Aamir Khan News: अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में फिल्म निर्माता महावीर जैन और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अशोक कोठारी के साथ जैन समाज के प्रसिद्ध मुनि महेंद्र कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, आमिर खान ने जैन दर्शन, अध्यात्म और विज्ञान के बारे में गहन चर्चा की। जैन धर्म अपने अहिंसा, सत्य और तप के सिद्धांतों के लिए जाना जाता है, और आमिर खान की इस मुलाकात से यह स्पष्ट होता है कि वे विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखते हैं।
आमिर खान ने जैन धर्म के सिद्धांतों और प्रभाव पर की चर्चा
आमिर खान अपने सामाजिक और दार्शनिक दृष्टिकोण के लिए भी जाने जाते हैं, और इस तरह की मुलाकातें उनके आध्यात्मिक और विचारशील पक्ष को दर्शाती हैं। जैन मुनि महेंद्र कुमार के साथ हुई चर्चा में उन्होंने जैन धर्म के सिद्धांतों और उनके प्रभाव पर चर्चा की, जो उनके आध्यात्मिक जिज्ञासा का प्रमाण है। अभिनेता आमिर खान जैन धर्म से गहराई से प्रभावित हैं और उन्होंने इसके अहिंसा, अपरिग्रह (संपत्ति त्याग), और अनेकांतवाद (विभिन्न दृष्टिकोणों की स्वीकार्यता) जैसे सिद्धांतों को अपने जीवन में महत्वपूर्ण माना है। उनका कहना है कि जैन समाज ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को ये तीन मूल्यवान सिद्धांत दिए हैं, जो उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डालते हैं। पिछले वर्ष, सितंबर में, आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने भी जैन परंपरा के मिच्छामी दुक्कड़म के अवसर पर एक ट्विटर पोस्ट साझा किया था, जिसमें जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी गई थी। यह जैन समाज की परंपरा का एक हिस्सा है, जो क्षमायाचना और विनम्रता को महत्व देता है। इससे स्पष्ट होता है कि आमिर खान न केवल जैन दर्शन को समझते हैं, बल्कि उसकी शिक्षाओं को अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक जिंदगी में भी शामिल करने का प्रयास करते हैं।
जैन समाज के मुनि से मुलाक़ात करने पहुंचे एक्टर
कुछ समय पहले अभिनेता आमिर खान, फिल्म निर्माता महावीर जैन और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अशोक कोठारी के साथ जैन समाज के मुनि महेंद्र कुमार से मुलाकात करने पहुंचे थे। इस मुलाकात में आमिर खान ने जैन दर्शन, अध्यात्म और विज्ञान के बीच के संबंध पर गहन चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और अध्यात्म को एक करने के लिए सामंजस्य की आवश्यकता है। फिल्म निर्माता महावीर जैन के अनुसार, आमिर खान स्वयं जैन सिद्धांतों से बहुत प्रभावित हैं और अपने जीवन में अनेकांतवाद (विभिन्न दृष्टिकोणों का सम्मान करना), अहिंसा (हिंसा का त्याग), और अपरिग्रह (केवल आवश्यक चीजों का उपयोग करना) जैसे मूल्यों का पालन करते हैं। ये सिद्धांत न केवल उनकी सोच और जीवनशैली को प्रभावित करते हैं, बल्कि उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। आमिर खान का मानना है कि इन जैन सिद्धांतों का पालन कर हम एक बेहतर और अधिक संतुलित जीवन जी सकते हैं। हाल ही में जैन तेरापंथ आचार्य महाश्रमण के शिष्य और महान संत प्रो. मुनि महेंद्र कुमार का 6 अप्रैल को मुंबई में देवलोकगमन हुआ। अभिनेता आमिर खान ने इस अवसर पर मुनि महेंद्र कुमार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुनि महेंद्र कुमार को 18 भाषाओं का गहरा ज्ञान था और उन्हें अकसर “मानव कंप्यूटर” कहा जाता था। उन्होंने अपनी विद्वता से विभिन्न विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्राचीन भारतीय विज्ञान जैसे अवधना विद्या, स्मृति शक्ति, और मौखिक गणितीय गणना का प्रदर्शन किया था, जो एक दुर्लभ कौशल है।
मुनि महेंद्र कुमार की पुस्तक ‘द एनिग्मा ऑफ यूनिवर्स‘ का विमोचन दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। इसके अलावा, उनकी चर्चा प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर रोजर पेनरोज़ से भी होती रहती थी, जो स्टीफन हॉकिंग के गुरु और संरक्षक थे। मुनि महेंद्र कुमार का ज्ञान भौतिकी, जीव विज्ञान, परामनोविज्ञान, और ध्यान जैसे विविध विषयों तक फैला हुआ था। वे न केवल आधुनिक भाषाओं जैसे अंग्रेजी और जर्मन में निपुण थे, बल्कि संस्कृत, प्राकृत, और पाली जैसी प्राचीन भाषाओं में भी उनका गहरा अध्ययन था। उनके योगदान और विद्वता ने उन्हें एक महान वैज्ञानिक संत के रूप में स्थापित किया।
सोशल मीडिया के ज़रिये हर साल माफ़ी मांगते हैं एक्टर
पिछले वर्ष सितंबर में आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक क्लिप साझा की थी, जिसमें ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ लिखते हुए क्षमायाचना की गई थी। ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ का अर्थ होता है कि “मेरी सभी गलतियों के लिए मुझे क्षमा करें।” आमिर खान हर साल जैन समाज की इस परंपरा को मानते हुए इस प्रकार का वीडियो पोस्ट करते हैं। वीडियो की शुरुआत ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ से होती है, जो क्षमावाणी पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जैन धर्म में भाद्रपद महीने में पर्युषण पर्व का आयोजन होता है, जिसका महत्व दिवाली के समान होता है। इसे श्वेताम्बर समुदाय आठ दिनों तक ‘अष्टान्हिका’ के रूप में और दिगंबर समुदाय दस दिनों तक ‘दशलक्षण पर्व’ के रूप में मनाता है। इस पर्व का अंतिम दिन ‘संवत्सरी’ कहलाता है, जिसमें ‘मिच्छामी दुक्कड़म्’ कहकर लोग अपने जाने-अनजाने में किए गए अपराधों और गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। यह पर्व आत्मशुद्धि और दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा प्रकट करने का समय होता है।
