Customize your skincare needs
Customize your skincare needs

Skincare According to Skin Needs: आने वाले दिनों में स्किनकेयर ज्यादा प्राकृतिक और मिनिमलिस्ट होने वाला है। लोग अब कम प्रोडक्ट्स के साथ ज्यादा असर चाहते हैं। इसी वजह से स्किनकेयर का केंद्र त्वचा की असली जरूरतों, प्राकृतिक चीजों और टिकाऊ ब्यूटी रूटीन पर रहेगा।

रिया ने हमेशा त्वचा को लेकर चिंता महसूस की थी। हर महीने नई क्रीम और सीरम ट्राई करने के
बावजूद, उसकी त्वचा मुरझायी रहती। एक दिन वह ब्यूटी क्लिनिक गई जहां एआई- आधारित स्किन एनालिसिस ने उसकी त्वचा का विश्लेषण किया। दो हफ्तों में, रिया की त्वचा चमकने लगी, सूजन कम हुई और वह भीतर से ताजगी महसूस करने लगी। एक्सपर्ट ने बताया कि सौंदर्य केवल दिखावा नहीं, हेल्थ और साइंस का सही मेल है।

स्किनकेयर केवल रेटिनॉल, विटामिन सी, क्लीन ब्यूटी या एक्सफोलिएशन तक सीमित नहीं रही। 2026 में विज्ञान, तकनीक और लोगों की प्राथमिकताओं के चलते स्किनकेयर में कई नये बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब उम्र बढ़ने की रोकथाम, त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और जीवनशैली पर आधारित देखभाल ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
डॉ. चांदनी जैन गुप्ता, त्वचा विशेषज्ञ और सौंदर्य चिकित्सक, एलांटिस हेल्थकेयर, लाजपत नगर, नई दिल्ली, के अनुसार, आने वाले समय में तकनीक और प्राकृतिक तत्व मिलकर त्वचा की देखभाल के तरीके बदल देंगे। एआई आपकी त्वचा की स्थिति समझेगा, जबकि पेप्टाइड और एक्सोसोम जैसे तत्व त्वचा को भीतर से मजबूत करेंगे और पेशेवर उपचारों में मदद करेंगे। आइए
जानते हैं 2026 में आने वाले 6 प्रमुख स्किनकेयर के तरीके-

एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब त्वचा की देखभाल का अहम हिस्सा बन गई है। 2026 में यह तकनीक आपकी त्वचा की नमी, तेल, सुरक्षा-परत और सूजन को तुरंत परख सकेगी। विशेषज्ञ कहती हैं, ‘एआई उपकरण सीधे पेशेवर स्तर की देखभाल और उपचार योजनाओं से जुड़ेंगे। इससे
अनुमान लगाने की जरूरत नहीं रहेगी और त्वचा की देखभाल पूरी तरह व्यक्तिगत होगी।’ इसका मतलब है- अब आपकी सुबह और शाम की दिनचर्या केवल आपकी त्वचा की वास्तविक स्थिति के
अनुसार तय होगी।

सिर्फ चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि त्वचा की लंबी उम्र और मजबूती पर ध्यान दिया जाएगा। 2026 में ऐसे उत्पाद और उपचार बढ़ेंगे जो कोशिकाओं की मरम्मत और माइटोकॉन्ड्रियल स्वास्थ्य को सपोर्ट करेंगे।
इसमें शामिल हैं-
1. हृ्रष्ठ+ बूस्टर,
2. पेप्टाइड जो ष्ठहृ्र की मरम्मत का संकेत देते हैं,
3. दीर्घकालिक मजबूती देने वाले फेशियल
4. इसका उद्देश्य त्वचा को केवल सुंदर दिखाना नहीं, बल्कि इसे अंदर से स्वस्थ
बनाए रखना है।

Skin related diseases will be less
Skin related diseases will be less

त्वचा का माइक्रोबायोम यानी जीवाणु संतुलन भी अब स्किनकेयर का मुख्य हिस्सा बन रहा है। पोस्टबायोटिक उत्पाद और जीवाणु-संतुलन बनाए रखने वाले घटक त्वचा की सुरक्षा बढ़ाते हैं और सूजन कम करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि संवेदनशील त्वचा, रोजेशिया या एक्जिमा जैसी समस्याओं वाले लोग इससे सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।

पिछले कुछ वर्षों में एक्सोसोम का उपयोग केवल चेहरे और स्कैल्प तक सीमित था, लेकिन अब यह पूरे शरीर पर लागू होगा। डॉ. चांदिनी कहती हैं, ‘एक्सोसोम लोशन और सीरम अब छाती, हाथ, पेट और जांघ जैसी जगहों पर भी उपयोग होंगे। यह त्वचा की कोलेजन और लोच को बढ़ाने में मदद करेंगे और सूजन कम करेंगे।’ इसका असर होगा- टाइटनेस, बैलेंस और मजबूती वाली
त्वचा।

पिछले साल पेप्टाइड काफी लोकप्रिय हुए और 2026 में ये और भी चलेंगे।
सिग्नल पेप्टाइड: कोलेजन और लोच के लिए,
करियर पेप्टाइड: पोषक तत्व पहुंचाने के लिए,
न्यूरोपेप्टाइड: खुजली और जलन को कम करने के लिए.
ये कॉम्बिनेशन त्वचा को जल्दी ठीक होने और लंबे समय तक फ्रेश दिखने में मदद
करेगा।

Natural and natural skin beauty
Natural and natural skin beauty

पिछले साल फिल्टर और फुलर का चलन था लेकिन 2026 में नेचुरल ब्यूटी का चलन बढ़ेगा। त्वचा का कुदरती और बैलेंस कलर और सेहत को प्राथमिकता दी जाएगी। एक्सपर्ट के मुताबिक ‘लोग आर्टिफीशियल टिप्स की बेजाय लंबे समय तक असर देने वाले नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे। लोगों का ध्यान सेहतमंद और चमकदार त्वचा।’

हम सब सेहतमंद और चमकदार त्वचा चाहते हैं। सब से सही तरीका है की हम स्किन एक्सपर्ट्स से बात करें और समझे। सिर्फ टिक टॉक या सोशल मीडिया पर देख कर स्किन केयर रूटीन फॉलो करना ईजी है पर सुरक्षित नहीं। यह बात तो आपको भी समझ आ गई होगी की हम सबकी त्वचा अलग-अलग तरह की है इसलिए उसकी देखभाल का तरीका भी अलग है। ये हम सबकी खुश किस्मती है कि हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहां अब बहुत से उपचार और रिसर्च है। हमें एक्सपर्ट एक सही गाइडेंस और ट्रीटमेंट दे सकते हैं। इसलिए पैसे को पानी के जैसे मत बहाएं बल्कि 2026 में
अपनी त्वचा को जवां और तरोताजा लुक दीजिए।

एक्सपर्ट की राय

1. अपनी त्वचा और जीवनशैली के अनुसार नए तरीको को अपनाएं।
2. एक समय में केवल एक नया उत्पाद या उपचार शुरू करें और 2-4 सप्ताह तक उसका असर देखें।
3. संवेदनशील त्वचा वाले लोग पैच टेस्ट करें- किसी नए उत्पाद को कान के पीछे या हाथ पर लगाकर जांचें।
4. यदि कोई नया उपचार या उपकरण अपनाएं तो पेशेवर सलाह अवश्य लें।

“त्वचा का माइक्रोबायोम यानी जीवाणु संतुलन भी अब स्किनकेयर का मुख्य हिस्सा बन रहा है।”

मेरा नाम मोनिका अग्रवाल है। मैं कंप्यूटर विषय से स्नातक हूं।अपने जीवन के अनुभवों को कलमबद्ध करने का जुनून सा है जो मेरे हौंसलों को उड़ान देता है।मैंने कुछ वर्ष पूर्व टी वी और मैग्जीन के लिए कुछ विज्ञापनों में काम किया है । मेरा एक...