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Code on Gas Cylinder

गैस सिलेंडर पर लिखे कोड का मतलब जानिए

गैस सिलेंडर पर छपे इन कोड का सीधा संबंध सुरक्षा से है।

Gas Cylinder: घर में गैस की टंकी आती है तो आप भले ही आपका कई बार ध्यान न गया हो लेकिन कभी-कभी बच्चे पूछ लेते हैं कि गैस सिलेंडर पर ये C-21 क्यों लिखा हैं? बच्चे का ऐसा सवाल सुनकर कहीं आप सकपका तो नहीं गए। अगर आपने भी कभी नहीं सोचा कि गैस सिलेंडर पर लिखे कोड का क्या मतलब है तो आप यहां जानिए। इन कोड का सीधा संबंध सुरक्षा से है।

सिलेंडर पर लिखे इन कोड्स में अंग्रेजी के चार अक्षर का इस्तेमाल किया जाता है। ये अक्षर ABCD होते हैं। इन अक्षरों का संबंध साल के महीने से होता है। जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए A अक्षर इस्तेमाल किया जाता है। अप्रैल, मई और जून के लिए B का इस्तेमाल किया जाता है। जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए C का यूज किया जाता है। अक्टूबर, नवम्बर और दिसंबर के लिए D अक्षर का इस्तेमाल किया जाता है।

अंग्रेजी के अक्षरों के बाद अंक लिखे होते हैं। अंक का मतलब साल से होता है। यह साल वह है जिसमें उनकी टेस्टिंग होने वाली होती है। अगर कोड B-25 लिखा है तो इसका मतलब गैस सिलेंडर की टेस्टिंग साल 2025 के अप्रैल, मई और जून में की जाएगी। इस हिसाब से आपका सिलेंडर फिलहाल पूरी तरह फिट है। अगर टेस्टिंग की डेट निकल गई है, तो समझिए सिलेंडर आपके लिए काफी खतरनाक है।

अगर किसी सिलेंडर पर नंबर लिखा है C-16, तो जान लीजिए कि वो सिलेंडर अपनी एक्सपायरी पूरी कर चुका है। कहने का मतलब यह है कि उस सिलेंडर की सुरक्षा जांच करीब 6 या 8 महीने पहले होनी थी, लेकिन वो अब तक नहीं हुई है।

सभी गैस सिलेंडर की निश्चित समयावधि के बाद टेस्टिंग की जाती है। जब सिलेंडर तैयार होता है तो हर सिलेंडर पर उसकी एक्सपायरी डेट डाल दी जाती है जैसा की हर तरह की खाने-पीने की चीजों में एक्सपायरी डेट होती है ठीक वैसे ही डेट सिलेंडर पर डाल दी जाती है।

गैस सिलेंडर के लिए BIS 3196 मानक का पालन किया जाता है, जिसके तहत बने गैस सिलेंडर की लाइफ 15 साल होती है। यानी जब गैस सिलेंडर का निर्माण होता है तो वह उस तारीख से 15 साल तक वैलिड होता है उसके बाद यह खतरे की घंटी बन जाता है। किसी भी गैस सिलेंडर की दो बार टेस्टिंग की जाती है। पहले टेस्टिंग 10 साल पर होती है और दूसरी टेस्टिंग 5 साल बाद होती है।

सिलेंडर की जांच करते समय इसका हाइड्रो टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा इसको 5 गुना ज्यादा प्रेशर से टेस्ट भी किया जाता है। टेस्टिंग के दौरान ऐसे सिलेंडर जो मानकों पर खरे नहीं उतरते उन्हें नष्ट कर दिया जाता है। सुरक्षा जांच और प्रेशर टेस्ट में पास होने वाले सिलेंडर ही दोबारा से गैस रिफिलिंग में इस्तेमाल किए जाते हैं। टेस्ट में फेल होने वाले सिलेंडर गैस कंपनी को न देकर नष्ट कर दिए जाते हैं।

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