रोमैंटिक सुपर स्टार ऋषि कपूर ने अनगिनत सुपर हिट्स फिल्में की हैं। ‘पटेल की पंजाबी शादी उनकी आने वाली फिल्म है, जिसमें वे एक पंजाबी की भूमिका निभा रहे हैं। ऋषि कपूर से हुई एक मुलाकात मुंबई ब्यूरो चीफ गरिमा चंद्रा की…
 
चॉकलेटी हीरो के नाम से मशहूर ऋषि कपूर ने सबसे ज़्यादा न्यू हीरोइन्स के साथ काम किया। नीतू सिंह के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही अपने फ़ॉर्टी फ़ाइव ईयर्स के करियर में ऋषि आज भी कपूर एंड सन्स और अग्निपथ जैसी सफल फिल्में देने में कामयाब रहे हैं। सोशल नेट्वर्क में अपने ट्वीट्स के लिए मशहूर ऋषि मीडिया में अपने गुस्से के लिए भी फ़ेमस हैं।
 
‘पटेल की पंजाबी शादी फिल्म करने का क्या मकसद था?
पटेल की पंजाबी शादी के माध्यम से हम कोई प्रवचन नहीं देना चाहते हैं, यह मनोरंजन के लिए बनाई गई एक फिल्म है, जिसे आप सब को एंजॉय करना चाहिए। मैंने ये फिल्म परेश रावल की सलाह से की है, यूं तो जवानी में हमने कई बार साथ में काम किया है लेकिन ये फिल्म हम दोनों के लिए खास है।
 
आज के समय में किस तरह से फिल्मों का चुनाव करते हैं?
मैं अपने आपको बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि आज अपने 45 साल के करियर में अब भी मुझे ऐसे रोल मिल रहे हैं जो कि प्रॉमिनेंट है और जिनका कहानी में महत्व है और मुझे एक अच्छा किरदार निभाने का सैटिस्फेक्शन मिलता है। मैं वही करना चाहता हूं जिसने मैं कुछ कंट्रीब्यूट कर सकूं। दस साल पहले तो हमारी उम्र के लोगों को सिर्फ पिता का रोल मिलता था या वे रिटायर हो जाते थे। मैं इस बदलाव का क्रेडिट मिस्टर अमिताभ बच्चन को देना चाहता हूं, जिनकी वजह से आज अलग तरह के किरदार लिखे जाने लगे हैं। मुझे खुशी है कि मैंने ‘कपूर एंड संस जैसी फिल्म की और मेरी आने वाली फिल्म ‘102 नॉटआउट भी अलग किस्म की है, जिन्हें मेरे फैंज़ जरूर पसंद करेंगे। 
 
अपने अब तक के फिल्मी सफर को किस तरह से देखते हैं?
अपने 45 साल के करियर को एक नज़र में देखना बहुत मुश्किल है। एक लम्बा समय गुजर गया हम तो अपने आपको ढाई रुपये वाला ऐक्टर मानते हैं, उस समय फिल्मे सिंगल थिएटर में लगती थी और ढाई रुपये टिकट की कीमत होती थी, आज मल्टी प्लेस का ज़माना है, टिकट भी मिनमम तीन चार सौ रुपये होता है। हां, मुझे ऐक्टिंग से लगाव था मैंने बहुत पैशन से काम किया है। मुझे काम का जुनून था ऐक्टिंग करने का शौक था मैंने अपने काम का लुफ्त उठाया है। अब मैं चाहता हूं कि हर तरह का किरदार करूं। पहले मुझे अपने काम का क्रेडिट नहीं मिलता था, उसमेें दोष भी मेरा ही था क्यूंकी अपने शुरू के करियर की पचीस फिल्मों में तो मैं बस गाने ही गाता रहा, रोमैन्स करता रहा, फिल्में वो भी सूपरहिट होती थी। एक्टिंग का सैटिस्फैक्शन मिला ‘प्रेम रोग, ‘दामिनी ‘तवायफ या ‘चांदनी जैसी फिल्म से। लेकिन अपने करियर की सेकंड इनिंग में मुझे जो रोल मिले जैसे’अग्निपथ, ‘देव डि, ‘दो दूनी चार, ‘कपूर एंड संस और एप्रिसिएशन मिला, मेरे बारे में मीडिया ने अच्छा लिखा उसका मैं शुक्र गुज़ार हूं। जब मैंने फिल्मों में एंट्री की थी तब रोमांटिक, लॉस्ट एंड फाउंड वाली फिल्म, जादू चमत्कार वाली धार्मिक हर तरह की फिल्म बनती थी। फिल्में ज़्यादातर मल्टी स्टार होती थी और मैंने सब तरह की फिल्में की हैं। अब तो मैं थर्ड जेनरेशन में आ गया हूं लेकिन खुशनसीब हूं कि जो फिल्में की हैं वो आज भी पसंद की जाती हैं। हां कुछ फिल्मे फ्लॉप हुई, कुछ सुपर फ्लॉप भी हुई लेकिन यह सब तो हर एक्टर एक्ट्रेस की जि़ंदगी में होता है। आज की जेनरेशन के बच्चे भी मुझे पहचानते हैं। कुछ मुझे रणवीर के पापा के नाम से जानते हैं तो कुछ ये भी कहते हैं कि रणवीर मेरा बेटा है।
 
आप अपने आपको किस तरह का एक्टर मानते हैं?
एक ऐक्टर सिर्फ एक्टर होता है उसकी कोई स्ट्रेंक्थ या वीकनेस नहीं होती है। मैंने खुद को किसी तराज़ू में तौल कर नहीं देखा। कभी-कभी एक एक्टर को अपनी ही छवि से बाहर आना बहुत मुश्किल होता है, मेरे ऊपर भी एक रोमांटिक हीरो का लेबल लग गया था। उससे बाहर निकलना एक अच्छे एक्टर का काम होता है। उस वक्त आपका काम बोलता है क्यूंकि जो अच्छा एक्टर है वो हर तरह का किरदार निभा ले जाएगा बस आप में कॉन्फिडेन्स होना चाहिए। जब मैंने ‘अग्निपथ का पिम्प वाला किरदार किया तब अपनी ही रोमांटिक इमेज को तोडऩा मेरे लिए थोड़ा मुश्किल था। डर भी था कि कहीं मेरी वजह से फिल्म को नुकसान ना हो जाए किंतु लुक टेस्ट देने के बाद मुझमें विश्वास आ गया तो एक एक्टर को ये नहीं सोचना चाहिए कि उसकी कोई वीकनेस है या स्ट्रेंक्थ। 
 
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