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कच्ची उम्र की पक्की नौकरी-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां बिहार

स्कूल से आते ही उस दिन लड़का देर तक चिल्लाता रहा कि उसे पॉकेट मनी चाहिए ही चाहिए, क्योंकि उसके सभी सहपाठियों को उनके पिता पॉकेट मनी देते हैं। उसके माली पिता बड़ी मुश्किल से उसके लिए अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई के लिए खर्च जुटा पाते थे। वे अपनी असमर्थता से व्याकुल हो, बिना खाए-पिए […]

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