Sunscreen Causes Acne: आमतौर पर डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह रहती है कि गर्मियों में हमें हर 3 से 4 घंटे के बाद सनस्क्रीन दोबारा लगाना चाहिए, ताकि धूप में चेहरा झुलसे नहीं! मगर कई बार कुछ सनस्क्रीन त्वचा पर अनुकूल प्रभाव न डालकर मुंहासों का कारण बनते हैं।
सनस्क्रीन एक ऐसा सौन्दर्य उत्पाद है, जिसके कई लाभ है, उसके बारे में यह कहा जाए कि वह त्वचा के लिए ठीक नहीं भी हो सकता है, तो यह आश्चर्य वाली बात है। यहां बात सनस्क्रीन की हो रही है, जो आपकी त्वचा को सूरज की क्षति से बचाने, बारीक रेखाओं और हाइपरपिग्मेंटेशन को रोकने का काम करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ सनस्क्रीन त्वचा के लिए सही नहीं होते हैं, खासकर मुंहासे वाली त्वचा के लिए और मुंहासे का कारण बनते हैं। ऐसे में हमारे सामने यह सवाल उठता है कि क्या वाकई सनस्क्रीन मुंहासे का कारण बन सकते हैं।
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सनस्क्रीन के प्रकार
सनस्क्रीन स्वयं सीधे मुंहासे का कारण नहीं बनता है। वास्तव में, यह आपकी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाने, सनबर्न, समय से पहले बुढ़ापा और त्वचा कैंसर को रोकने के लिए जरूरी है। यह जरूर है कि कुछ व्यक्तियों को कुछ खास तरह के सनस्क्रीन का उपयोग करने के बाद मुंहासों का अनुभव हो सकता है। हालांकि, ये रीएक्शन अक्सर अन्य फैक्टर के कारण होती हैं, जैसे कि सनस्क्रीन में उपलब्ध इनग्रेडिएंट्स या यह आपकी त्वचा के साथ कैसे संपर्क में आता है। मुख्य तौर पर दो तरह की सनस्क्रीन होती हैं जो हमारी त्वचा के लिए सुरक्षित होती है।
नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन
नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन विशेष रूप से बंद छिद्रों को कम करने के लिए तैयार किए जाते हैं और मुंहासे पैदा होने की आशंका कम हो जाती है। नॉन-कॉमेडोजेनिक, तेल मुक्त या मुंहासे वाली त्वचा के लिए उपयुक्त लेबल किए गए उत्पादों की तलाश करना जरूरी है। बेहतर तो यह होगा कि आप जेल आधारित या फ्लूइड आधारित सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। ये रोमछिद्रों को बंद नहीं करते हैं और इस तरह से मुंहासे होने का कारण नहीं बनते हैं।
जेल युक्त सनस्क्रीन
कुछ रासायनिक सनस्क्रीन इनग्रेडिएंट्स जैसे एवोबेंजोन या ऑक्सीबेंजोन, संवेदनशील त्वचा को परेशान कर सकते हैं और संभावित रूप से कुछ व्यक्तियों में मुंहासे जैसी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर कर सकते हैं। जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड युक्त फिजिकल सनस्क्रीन का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि ये त्वचा पर कोमल होते हैं। यदि आपकी तैलीय या मुंहासे वाली त्वचा है, तो हल्के, जेल-आधारित या मैटिफाइंग सनस्क्रीन चुनें, जो छिद्रों को बंद करने या अतिरिक्त तेल उत्पादन में योगदान करने की आशंका कम रखते हैं। कभी भी भारी या मॉइस्चराइजर युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, यह खासकर उन लोगों के लिए जरूरी है जिन्हें मुंहासे होने की आशंका बनी रहती है।
पैच टेस्ट करें

गलत तरीके से सनस्क्रीन लगाने या पर्याप्त रूप से सनस्क्रीन नहीं हटाने से मुंहासे निकल सकते हैं। अपनी त्वचा पर उचित मात्रा में सनस्क्रीन को सही तरीके से लगाना चाहिए और शाम में सनस्क्रीन को सही तरह से हटाने के लिए अपने चेहरे को अच्छी तरह से साफ करना जरूरी है। नये सनस्क्रीन उत्पादों को अपने चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए, खासकर यदि आपकी संवेदनशील या मुंहासे वाली त्वचा है। त्वचा के एक छोटे से क्षेत्र में सनस्क्रीन को थोड़ी मात्रा में लगाएं और अपने पूरे चेहरे पर इसका उपयोग करने से पहले किसी भी प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।
कुछ व्यक्ति किसी खास सनस्क्रीन इनग्रेडिएंट्स के प्रति संवेदनशील या एलर्जिक महसूस कर सकते हैं, जिससे त्वचा में जलन या मुंहासे जैसे ब्रेकआउट हो सकते हैं। इन इनग्रेडिएंट्स की पहचान करने और इनसे बचने से ऐसे दुष्परिणाम को रोकने में मदद मिल सकती है। पसीना या नमी मुंहासे को बढ़ा सकती है, लेकिन सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखना बेहद जरूरी है। वॉटर रेसिस्टेंट या स्वेट रेसिस्टेंट सनस्क्रीन को चुनना सही रहता है और विशेष रूप से स्विमिंग या अत्यधिक पसीना निकलने के बाद सनस्क्रीन को दोबारा लगाने की सलाह दी जाती है।
सनस्क्रीन रूटीन बनाएं

क्लींजिंग, एक्सफोलिएटिंग और मॉइस्चराइजिंग सहित एक नियमित स्किनकेयर रूटीन बनाए रखना, मुंहासे को ठीक करने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। सही सनस्क्रीन चुनना जो आपकी त्वचा के लिए सही हो और इसका सही तरह से इस्तेमाल इस दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है।
रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि मुंहासों के निशान जैसी परेशानी न हो सके। मुंहासों के इलाज के दौरान धूप में निकलने से सावधान रहना महत्वपूर्ण है क्योंकि रेटिनोइड्स, सैलिसिलिक एसिड और शारीरिक प्रक्रियाओं जैसे तत्व त्वचा को सनबर्न के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, इसलिए सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। याद रखें, हर किसी की त्वचा अलग होती है और एक व्यक्ति की त्वचा पर जो उत्पाद सूट करे, यह जरूरी नहीं है दूसरे की त्वचा पर भी सूट करे। यदि आपको यह नहीं पता है कि आपको किस सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए या यदि आप लगातार मुंहासे ब्रेकआउट का अनुभव कर रहे हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए, जो आपकी त्वचा को देखते हुए उस अनुसार आपको सही सनस्क्रीन चुनने की सलाह दे सके। (एशियन हॉस्पिटल के डॉ. अमित बांगिया, एसोसिएट डायरेक्टर डर्मेटोलॉजी से बातचीत पर आधारित)
यदि आपकी स्किन एक्ने वाली है, तो ऐसे सनस्क्रीन को चुनना सही है, जो हल्का, नॉन-ग्रीजी, तेल मुक्त और नॉन-कॉमेडोजेनिक हो।
यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो जिंक ऑक्साइड जैसे इनग्रेडिएंट्स एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण वाले होते हैं और चेहरे की लालिमा को कम करने में मदद करने के लिए जाने जाते हैं। नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन में नियासिनमाइड जैसे तत्व होते हैं जो, एंटी-इंफ्लेमेटरी भी होते हैं। कम से कम 30 के एसपीएफ वाले ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन को लगाने की सलाह दी जाती है, जो लाइट वेट और मिनरल आधारित हैं और एक्ने वाली त्वचा या संवेदनशील त्वचा के लिए सही हैं।
” क्लींजिंग, एक्सफोलिएटिंग और मॉइस्चराइजिंग सहित एक नियमित स्किनकेयर रूटीन बनाए रखना, मुंहासे को ठीक करने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। “
