वाइकल में सहायक फिजियोथेरेपी

व्यायाम दर्द की तीव्रता को तो घटाते ही हैं साथ में अकड़े हुये जोड़ों और मांसपेशियों को भी सही करते हैं। फिजियोथेरेपी व्यायामों को करते समय यह बात हमेशा ध्यान रखें कि अगर किसी भी समय ऐसा लगे कि दर्द का वेग बढ़ रहा है तो व्यायाम कदापि न करें।

  • अपने सिर को दायें तरफ कन्धे तक झुकायें, थोड़ा रुकें और तत्पश्चात मध्य में लायें। यही क्रम बायें तरफ भी करें।
  • अपनी ठुड्डी को सीने की तरफ झुकायें, रुकें, तत्पश्चात सिर को पीछे ले जायें।
  • अपनी दोनों हथेलियों का दबाब सिर के पीछे दें और सिर को स्थिर रखें।
  • हर व्यायाम को 5-6 बार तक, कम से कम दिन में दो बार अवश्य करें और इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दें।
  • एक सपाट बिस्तर या फर्श पर बिना तकिये के पीठ के बल लेट जाएं। फिर अपनी गर्दन को जितना संभव हो सके उतना धीरे धीरे ऊपर उठाते जाएं। ध्यान रहे, पीठ का हिस्सा न उठे। गहरी से गहरी सांस भीतर खींचें। फिर उतने ही धीरे-धीरे गर्दन नीचे करते जाएं। सांस धीरे-धीरे छोड़ें और पूरी ताकत से अंदर फेफड़े की हवा बाहर फेंकें। यह व्यायाम कम से कम एक दर्जन बार, सुबह-शाम करें। इस व्यायाम से आपके गर्दन की मांसपेशियों को ताकत मिलती हैं तथा इसके परिणाम आपको पंद्रह दिवस के भीतर मिलने लगेंगे। नियमित व्यायाम से गर्दन दर्द से पीछा छुड़ाया जा सकता है।

योगासन- गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ प्रमुख आसनों को भी अपनाया जा सकता है, जैसे- बालासन, नटराज आसन, बतिलासन आदि।

सावधानियां

इसके साथ ही स्पॉन्डिलाइटिस से बचने के लिए अपने चलने और बैठने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है। कुछ अन्य सावधानियां और उपाय निम्न हैं- 

  • जब भी कुर्सी या सोफे पर बैठें तो पीठ को सीधी रखें तथा घुटने नितम्बों से ऊंचे होने चाहिये।
  • चलते समय, गाड़ी चलाते समय या घर का काम करते समय पीठ को सीधी रखें।
  • चाय और कैफीन का सेवन कम करें।
  • पैदल चलने की कोशिश करें। इससे बोन मास बढ़ता है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से व्यायाम और योग करें।
  • हमेशा आरामदायक बिस्तर पर सोएं। इस बात का ध्यान रखें कि बिस्तर न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत नर्म।
  • स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित लोग गर्दन के नीचे बड़ा तकिया न रखें। उन्हें पैरों के नीचे भी तकिया नहीं रखना चाहिए।
  • धूम्रपान न करें और तंबाकू न चबाएं। 
  • ऐसी मेज और कुर्सी का प्रयोग करें, जिन पर आपको झुक कर न बैठना पड़े। हमेशा कमर सीधी करके बैठें। 

यह भी पढ़ें –बदलता मौसम बढ़ते रोग

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें-editor@grehlakshmi.com