बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के फिल्मी करियर की शुरुआत 1970 में रिलीज हुई फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ से हुई थी। फिल्म में ऋषि कपूर ने स्कूल में पढ़ाई करने वाले बच्चे का रोल किया था, उनके अलावा फिल्म में राज कपूर, सिमी ग्रेवाल और मनोज कुमार की अहम भूमिका थी। ऋषि कपूर ने एक बाल कलाकार का किरदार निभाकर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था।  

ऋषि कपूर की बतौर मुख्य अभिनेता पहली फिल्म रिलीज हुई ‘बॉबी’, जिसमें उनकी नायिका थी डिंपल कपाड़िया। ऋषि और डिंपल की इस जोड़ी को दर्शकों का जमकर प्यार मिला। ऋषि कपूर को साल 1974 का बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला। ऋषि कपूर का पूरा परिवार फिल्मी सितारों से भरा हुआ था, उस वक़्त उनके दादा पृथ्वी राज कपूर, पिता राज कपूर, चाचा शम्मी कपूर, शशि कपूर, भाई रणधीर कपूर, राजीव कपूर जैसे कलाकार भारतीय सिनेमा में अपने कदम रख चुके थे। उनके मामा प्रेमनाथ और राजेंद्र नाथ भी इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता थे। कपूर परिवार में ऋषि कपूर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।

जब पूरा देश 29 अप्रैल 2020 को इरफ़ान खान के जाने के गम में डूबा हुआ था, उसी शाम ऋषि कपूर के हॉस्पिटल में भर्ती होने की खबर आई। ऋषि बोन मैरो के कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। ये बीमारी उनको 2018 में ही पता चली थी। उसका इलाज लंदन में हुआ था। वहां से लौटने के बाद कुछ फिल्मों में भी काम किया। जब वह 29 अप्रैल को हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके लिए दुआ करने लगा पर शायद उनका साथ हमारे साथ इतना ही था। उन्होंने 30 अप्रैल के दिन 69 वर्ष में अपनी आखिरी सांस ली। उनकी दो संतानें थी रणबीर कपूर और रिधिमा कपूर। रणबीर एक स्थापित बॉलीवुड कलाकार है और रिधिमा एक डिजाइनर है। क्योंकि उनकी पुत्री दिल्ली में रहती है, लॉक डाउन के कारण फ्लाइट उपलब्ध नहीं होने के कारण वह सड़क के रास्ते मुंबई गई मगर उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं। रणबीर ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस समय बहुत कम लोग ही मौजूद थे। इस लॉक डाउन के कारण इतने बड़े कलाकार को कुछ लोग ही उनके अंतिम दर्शन कर पाए। उनके दाह संस्कार के समय अभिषेक बच्चन, आलिया भट्ट वहां मौजूद थे। आलिया ऋषि कपूर की पत्नी और रणवीर की मां नीतू सिंह को ढांढस बंधाते दिखी और साथ ही वीडियो कॉल के जरिए रिधिमा को अपडेट करती हुई दिखाई दी। उनका अस्थि विसर्जन मुंबई स्थित बाणगंगा घाट पर पूर्ण विधि विधान से किया गया।

जिस समय लोग लॉक डाउन में अपने घर में कैद थे, उस  इन वक़्त दो बड़े कलाकारों का निधन हिंदी फिल्मों के दर्शकों के लिए बड़े झटके से कम नहीं था। ऋषि कपूर का जन्म माया नगरी मुंबई में 4 सितंबर 1952 में हुआ था। उनको लोग प्यार से चिंटू जी के नाम से बुलाते थे। 17 वर्ष के उम्र में बतौर बाल कलाकार बड़े पर्दे पर अपनी दस्तक दी। उसके बाद उन्होंने ‘बॉबी’ फिल्म की और ये सिलसिला चलता गया। कर्ज, चांदनी, अमर अकबर और एंथोनी, लैला मजनू, जैसी यादगार फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने अमिताभ, विनोद खन्ना जैसे कलाकारों के साथ कई फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपनी साथी अभिनेत्री नीतू सिंह के साथ विवाह किया। उन्होंने बतौर निर्देशक भी काम किया। 1999 में राजेश खन्ना, अक्षय खन्ना, ऐश्वर्या राय, कादर ख़ान जैसे सितारों के साथ ‘आ अब लौट चलें’ फिल्म का निर्देशन किया। आरके बैनर के तले इस फिल्म का निर्माण किया गया था।

कपूर खानदान अपने जीवन शैली और खान पान के लिए जाना जाता है। ऋषि कपूर भी इससे अछूते नहीं थे। वह भी बहुत खाने-पीने के शौकीन थे। वह अपनी जि़ंदगी अपनी शर्तों पर जीने वाले थे और अपनी बात सफोगोई से रखते थे, जिसके कारण वह कई बार विवाद में भी फंस चुके थे। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव थे। ट्विटर पर उनके कई फॉलोअर थे।

उनके ट्वीट यदा कदा किसी न किसी बहस को बढ़ाने वाले थे। जिन पर कई बार कंट्रोवर्सी भी हुई मगर वह अपनी बात उसी अंदाज़ में शेयर करते रहे। उनका आखिरी ट्वीट लॉक डाउन को पालन करने की अपील के लिए किया गया था। कोरोना वॉरियर्स की हौसला अफजाई के लिए ताली और थाली बजाते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वाइरल हुआ था। लोगों ने उस वीडियो को काफी पसंद किया था।

पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुई सिनेमा जगत में कपूर परिवार की छाप राज कपूर, ऋषि कपूर से होती हुई रणबीर कपूर और करीना कपूर तक पहुंच गई है। आज भी इस परिवार के सदस्य अपने कुशल अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। ईश्वर से कामना है कि वे इसी तरह कई पीढ़ियों तक इसी प्रकार लोगों का मनोरंजन करते रहे। 30 अप्रैल को एक सिने सितारा आसमान में एक चमकता सितारा बन गया।