Summary : शशि कपूर बाल-बाल बचे थे लेकिन मजाक कर रहे थे
शर्मिला और शशि की जोड़ी कमाल थी। दोनों एक-दूसरे को सम्मान देते थे और बात भी रखते थे।
Sharmila and Shashi Incident: शर्मिला टैगोर और शशि कपूर ने ‘वक्त’, ‘आमने-सामने’, ‘आ गले लग जा’, जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था। इनकी ऑनस्क्रीन जोड़ी लोगों को काफी पसंद थी, ठीक वैसे ही जैसे शर्मिला और राजेश खन्ना की जोड़ी। पर्दे पर जितनी अच्छी केमिस्ट्री थी, पर्दे के पीछे भी इन दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी।
शशि कपूर के साथ बिताए पलों को याद करते हुए शर्मिला टैगोर ने एक बार एक मजेदार वाकया साझा किया था। ये घटना फिल्म सुहाना सफर की शूटिंग के दौरान की है, जब शर्मिला गाड़ी चला रही थीं और अचानक उनका कंट्रोल खो गया। वो गाड़ी सीधे शशि कपूर की तरफ लेकर चली गईं, लेकिन शशि बिल्कुल बाल-बाल सुरक्षित बच गए। हालांकि पास में खड़ा लाइटमैन, जो रिफ्लेक्टर पकड़े हुए था, गिर गया।
बाद में शशि कपूर ने अपने खास अंदाज़ में मजाक करते हुए कहा,“अगर फिर ऐसा किया तो जेनिफर (उनकी पत्नी) तीन बच्चों को लेकर तुम्हारे पास आ जाएगी और कहेगी कि दूध के पैसे नहीं हैं।” शर्मिला कहती हैं, “वो हमेशा मजाक करते थे लेकिन फिर भी बहुत सम्मानजनक और शालीन बने रहते थे।”
‘अमर प्रेम’ फेम एक्ट्रेस ने ये भी बताया कि शशि कपूर अक्सर उन्हें सेट पर चिढ़ाते थे, क्योंकि वो अक्सर डायरेक्टर से बहस किया करती थीं। शर्मिला ने कहा, “वो हर बार मुझे टोकते थे… ‘बहस मत करो, बस काम खत्म करो।’ मैंने उनसे यही सीखा है कि जब आप किसी फिल्म को पैसे के लिए या दोस्ती के नाते कर रहे हों, तो ये बात खुद से साफ रखो और फिर ईमानदारी से काम पूरा करो। जब आप सेट पर आते हैं और स्क्रिप्ट या डायरेक्टर की सीमाएं आपको पहले से पता होती हैं, तो फिर वहां से कोई चमत्कार की उम्मीद मत रखो।”
थिटएर दोनों का शौक रहा
शशि कपूर फिल्मों के साथ-साथ थिएटर से भी गहराई से जुड़े थे। उनकी पत्नी जेनिफर कपूर पृथ्वी थिएटर की सक्रिय सदस्य थीं। वहीं शर्मिला टैगोर ने भी थिएटर और आर्ट सिनेमा में खास दिलचस्पी ली थी। दोनों कलाकारों की संवेदनशीलता और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें एक-दूसरे का स्वाभाविक साथी बना दिया था, भले ही यह जोड़ी रियल लाइफ में न बनी हो, लेकिन उनके बीच एक ‘कलात्मक समझदारी’ हमेशा बनी रही।
शर्मिला ने शशि की अंग्रेज़ी फिल्मों में भी दी सलाह
शशि कपूर ने कुछ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया, जैसे The Householder (1963) और Shakespeare Wallah (1965)। ऐसे समय में, जब भारतीय अभिनेता विदेशी निर्देशकों के साथ काम करने से हिचकते थे, शर्मिला ने शशि के इस फैसले की सराहना की और उन्हें सलाह दी कि कैसे वे अपनी भाषा और संस्कृति को आत्मविश्वास से परदे पर उतार सकते हैं। उनके रिश्ते की यह बौद्धिक गहराई, आम हीरो-हीरोइन की जोड़ी से कहीं आगे की बात थी।
एक-दूसरे के फैशन और स्टाइल को देते थे सराहना
शर्मिला टैगोर 60 और 70 के दशक की फैशन आइकन मानी जाती थीं। उनके बालों की स्टाइलिंग, साड़ियों का चयन और यहां तक कि स्विमसूट पहनने का साहस उस दौर में चर्चा का विषय था। वहीं शशि कपूर अपने विदेशी बैकग्राउंड, थिएटर अनुभव और सहज एलीगेंस के कारण बहुत ही मॉडर्न और ‘वर्ल्ड सिनेमा’ वाले लुक में नजर आते थे। एक बार शर्मिला ने कहा था कि “शशि इतने साफ-सुथरे और सजीले होते थे कि अगर उनके पास कोई रूमाल गिरा हो, तो वो भी परफ्यूम वाला होता था।” वहीं शशि कपूर ने भी मजाक में कहा था, “अगर कोई साड़ी पहनना एक कला है, तो शर्मिला टैगोर उसका जीवंत उदाहरण हैं।”
