Summary: "किस किसको प्यार करूं 2" में हंसी आएगी खूब लेकिन लॉजिक है गायब
“किस किसको प्यार करूं 2” एक टाइमपास फिल्म है। यह अव्यवस्थित, लेकिन ह्यूमर से भरपूर फिल्म है। यदि दर्शक केवल कपिल शर्मा के कॉमिक अंदाज और हल्की-फुल्की हंसी के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह एक बार देखने योग्य है।
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 Movie Review: बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों का हमेशा से अलग ही आकर्षण रहा है। “किस किसको प्यार करूं 2” इसी तरह की फिल्म है, जो दर्शकों को हंसी का तड़का देने का दावा करती है। फिल्म में मोहन शर्मा की भूमिका कपिल शर्मा निभा रहे हैं, जिनकी जिंदगी पूरी तरह से अजीबोगरीब घटनाओं और उलझनों से भरी हुई है। यह फिल्म कॉमेडी के मामले में नंबर एक पर है लेकिन बात लॉजिक की करें तो यह फिल्म जीरो है।
“किस किसको प्यार करूं 2” का प्लॉट
फिल्म का मुख्य आकर्षण इसका ह्यूमर है। मोहन हर बार सानिया का पीछा करता है, लेकिन बार-बार किसी और लड़की के साथ शादी कर बैठता है। चाहे वह हिन्दू हो, मुस्लिम हो या क्रिश्चियन, मोहन के पास हर धर्म की एक दुल्हन है। वह तीनों के साथ बैलेंस बनाने की कोशिश करता है, तभी सानिया एक नई पहचान और नए धर्म के साथ लौट आती है। ऐसे में मोहन का दिमाग घूम जाता है कि वह क्या करे।
ह्यूमर और लॉजिक का संघर्ष
फिल्म में मोहन के किरदार को इतना अजीब तरीके से पेश किया गया है कि वह एक पल में महमूद बन जाता है, दूसरे में माइकल और बीच में हिन्दू शादी का शिकार हो जाता है। यह सब दर्शकों को हंसाते भी हैं और थकाते भी हैं। महिलाओं को फिल्म में हल्के और अधूरे किरदारों में दिखाया गया है, जो बिल्कुल भी आकर्षित नहीं करती हैं।
ह्यूमर की मुख्य वजह हैं कपिल शर्मा
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके जोक्स और कपिल शर्मा का कॉमिक टाइमिंग है। उनकी सहज कॉमिक टाइमिंग कई जगह फिल्म को रोचक बनाए रखती है। मोहन का कैरेक्टर इसलिए दिलचस्प है क्योंकि वह किसी को धोखा नहीं देता, यहां तक कि अपनी मुस्लिम पत्नी के लिए रोजा तक रखता है। कपिल के अलावा, मंचोत सिंह भी हंसाते हैं। आयशा खान और त्रिधा चौधरी को पर्याप्त स्क्रीन समय मिला। पारुल गुलाटी और हिरा वारिना को ग्लैमर जरूर मिला, लेकिन इनके कैरेक्टर में गहराई ना के बराबर थी।
कहानी और पटकथा की कमजोरियां
फिल्म की कहानी और पटकथा बेहद कमजोर है। कहानी में एक दृश्य अचानक आता है, दूसरा गायब हो जाता है। जबरन इमोशनल पलों को जबरन लाया गया है और डायलॉग खींचे हुए से लगते हैं। फिल्म देखते हुए ऐसा महसूस होता है कि बस फिल्म को किसी तरह से गूंथ दिया गया है।
क्या देखनी चाहिए “किस किसको प्यार करूं 2”?
कुल मिलाकर “किस किसको प्यार करूं 2” एक टाइमपास फिल्म है। इसे देखकर हंसी जरूर आती है, लेकिन लॉजिक की बात करें तो कुछ भी समझ नहीं आता है। यदि दर्शक केवल कपिल शर्मा का कॉमिक अंदाज देखना चाहते हैं, तो इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है। लेकिन यदि कहानी या ठोस निर्देशन की उम्मीद है, तो दर्शकों को निराशा ही हाथ लगती है। एक लाइन में कहें तो यदि इस फिल्म को देखने जा रहे हैं, तो दिमाग घर पर छोड़ कर जाएं।
