Ujjain Clock Tree
Ujjain Clock Tree

उज्जैन के इस मंदिर में चढ़ाई जाती है घड़ी, जानें क्या है इसकी मान्यता?

आपने आजतक शोरूम और दुकानों में कई सारी घड़ी देखी होगी, लेकिन आपने कभी घड़ियों का पेड़ नहीं देखा होगा। जो घड़ियों से पूरी तरह लदा हुआ हो। वैसे तो उज्जैन में कई फेमस मंदिर हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर वो भी उज्जैन में ही है, लेकिन इसके अलावा यहां एक ऐसा मंदिर भी है जहां लोग चढ़ावे के रूप में घड़ियां चढ़ाते हैं।

Ujjain Clock Tree: आपने आज तक शोरूम और दुकानों में कई सारी घड़ी देखी होगी, लेकिन आपने कभी घड़ियों का पेड़ नहीं देखा होगा। जो घड़ियों से पूरी तरह लदा हुआ हो। वैसे तो उज्जैन में कई फेमस मंदिर हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर वो भी उज्जैन में ही है, लेकिन इसके अलावा यहां एक ऐसा मंदिर भी है जहां लोग चढ़ावे के रूप में घड़ियां चढ़ाते हैं। हम बात कर रहे हैं घड़ी वाले बाबा सगस महाराज जी के मंदिर की। पहली बार आप कहेंगे कि आखिर यहां इतनी घड़ियां क्यों लटक रहीं है, तो आज हम आपको इस पेड़ की कहानी के बारे में बताते हैं, जो काफी दिलचस्प है।

दरअसल, यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से 45 किलोमीटर दूर उन्हेल रोड से सटा घड़ी वाले बाबा नाम से एक मंदिर है। इस मंदिर का नाम सगस महाराज घड़ी वाले बाबा है। इस बरगद के पेड़ के पास से जब आप गुजरेंगे तो आपको टिक-टिक की आवाजें साफ सुनाई देंगी। मंदिर की खास बात यह है कि यहां कोई पंडित पुजारी नहीं है। यहां से गुजरने वाले आस-पास के लोग पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर अपना माथा टेक कर मन्नत मांगते हैं और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वे घड़ी चढ़ाते हैं। लोगों की मानें तो यह मंदिर 10 साल से ज्यादा पुराना है। लेकिन बीते 2-3 सालों से यह काफी चर्चा में है।

हमेशा श्रद्धालु यहां अपनी कोई न कोई मन्नत लेकर आते हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो घड़ी चढ़ाकर चले जाते हैं। सगस महाराज घड़ी वाले बाबा के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुए इस मंदिर को आसपास के क्षेत्र वासी ही नहीं बल्कि 100 किमी दूर से भी आकर लोग अपनी मन्नतें मांगते हैं। पूरा पेड़ घड़ियों से भरा हुआ है। मंदिर बड़ के पेड़ से सटा हुआ है। छोटे से मंदिर में श्रद्धलुओं की संख्या इतनी बढ़ी की अब दो सालों से मंदिर में घड़ी रखने के लिए जगह नहीं बची, जिसके बाद भक्तों ने बड़ के पेड़ पर ही घड़ी टांगना शुरू कर दिया। मंदिर किसने बनवाया कब बना कोई नहीं जनता है। ग्रामीण बताते हैं की सिर्फ दो सालों में मंदिर इतना प्रसिद्ध हो गया कि घड़ियों का मेला पेड़ पर लग गया।

Cigarettes are offered in the temple
Cigarettes are offered in the temple

इस मंदिर में घड़ी के साथ-साथ पूजन सामग्री, नारियल, अगरबत्ती, सिगरेट और चिलम भी चढ़ाई जाती है। हालांकि, ये कोई नहीं जानता कि इसे शुरू किसने किया। आने वाले श्रद्धालु पेड़ के नीचे मंदिर में पहले पूजन पाठ करते हैं, और फिर सिगरेट लगाते हैं। हालांकि यह किसी को नहीं पता कि घड़ी चढ़ाने की शुरुआत किसने की। बताते हैं कि जिसका वक्त खराब चल रहा हो वह मन्नत यहां मांगता है। उसकी मन्नत पूरी होने पर और वक्त अच्छा होने पर घड़ी चढ़ाकर भक्त जाते हैं। जैसे किसी की शादी नहीं होना, किसी के परिवार में समस्या होना से लेकर अन्य प्रकार की परेशानियों का भी समाधान इस स्थान पर होता है। इस मंदिर में पूर्णिमा और रविवार खासा भीड़ रहती है।

मेरा नाम नमिता दीक्षित है। मैं एक पत्रकार हूँ और मुझे कंटेंट राइटिंग में 3 साल का अनुभव है। मुझे एंकरिंग का भी कुछ अनुभव है। वैसे तो मैं हर विषय पर कंटेंट लिख सकती हूँ लेकिन मुझे बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल के बारे में लिखना ज़्यादा पसंद...