Summary: घरेलू काम को लेकर तलाक की मांग पर SC सख्त, बोला— “पत्नी नौकरानी नहीं”
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि पत्नी का घरेलू काम न करना ‘क्रूरता’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने तलाक की मांग कर रहे पति को फटकार लगाते हुए कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि एक जीवनसाथी से होती है।
Supreme Court Verdict: पति-पत्नी का रिश्ता जीवनभर साथ निभाने का वादा होता है, लेकिन कई बार परिस्थितियों और आपसी मतभेदों के कारण यह रिश्ता कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में कुछ दंपति तलाक जैसा बड़ा फैसला लेने पर मजबूर हो जाते हैं। तलाक लेना कोई आसान निर्णय नहीं होता, क्योंकि इसमें कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति सिर्फ इस वजह से अपनी पत्नी से तलाक लेना चाहता हो कि उसे खाना बनाना नहीं आता और वह घर के काम नहीं करती? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस पर अहम फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद लोगों की सोच पर भी असर पड़ा है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की विस्तार से जानकारी।
कर्नाटक से सामने आया यह मामला
दरअसल, यह मामला कर्नाटक का है, जहां हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने ‘क्रूरता’ के आधार पर पति को तलाक देने की अनुमति दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस आदेश को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति के वकील ने दलील दी कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम रही हैं। उन्होंने बताया कि दोनों की शादी मई 2017 में हुई थी और साल 2019 से यह दंपति अलग रह रहा है। वकील ने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल तलाक चाहता है।
खाना न बनाना क्रूरता नहीं माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

ट्रायल कोर्ट ने ‘क्रूरता’ को आधार मानते हुए तलाक की अनुमति दी थी। जब मामला उच्च पीठ के सामने आया, तो जजों ने पूछा कि आखिर इस मामले में क्रूरता किस तरह साबित होती है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पत्नी का व्यवहार सही नहीं था और वह घरेलू काम, जैसे खाना बनाना, भी नहीं करती थी। इस पर जस्टिस नाथ ने स्पष्ट कहा कि आज के समय में घर के कामों की जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि पति-पत्नी दोनों को मिलकर खाना बनाना, सफाई करना और अन्य कामों में बराबर सहयोग करना चाहिए।
पत्नी को नौकरानी समझना गलत
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने माना कि हाई कोर्ट का यह निष्कर्ष सही था कि इस तरह की बातों को ‘क्रूरता’ नहीं कहा जा सकता। सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपने किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि एक जीवनसाथी से शादी की है।”
अगली सुनवाई में पति-पत्नी की कोर्ट में मौजूदगी जरूरी
कोर्ट को यह भी बताया गया कि पति-पत्नी दोनों ही एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हैं। इस पर बेंच ने फैसला लिया कि दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया जाए, ताकि उनसे सीधे बातचीत की जा सके। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल के लिए तय की गई और दोनों पक्षों को उस दिन कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया ।

