Summary: अनसूया भारद्वाज ने अपने पहनावे को लेकर होने वाली आलोचनाओं का डटकर दिया जवाब
अभिनेत्री अनसूया भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपने पहनावे को लेकर होने वाली आलोचनाओं का डटकर जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां बनने के बाद भी अपनी पहचान और आत्मविश्वास बनाए रखना गलत नहीं है। अनसूया ने बताया कि उनका परिवार उनका सबसे बड़ा सहारा है और उनके बच्चे उन्हें देखकर आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास सीखते हैं।
Anasuya Bharadwaj Statement: फिल्म “पुष्पा” और “हरी हरा वीरा मल्लु” से अपनी दमदार अदाकारी के लिए मशहूर एक्ट्रेस अनसूया भारद्वाज ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट शेयर किया, जिसने हजारों महिलाओं के दिल को छू लिया। अनसूया ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो उनके पहनावे और जीवनशैली पर सवाल उठाते हैं, खासतौर पर इसलिए क्योंकि वह दो बच्चों की मां हैं।
क्या लिखा अनसूया भारद्वाज ने?
अनसूया ने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं अक्सर लोगों के कमेंट्स पर चुप रहती हूं। लेकिन जब केवल अपनी जिंदगी जीने के लिए आलोचना झेलनी पड़ती है, तो मुझे लगता है कि अब बोलना जरूरी है और वह भी बिना गुस्सा किए।”
मातृत्व और पहचान को जोड़ने वाली सोच पर सवाल
सोशल मीडिया पर कई बार महिलाओं को उनके कपड़ों के आधार पर जज किया जाता है। खासकर मां बनने के बाद समाज उनसे ‘संयमी’ या ‘सीधी सादी’ इमेज की उम्मीद करता है। अनसूया ने इसी सोच को खुलकर चुनौती दी। उन्होंने कहा, “हां, मैं एक महिला हूं, पत्नी हूं और दो बच्चों की मां हूं। लेकिन मुझे अपनी पसंद के मुताबिक तैयार होना पसंद है। ग्लैमर और कॉन्फिडेंस हमेशा से मेरी पहचान का हिस्सा रहे हैं। मां बनने का मतलब यह नहीं कि मैं अपनी पहचान खो दूं।” उनका यह बयान उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अक्सर समाज के दबाव में अपनी पसंद और नापसंद बदलने को मजबूर हो जाती हैं।
परिवार का समर्थन ही असली ताकत
अनसूया ने यह भी साफ कर दिया कि उनके लिए सबसे जरूरी उनके पति और बच्चे हैं, और वे बिना किसी शिकायत के उन्हें उसी रूप में स्वीकारते हैं जैसी वह हैं। उन्होंने लिखा, “मेरा परिवार मुझे प्यार करता है, मुझे जज नहीं करता। मेरे बच्चे मुझे देखकर सीख रहे हैं कि कॉन्फिडेंस, दयालुता और आत्म सम्मान क्या होता है।” अनसूया का यह पोस्ट उन सभी लोगों के लिए भी जवाब है, जो यह मानते हैं कि अगर मां खुले विचारों वाली है या फैशनेबल है, तो वह अपने बच्चों पर गलत असर डालेगी। अनसूया के मुताबिक, असली सबक यही है कि बच्चे अपने माता-पिता को देखकर आत्मविश्वास और स्वाभिमान सीखते हैं, न कि केवल उनके कपड़ों से।
साहस और सम्मान साथ-साथ
अनसूया ने यह भी स्पष्ट किया कि बोल्ड होना असम्मानजनक होने के बराबर नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं किसी को अपनी तरह जीने के लिए मजबूर नहीं कर रही। बस उतनी ही आजादी चाहती हूं, जितनी आप अपने लिए चाहते हैं। कपड़े पहनना मेरी व्यक्तिगत पसंद है, यह मेरे संस्कारों को कम नहीं करता।” उनके इस बयान ने उन लोगों के लिए भी एक मैसेज दिया है, जो सोशल मीडिया पर बिना वजह किसी को निशाना बनाते हैं।
समाज के लिए सीख
अनसूया का यह साहसिक कदम सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने कपड़ों, विचारों या जीवनशैली को लेकर आलोचना झेलती है। उन्होंने साबित किया कि जब तक आपका परिवार और आपका दिल आपके साथ है, तब तक दूसरों की राय आपको रोक नहीं सकती। उन्होंने अंत में कहा, “मैं प्यार से, सम्मान के साथ और निडर होकर जीती रहूंगी। अगर आप अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी सकते हैं, तो मुझे भी वैसा करने दें।”
