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“इंद्रधनुषी प्यार”-गृहलक्ष्मी की कहानियां

इंद्रधनुषी प्यार-“अम्मा-बाबा की तरह मत लड़ो”,किसी भी पति-पत्नी में मन-मुटाव यातू-तू,मै-मैं होती तो परिवार के लोग यही ताना मारते। मतलब,झगड़ा औरतू-तू,मैं-मैं के पर्याय बन चुके थे अम्मा-बाबा ।बनते भी क्यूँ नहीं?अम्मा अगर पूरब थीं तो बाबा पश्चिम। अम्मा को अगर ठंडलगती तो बाबा को गर्मी। अम्मा को दरवाजा-खिड़की बंदकर सोना पसंद था तोबाबा को खोलकर। बाबा […]

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