A side-by-side collage of two Indian movie posters. The left side features a man in a chef's apron holding a wooden spoon and a carrot, surrounded by floating food and various characters.
A side-by-side collage of two Indian movie posters. The left side features a man in a chef's apron holding a wooden spoon and a carrot, surrounded by floating food and various characters.

Summary: आमिर खान की ‘हैप्पी पटेल’ पैसा वसूल है या फुस्स? कहानी और एक्टिंग का फुल रिव्यू

कॉमेडियन और एक्टर वीर दास की नई फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ रिलीज़ हो चुकी है और दर्शकों के बीच इसे लेकर काफी चर्चा हो रही है। फिल्म में कॉमेडी, सटायर और एक अलग तरह का एक्सपेरिमेंट देखने को मिलता है।

Happy Patel Review: कॉमेडियन और एक्टर वीर दास एक बार फिर अपने अलग और हटके ह्यूमर के साथ दर्शकों के सामने आए हैं। आमिर खान के प्रोडक्शन तले बनी उनकी फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ शुक्रवार को रिलीज़ हो चुकी है। इस फिल्म को वीर दास ने अमोघ रणदिवे के साथ मिलकर लिखा और डायरेक्ट भी किया है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह फिल्म दर्शकों के लिए अपने पैसे और करीब तीन घंटे का समय खर्च करने लायक है या नहीं? तो चलिए जानते हैं कि ‘हैप्पी पटेल’ आपकी एक्सपेक्टेशंस पर खरी उतरती है या नहीं।

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हैप्पी एक ब्रिटिश गे कपल द्वारा गोद लिया गया बेटा है, जो अपनी पहचान और अपने सपनों को लेकर कन्फ्यूज्ड है। उसे खाना बनाना, डांस करना पसंद है, लेकिन उसका सबसे बड़ा सपना है अपने पिताओं की तरह एक सीक्रेट एजेंट बनना।कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब हैप्पी को पता चलता है कि वह असल में भारतीय है और उसका पूरा नाम हैप्पी पटेल है। इसके बाद उसे एक मिशन पर भारत के गोवा भेजा जाता है। अब एक ऐसा एजेंट, जिसे भारत की जानकारी सिर्फ बॉलीवुड फिल्मों से मिली हो, वो असली इंडिया में कैसे फिट बैठेगा यही इस फिल्म की जान है।

फिल्म के दूसरे हाफ में कुछ ऐसे सीन आते हैं जो कहानी को थोड़ा और पागलपन की तरफ ले जाते हैं। बॉलीवुड रेफरेंस के जरिए हैप्पी को देसी बनाने की कोशिश, उसकी टूटी-फूटी हिंदी और हालात को गलत तरीके से हैंडल करना कई मजेदार पल पैदा करता है। क्लाइमैक्स में चीजें अनएक्सपेक्टेड हो जाती हैं। वहीं दिल्ली बेली का कमबैक और सालों बाद इमरान खान की झलक दर्शकों के लिए एक सरप्राइज पैकेज बन जाती है। ये ट्विस्ट फिल्म को यादगार तो बनाते हैं, लेकिन कहानी को बहुत मजबूत नहीं कर पाते।

वीर दास ने हैप्पी पटेल के किरदार को पूरी तरह जीया है। यह एक ऐसा ब्रेन-रॉट और अजीब किरदार है, जिसे वीर दास के अलावा शायद कोई और उतनी आसानी से नहीं निभा पाता।मोना सिंह विलेन के रोल में शानदार हैं। उनके एक्सप्रेशन्स और बॉडी लैंग्वेज उनके किरदार की सनक को अच्छे से दिखाते हैं। मिथिला पालकर और शारिब हाशमी ने अपने रोल्स को ईमानदारी से निभाया है। आमिर खान और इमरान खान के कैमियो छोटे हैं, लेकिन स्क्रीन पर आते ही मुस्कान ले आते हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत वीर दास का हटकर ह्यूमर है, जो एनआरआई बनाम इंडिया वाली सोच को मजेदार अंदाज़ में पेश करता है। मोना सिंह की परफॉर्मेंस प्रभावशाली है और उनके एक्सप्रेशन्स किरदार को मजबूती देते हैं। हालांकि, फिल्म की कहानी बहुत मजबूत नहीं है और कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है। भाषा का बार-बार बदलना कई बार कन्फ्यूजन पैदा करता है। साथ ही, सिर्फ फनी मोमेंट्स के दम पर फिल्म पूरी तरह खुद को संभाल नहीं पाती, जिससे एंटरटेनमेंट का असर कहीं-कहीं कमजोर पड़ जाता है।

अगर आपको डार्क कॉमेडी और अलग तरह की फिल्में पसंद हैं, तो हैप्पी पटेल आपको एंटरटेन कर सकती है। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी और साफ-सुथरा नैरेटिव ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी नहीं उतरेगी।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...