Summary: क्या आपकी स्किन थक चुकी है ज़रूरत से ज़्यादा रूटीन से?
लगातार नए प्रोडक्ट्स, एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और ट्रेंड्स अपनाना स्किन को बेहतर बनाने की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम में स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है और असली ग्लो खोने लगता है।
Over Skincare Syndrome: आज की महिलाएं पहले से कहीं ज़्यादा अपनी स्किन को लेकर जागरूक हैं। नए-नए सीरम, टोनर, एसिड्स और एक्टिव इंग्रीडिएंट्स के नाम सुनते ही लगता है कि अगर ये सब नहीं लगाया तो स्किन पीछे रह जाएगी। लेकिन इसी जागरूकता के बीच एक नई समस्या धीरे-धीरे जन्म ले चुकी है ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम। यह वह स्थिति है जब स्किन केयर करने की चाहत, स्किन को बेहतर बनाने की बजाय उसे नुकसान पहुंचाने लगती है।
ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम आखिर है क्या?
ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम तब होता है जब हम अपनी त्वचा पर ज़रूरत से ज़्यादा प्रोडक्ट्स, एक्टिव इंग्रीडिएंट्स या बार-बार एक्सपेरिमेंट करने लगते हैं। हर नया ट्रेंड अपनाना, दिन-रात कुछ न कुछ लगाते रहना और बिना स्किन टाइप समझे प्रोडक्ट्स लेयर करना यही इस समस्या की जड़ है। स्किन को भी आराम चाहिए, लेकिन हम उसे लगातार “काम पर” लगाए रखते हैं।
सोशल मीडिया ने कैसे बढ़ाई यह समस्या?

इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ्लॉलेस स्किन, ग्लास स्किन और ओवरनाइट ग्लो जैसे ट्रेंड्स हमें यह यकीन दिला देते हैं कि सुंदर त्वचा का मतलब है ज़्यादा प्रोडक्ट्स। हर हफ्ते नया सीरम, नया एसिड और नया रूटीन देखने के बाद महिलाओं को लगता है कि उनकी स्किन में कुछ कमी है। हकीकत यह है कि सोशल मीडिया की स्किन फिल्टर्स, लाइटिंग और एडिटिंग का नतीजा होती है, न कि 10-स्टेप रूटीन का।
आम लक्षण जिन्हें हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं
जब स्किन ज़रूरत से ज़्यादा ट्रीटमेंट झेलती है, तो वह संकेत देने लगती है। बार-बार छोटे दाने निकलना, हल्की-सी जलन, स्किन का टाइट महसूस होना, अचानक रेडनेस या डलनेस—ये सब वॉर्निंग साइन्स हैं। अक्सर महिलाएं इन्हें “पर्जिंग” समझकर और ज़्यादा प्रोडक्ट्स लगाने लगती हैं, जिससे हालत और बिगड़ जाती है।
सबसे ज़्यादा नुकसान यहीं होता है
हमारी त्वचा की सबसे बड़ी ताकत है उसका स्किन बैरियर। यह नमी को अंदर और हानिकारक चीज़ों को बाहर रखने का काम करता है। ज़्यादा एक्सफोलिएशन, स्ट्रॉन्ग एसिड्स और मल्टीपल एक्टिव्स स्किन बैरियर को कमजोर कर देते हैं। जब बैरियर टूटता है, तब महंगे से महंगा प्रोडक्ट भी असर नहीं दिखा पाता, क्योंकि स्किन खुद को प्रोटेक्ट ही नहीं कर पा रही होती।
क्या ज़्यादा एक्टिव्स लगाने से स्किन तेज़ी से सुधरती है?
यह सबसे बड़ा मिथ है। रेटिनॉल, विटामिन सी, एएचए-बीएचए जैसे एक्टिव्स पावरफुल होते हैं, लेकिन इन्हें सही मात्रा और सही फ्रिक्वेंसी में इस्तेमाल करना ज़रूरी है। एक साथ कई एक्टिव्स लगाने से स्किन कन्फ्यूज़ हो जाती है और हील करने की बजाय रिएक्ट करने लगती है।

मिनिमल स्किनकेयर क्यों है बेहतर विकल्प?
हेल्दी स्किन का मतलब हर समय ग्लो नहीं, बल्कि बैलेंस है। एक जेंटल क्लींजर, अच्छा मॉइश्चराइज़र और सनस्क्रीन—इतना कई बार काफी होता है। मिनिमल स्किनकेयर स्किन को ब्रीद करने का मौका देती है और उसकी नैचुरल रिपेयर प्रोसेस को सपोर्ट करती है।
ओवर-स्किनकेयर से बाहर कैसे निकलें?
सबसे पहले अपनी रूटीन को पॉज़ करें और देखें कि सच में क्या ज़रूरी है। एक-दो हफ्ते तक केवल बेसिक प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें। नए प्रोडक्ट्स तुरंत ट्राय करने की बजाय स्किन को ऑब्ज़र्व करें।
याद रखें स्किन केयर कोई रेस नहीं है, बल्कि लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप है। खूबसूरती का मतलब स्किन को समझना है, दबाव में नहीं आना। परफेक्ट स्किन का प्रेशर जितना कम होगा, स्किन उतनी बेहतर बिहेव करेगी। हर चेहरे की ज़रूरत अलग होती है और हर ट्रेंड आपके लिए नहीं बना। जब आप स्किन की सुनने लगती हैं, तब असली ग्लो आता है जो किसी फिल्टर का मोहताज नहीं होता।
