googlenews
solah-shringar-kewal-khoobsurati-ka-partik-nahi

Solah Shringar : सोलह शृंगार को स्त्री जीवन का अभिन्न अंग माना गया है। शादी होने वाली हो या विशेष पर्व जैसे कि तीज, करवा चौथ आदि पर सुहागीन स्त्रियों के लिए सोलह शृंगार करना अनिवार्य कहा गया है, क्योंकि सोलह शृंगार में सिर से लेकर पांव तक सदा सुहागन रहने के आशीर्वाद के साथ ही और भी बहुत कुछ है।

हिन्दू धर्म-संस्कृति में शृंृगार का अपना ही महत्त्व है। एक तरफ ये सुख- सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं तो दूसरी तरफ इन सोलह शृंगार का स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसे विज्ञान ने भी कुछ हद तक स्वीकार किया है

तचाप को नियंत्रित रखता है सिंदूर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक सुहागन स्त्री जब अपनी मांग में सिंदूर भरती है तो उसका सहस्र चक्र सक्रिय हो जाता है, जो उसे एकाग्रता से सही सूझबूझ से निर्णय लेने में सक्षम रखता है। यदि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो सिंदूर महिलाओं के रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है और संपूर्ण शरीर में ठंडक प्रदान कर तनावमुक्त रखता है।

तनावमुक्त रखती है बिंदी

बिंदी को सुख समृद्धि से जोड़कर भी देखा जाता है। यह महिलाओं के आध्यात्मिक और ऊर्जावान बने रहने में भी सहायक होती है। यह चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करती है, जिससे झुर्रियों का आना कम होता है। जहां बिंदी लगाई जाती है वहां का हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है। जब तनाव होने पर यह हिस्सा दु:खने लगता है तो बिंदी ही इसे शांत करती है। बिंदी लगाने से चेहरा, गर्दन व पीठ की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे अनिद्रा की समस्या भी खत्म होती है।

आंखों के लिए फायदेमंद है काजल

काजल लगाते ही पूरे चेहरे पर एक रौनक आ जाती है। यह आंखों की सुंदरता बढ़ानेके साथ-साथ बुरी नजर से भी बचाता है और आंखों के कई रोगों से बचाव होता है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों और धूल-मिट्टी से भी काजल हमारी आंखों की सुरक्षा करता है।

शारीरिक तापमान को नियंत्रित रखता है मांग टीका

मांग के बीचों-बीच माथे पर सुशोभित होता यह आभूषण एक औरत की सुंदरता में चार-चांद लगा देता है। माना जाता है कि यह सिर के बीचों-बीच इसलिए पहना जाता है ताकि औरत अपने जीवन में हमेशा सीधे रास्ते पर चले और बिना पक्षपात के सही निर्णय ले सके। यह महिलाओं के शारीरिक तापमान को नियंत्रण में रखता है।

प्रेम का प्रतीक

शादी के वक्त और उसके बाद भी उत्सव के अवसर पर अधिकतर महिलाएं लाल रंग के जरी वर्क, सूट, साड़ियां व लहंगा पहनना पसंद करती हैं क्योंकि लाल रंग प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए शुभ कामों में भी लाल रंग का महत्त्व है। इसके अतिरिक्त लाल रंग शक्तिशाली और प्रभावशाली होता है और यह भावनाओं को नियंत्रित करके स्थिरता प्रदान करता है।

नकारात्मक विचारों को दूर रखता है गजरा

गजरे के फूलों की सुगंध धैर्य व ताजगी देते हैं। मन में आने वाले नकारात्मक विचारों को दूर रखने में गजरा सहायक है। गजरे में चमेली के फूलों की महक हर एक को आकर्षित करती है और हर तरह के तनाव को दूर रखती है।

शरीर को ठंडक देती है मेहंदी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेहंदी का रंग पति-पत्नी के रिश्ते में प्रगाढ़ता लाता है। इसके अतिरिक्त मेहंदी तनाव को दूर रखती है। इसकी खुशबू और ठंडक सुहागिन को खुश और ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होती है। मेहंदी की तासीर ठंडी होती है और शरीर की गर्मी को कम करती है।

सांस संबंधी रोगों में राहत देती है नथ नथ को माता पार्वती के सम्मान स्वरूप पहना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सुहागन स्त्री के नथ पहनने से उसके पति के स्वास्थ्य और धन-धान्य में वृद्धि होती है। जिस प्रकार शरीर के अलग-अलग हिस्सों को दबाने से एक्यूप्रेशर का फायदा मिलता है उसी तरह नाक छिदवाना भी एक एक्यूप्रेशर पद्धति है। नथ पहनने से श्वास संबंधी रोगों, कफ, सर्दी और मासिक धर्म से जुड़ी तकलीफों से काफी आराम मिलता है।

एक्यूप्रेशर का काम करते हैं झुमके व टॉह्रश्वस ईयर रिंग्स महिलाओं के स्वास्थ्य से भी संबंधित हैं। वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार हमारे ईयर लॉब पर बहुत से एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर सही दबाव पढ़ने से किडनी और ब्लैडर स्वस्थ रहते हैं।

मन-मस्तिष्क को शांत रखता है मंगलसूत्र

मंगलसूत्र पहनने का लाभ यह है कि गले और इसके आसपास वाले हिस्से में कई ऐसे बिंदु होते हैं, जिन पर दबाव पड़ने से शरीर के कई हिस्सों को स्वास्थ्य दृष्टि से लाभ मिलता है। सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर महिला के मस्तिष्क और मन को शांत रखता है।

वैज्ञानिकता के आधार पर मंगलसूत्र सोने की धातु से बना होता है और सोना रीर में तेज बढ़ाने वाली धातु होती है। यह ब्लडप्रेशर के स्तर को भी नियंत्रित करता है। हड्डियों के दर्द को नियंत्रित करता है बाजूबंद बाजूबंद से महिलाओं को शरीरिक ताकत मिलती है और रक्त संचार भी सुचारू होता है। यह मांसपेशियों में खिंचाव और हड्डियों के दर्द को नियंत्रित करता है।

वजन पर नजर रखता है कमरबंद

अधिकतर चांदी के कमरबंद को ही शुभ माना जाता है। इसके पीछे यह तथ्य भी छिपा है कि कमरबंद पहनने से माहवारी और गर्भावस्था में होने वाले दर्द से राहत मिलती है और मोटापा भी नहीं बढ़ता।

मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाती है अंगूठी

जिस उंगली में अंगूठी पहनी जाती है उस उंगली की नसें दिल और दिमाग से जुड़ी होती हैं और मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ती है।

गर्भाशय की समस्याओं से राहत देती बिछिया

बिछिया पहनने से महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और संपन्नता भी बरकरार रहती है। पैरों की उंगलियों की नसें उनके गर्भाशय से जुड़ी होती हैं। इसे पहनने से गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं से राहत भी मिलती है। इससे रक्तचाप और माहवारी भी नियंत्रित रहती है।

चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है

महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए चूड़ियां पहनती हैं। चूड़ियां हड्डियों को मजबूती प्रदान करती हैं और रक्त संचार में भी सहायक होती है।

जोड़ों के दर्द में आराम देती पायल

पायल हमेशा चांदी की ही पहनी जाती है, क्योंकि सोने को एक पवित्र धातु माना जाता है और इसे देवी-देवताओं के मुकुट व शृंगार के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक तथ्यों के हिसाब से देखा जाए तो पायल पहनने से महिलाओं को जोड़ों व हड्डियों के दर्द से आराम मिलता है। पायल के घुंघरू की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।

पहले के मय में सोलह शृंगार महिलाओं की दिनचर्या में शामिल होता था लेकिन आज वॄकग होने के कारण ऐसे सज-संवर कर ऑफिस नहीं जाया जा सकता परंतु हां, मांगलिक अवसरों पर तो महिलाएं शृंगार करने के मौके को हाथ से जाने नहीं देतीं और जाने देना भी नहीं चाहिए क्योंकि सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है सोलह शृंृगार

Leave a comment