Mental Health
Home Intrusion Credit: Istock

Overview: कहीं आप तो नहीं है घरघुस्‍सु, तो हो जाएं सावधान, हो सकती है ये मानसिक बीमारी

लंबे समय तक घर में रहने से सामाजिक अलगाव, डिप्रेशन, चिंता, विटामिन डी की कमी और हृदय रोग जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं।

Home Intrusion Effects: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग घर से बाहर निकलना पसंद नहीं करते। लेकिन अगर आप लंबे समय तक घर में ही रहते हैं, तो यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। लगातार घर में रहने से न केवल शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं, बल्कि यह मानसिक बीमारी जैसे डिप्रेशन और चिंता को भी बढ़ावा दे सकता है। खासकर घर में रहने वाली मकलिाओं को कई तरह की मानसिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके नकारात्‍मक प्रभावों के बारे में।

घर से बाहर न निकलने के प्रभाव

Effects of not going out of the house
Effects of not going out of the house

आत्म-देखभाल में कमी: जब आप घर से बाहर नहीं निकलते, तो आप  आत्म-देखभाल यानी सेल्‍फ केयर जैसे बाल धोना, मेकअप करना या कपड़े बदलना छोड़ देते हैं। आपको लगता है कि कोई आपको देखने या जज करने वाला नहीं है, इसलिए आप अपने लिए भी प्रयास करना बंद कर देते हैं। 

अत्यधिक सोच: सामाजिक मेलजोल की कमी के कारण आपका दिमाग भटकने लगता है। आप सोचने लगते हैं कि क्या आपके दोस्त या परिवार को आपकी परवाह है, क्योंकि उन्होंने आपसे संपर्क नहीं किया। आप खुद को दुनिया से काट लेते हैं और अपनी भावनाओं को साझा नहीं करते। 

झूठे बहाने: अगर कोई आपसे बाहर मिलने की बात करता है, तो आप बहाने बनाते हैं, जैसे कि आपके पास पहले से प्लान है। आप अपनी उदासी या घर में रहने की आदत को छुपाने के लिए झूठ बोलते हैं, क्योंकि आप नहीं चाहते कि कोई आपकी स्थिति को कमजोर समझे। 

ईर्ष्या और FOMO: सोशल मीडिया पर दूसरों की खुशहाल जिंदगी देखकर आपको जलन हो सकती है। आप न केवल उन लोगों से ईर्ष्या करते हैं जो बाहर मजे कर रहे हैं, बल्कि उनसे भी जो एनर्जी के साथ जिंदगी जीते हैं।

घर में रहने से शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

विटामिन डी की कमी: सूरज की रोशनी के संपर्क में न आने से विटामिन डी की कमी हो सकती है, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है। 

हार्ट डिजीज का खतरा: शारीरिक गतिविधि की कमी से हार्ट डिजीज, हाई बीपी और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है। 

कमजोर इम्‍यूनिटी: पर्यावरण के संपर्क में न आने से रोग प्रतिरोधक यानी इम्‍यूनिटी कमजोर हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। 

वजन बढ़ना: कम गतिविधि और आसानी से उपलब्ध भोजन के कारण वजन बढ़ सकता है, जिससे डायबिटीज और जोड़ों की समस्याएं हो सकती हैं।

घर में र‍हने से मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

Impact of staying at home on mental health
Impact of staying at home on mental health

लगातार घर में रहने से डिप्रेशन और चिंता का खतरा बढ़ता है। सामाजिक अलगाव भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे अकेलापन, कम आत्म-सम्मान और असुरक्षा की भावना बढ़ती है। इसके अलावा, नई चुनौतियों और अनुभवों की कमी से मस्तिष्क की कार्यक्षमता जैसे मैमोरी, समस्या-समाधान और रचनात्मकता प्रभावित हो सकती है। सूरज की रोशनी के अभाव में नींद की गड़बड़ी और सर्कैडियन रिदम में बदलाव भी आम है, जिससे अनिद्रा और थकान हो सकती है। 

रोकथाम और उपाय

इस स्थिति से बचने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाए जा सकते हैं।

– नियमित रूप से बाहर टहलें।

– सामाजिक मेलजोल बढ़ाएं और पेशेवर मदद लें।

– धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में बदलाव लाकर आप इस चक्र को तोड़ सकते हैं।

– अकेले घूमने निकल जाएं।

– बच्‍चों के साथ पार्क में सैर करें।