Summary: गीता कपूर का बेबाक बयान: ‘गीता मां’ के टैग के पीछे छिपी औरत की सच्चाई
गीता कपूर ने बिना शादी के जिंदगी और इंटीमेसी को लेकर समाज की दोहरी सोच पर खुलकर बात की। उनका कहना है कि कोई भी टैग किसी महिला की भावनाओं, इच्छाओं और निजी जिंदगी को सीमित नहीं कर सकता।
Geeta Kapoor on Marriage and Intimacy: डांस की दुनिया में अपने इशारों पर बड़े-बड़े सेलेब्स को नचाने वालीं मशहूर कोरियोग्राफर गीता कपूर किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। 52 साल की उम्र में भी उनकी एनर्जी, आत्मविश्वास और बेबाक अंदाज़ उन्हें सबसे अलग बनाता है। सालों से ‘गीता मां’ के नाम से मशहूर गीता कपूर हाल ही में अपने डांस नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर दिए गए बयान की वजह से सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार चर्चा का विषय उनका करियर नहीं, बल्कि वह सोच है जिस पर समाज अक्सर बिना सोचे-समझे मुहर लगा देता है।
बिना शादी के भी पूरी जिंदगी: गीता कपूर
गीता कपूर ने आज तक शादी नहीं की, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने अधूरी या सीमित जिंदगी जी है। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए कि लोग उन्हें ‘गीता मां’ कहते हैं, यह मान लेना गलत है कि उनकी कोई निजी जिंदगी नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, किसी महिला की पहचान, उम्र या दिया गया टैग उसकी भावनाओं और इच्छाओं को खत्म नहीं करता। वह भी एक सामान्य इंसान हैं, जिनकी फीलिंग्स और ज़रूरतें बाकी लोगों जैसी ही हैं।
‘न कुंवारी, न नन’: बयान के पीछे का मतलब
गीता कपूर ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई सनसनी फैलाने के लिए कुछ नहीं कहा। उन्होंने बस यह सवाल उठाया कि समाज आखिर क्यों यह मान लेता है कि कुछ महिलाएं “ऐसा” नहीं कर सकतीं। उनका कहना था कि वह न तो कुंवारी हैं, न ही नन जैसी जिंदगी जी रही हैं और न ही भावनाओं से परे कोई देवी हैं। वह एक आम इंसान की तरह अपनी जिंदगी जीती हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
इंटीमेसी पर खुली बात, लेकिन गलत समझा गया मैसेज
गीता कपूर ने कहा कि उनसे जब इंटीमेसी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने ईमानदारी से जवाब दिया। उन्होंने यह नहीं कहा कि वह रोज ऐसा करती हैं, बल्कि यह पूछा कि लोगों को क्यों लगता है कि वह ऐसा कर ही नहीं सकतीं। उनके शब्दों में, अगर कोई महिला फिजिकली और मेंटली संतुष्ट है, तो उसमें बुराई क्या है? समस्या बात में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो इसे गलत ठहराती है।
‘गीता मां’ का टैग: सम्मान या बंधन?
गीता कपूर का मानना है कि उन्हें ‘गीता मां’ का नाम उनके स्टूडेंट्स ने प्यार से दिया, जिसे उन्होंने गर्व से अपनाया। लेकिन यही नाम धीरे-धीरे एक ऐसी छवि बन गया, जिसमें लोग यह तय करने लगे कि उनकी जिंदगी कैसी होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यह टैग उन्होंने मांगा नहीं। यह उनकी निजी जिंदगी पर ताला लगाने का अधिकार किसी को नहीं देता। उनके घर और भावनाएं किसी और के घर से अलग नहीं हैं।
पब्लिक फिगर और डबल स्टैंडर्ड
गीता कपूर ने समाज के डबल स्टैंडर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो बातें आम लोगों के लिए सामान्य मानी जाती हैं, वही बातें किसी पब्लिक फिगर के लिए अचानक ‘टैबू’ बन जाती हैं। उनका कहना है कि ईमानदारी से अपनी बात रखना गलत नहीं है, गलत है उन बातों को ग़लत नज़र से देखना।
