लिवर (याकृत या कलेजा) हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है। ये रस धातू को रक्त धातू में बदलता है। ये बाइल (रंजक पित्त) का निर्माण करता है और ब्लड को क्लिंज़ कर शरीर को भी डिटॉक्सिफाई करता है। गलत खान-पान और लाइफस्टाइल लिवर के टिशू को नुकसान पहुंचाती है और इसी का नतीजा होता फैटी लिवर, जॉन्डिस और हेपेटाइटिस। आयुर्वेद में कुछ ऐसे हर्ब्स हैं जो लिवर की समस्या को सही करते हैं, बता रहे हैं जीवा आयुर्वेद के निदेशक डॉ. प्रताप चौहाण-
कुटकी- इस कड़वे स्वाद वाले हर्ब की तासीर ठंडी होती है। ये लिवर और गॉल ब्लाडर को क्लींज़ करता है। आयुर्वेद में कुटकी को भूख बढ़ाने और जॉन्डिस औऱ बाइल से जुड़ी परेशानियों को ठीक करने में उपयोगी समझा जाता है। येस्किन और पाचन की समस्याओं को भी ठीक करता है।
हल्दी- हल्दी लिवर की प्रक्रिया को सुचारू करता है और ब्लड को क्लीन भी करता है। ये शरीर से टॉक्सिन निकालने में भी मदद करता है। खाने में हल्दी लेने के बाद अलग से इसका सेवन करना जरूरी नहीं होता है।
गुडुची– गुडुची में शरीर को डिटॉक्सिफाइ करने और ब्लड को क्लीन करने की क्षमता होती है। इस हर्ब का उपयोग जॉन्डिस, हेपेटाइटिस और फैटी लिवर के उपचार में होता है, लेकिन इसका सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।
त्रिफला-आम्ला, बिभितकी और हरितकी को मिलाकर बनाया गया त्रिफला पाचन प्रक्रिया को सुचारू करता है। ये शरीर को ठंडा करता है और सारे त्रिदोषों को संतुलित करता है। त्रिफला चूर्ण कोई भी सोने के पहले ले सकता है।
एलो वेरा-एलोवेरा का जूस लिवर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है औऱ पाचन प्रक्रिया को सुचारू करता है। डायजेस्टिव सिस्टम को आराम पहुंचाने के साथ-साथ ये स्ट्रेस से भी लड़ता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
