आज ग्लैमर और चकाचौंध से भरी सिनेमा की दुनिया में अदाकारी कहीं खो सी गई है। एक समय ऐसा भी था, जब अभिनेत्रियां अपनी सादगी और नजाकत के बल पर दर्शकों के दिलों पर राज करती थीं। ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं वहीदा रहमान, जो करिश्माई अभिनय से लगभग पांच दशक से सिनेप्रेमियों में लोकप्रिय हैं। वहीदा रहमान का जन्म 3 फरवरी 1938 को हुआ। पिता ने नृत्य के प्रति नन्हीं वहीदा के रुझान को पहचान कर उसे भरतनाट्यम सीखने की अनुमति दे दी13 वर्ष की उम्र से ही वहीदा स्टेज पर कार्यक्रम पेश करने लगी। उनका नृत्य देख फिल्म निर्माता उन्हें अपनी फिल्म लेने की पेशकश करने लगे। पर उनके पिता ने इस पेशकश को ठुकरा दिया। पिता की मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वहीदा रहमान ने एक तेलुगु फिल्म में काम शुरू किया। फिल्म में वहीदा का अभिनय दर्शकों ने सराहा और इस तरह 1955 से वहीदा का फिल्मी सफर शुरू हुआ।

निर्माता गुरुदत्त के एक डिस्ट्रीब्यूटर की सलाह पर गुरुदत्त ने वहीदा रहमान को
स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया और अपनी फिल्म ‘सीआईडी और ‘प्यासा में काम करने का मौका दिया और यहीं से गुरुदत्त और वहीदा का प्रेम प्रसंग आरंभ हुआ। सन 1959 में प्रदर्शित फिल्म ‘कागज के फूल की असफल प्रेम कथा दोनों के स्वयं के जीवन पर आधारित थी। वहीदा रहमान और गुरुदत्त ने 1960 में ‘चौदहवीं का चांद और 1962 में ‘साहिब बीबी और गुलाम में भी साथ-साथ काम किया। वहीदा को हिंदी फिल्मों में लाने का श्रेय गुरुदत्त को ही जाता है। जब वहीदा और गुरुदत्त का प्रेम चल रहा था तब गुरुदत्त शादीशुदा थे और उनकी पत्नी गीता दत्त थी। मीडिया ने भी इनके प्यार को खूब हवा दी।

उनके इस रिश्ते से गीता दत्त खफा हो गई। पर गुरुदत्त ना तो गीता को छोडऩा चाहते थे और ना ही वहीदा को। 10 अक्टूबर 1964 को गुरुदत्त ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। वहीदा उनकी जिंदगी में नहीं थी और गीता को वो वापस नहीं पा सकते थे इसलिए उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। गुरुदत्त की मौत के बाद वहीदा अकेली हो गईं। लेकिन फिर भी करियर से मुंह नहीं मोड़ा और 1965 में ‘गाइड के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 1968 में आई ‘नील कमल के बाद एक बार फिर से वहीदा रहमान का कैरियर आसमान की उंचाइयां छूने लगा। साल 1974 में अभिनेता कमलजीत ने उनसे शादी का प्रस्ताव रखा, जिसको वहीदा स्वीकार कर विवाह बंधन में बंध गई। साल 2000 में उनके पति की आकस्मिक मृत्यु हो गई। वहीदा ने इसके बाद भी फिल्मों में काम जारी रखा और ‘वॉटर, ‘रंग दे बसंती और ‘दिल्ली-6 जैसी फिल्मों में अपनी बेजोड़ अदाकारी का परिचय दिया। अभिनय के क्षेत्र में बेमिसाल प्रदर्शन के लिए उन्हें साल 1972 में पद्मश्री और साल 2011 में पद्यविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज भी वहीदा रहमान फिल्मों में सक्रिय हैं।