summary: तेरी सादगी: आत्मसम्मान की खूबसूरत कहानी
यह कहानी आत्मसम्मान, सादगी और सही जीवनसाथी के चयन का भावनात्मक संदेश देती है। “तेरी सादगी” दिखाती है कि सच्चा रिश्ता बाहरी रूप से नहीं, बल्कि समझ और सम्मान से बनता है।
Short Story in Hindi: अनुष्का की बड़ी-बड़ी नीली आँखें बेहद खूबसूरत लगती थीं। पढ़ने में भी वो बहुत होशियार थीं, कॉलेज पास करते ही उसकी सरकारी नौकरी लग गयी । बिल्कुल अपनी आँखों की तरह उसका व्यवहार भी बहुत सादगी भरा था। शायद इसी वजह से वो घर तो क्या गली-मुहल्ले में भी सबकी लाड़ली थी। बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक उसकी प्यारी बातों से खुश हो जाते थे। हर कोई उसे कहता , तेरी सादगी ही तेरी पहचान है अनु। लेकिन अनुष्का अक्सर एक बात को लेकर बहुत परेशान हो जाती थी। लगभग हर रोज़ ऑफिस में उसे कोई न कोई उसके कम वजन को लेकर टोक ही देता था। कोई कहता मैडम आप डॉक्टर से मिलिए और थोड़ा वजन बढ़ाने का सोचिए। कोई कहता कहीं आपको अंदर ही अंदर कोई गंभीर बीमारी तो नहीं जो आप इतनी ज्यादा दुबली पतली हैं।

हर बार वो मुस्कुरा कर टाल देती थी, लेकिन पिछले हफ्ते कुछ ऐसा हुआ जिसने उसका मन पूरी तरह से खराब कर दिया था। अनुष्का की बुआ ने उसके लिए एक रिश्ता बताया था। लड़का और उसका परिवार पिछले हफ्ते ही उनके घर आए थे।
अनुष्का लड़के को घर दिखाने लगी और तभी सीढ़ियां चढ़ते हुए उसका पैर फिसल गया। लड़के ने हाथ थामा और जोर से ठहाका लगाते हुए बोला अभी तो हल्की सी हवा चली तो आपका पैर फिसल गया, सोचिए अगर तेज़ आंधी तूफ़ान आया तब तो आपको घर में बंद कर के रखना पड़ेगा।

अनुष्का ने उस लड़के का हाथ पकड़ा और तेज़ी से आँगन में सबके सामने जा कर जोर से चिल्लाते हुए कहा। आपके बेटे को शादी के लिए लड़की नहीं कोई जानवर चाहिए जिसे वो घर में बाँध कर रख सके। अचानक घर में सन्नाटा छा गया और लड़के का परिवार मिनटों में ही बिना कुछ कहे वापस चला गया। घर पर सबके लिए बात वहीं खत्म हो गयी। लेकिन अनुष्का उसी पल में अटक गयी थी। उस दिन के बाद से कई बार उसने आईने के सामने खड़े हो कर खुद को ध्यान से देखना शुरू कर दिया।
एक दिन जब वो ऑफिस से घर पहुंची तो उसने देखा घर में सब जल्दी में हैं, कोई सोफे के कवर बदल रहा हैी किचन में बर्तन के नए सेट निकाल रहा है। उसने पूछा कोई आने वाला है क्या? माँ ने कहा , अरे वो पापा के दोस्त हैं न उनका बेटा कल ही देहरादून से वापस आया है तो, माँ के इतना कहते ही अनुष्का ने कहा, माँ फिर से वही सब, मेरा दिल दुखाने का कोई मौका मत छोड़ना आप लोग। माँ कुछ कहती उससे पहले ही डोर-बेल बज गयी।
अनुष्का भाग कर अपने कमरे में चली गयी। थोड़ी देर बाद पापा अनुष्का को बुलाने आए। जैसे ही उसकी नज़र आकाश पर पड़ी उसने देखा वो उसे लगातार देखे ही जा रहा था। अनुष्का ने मन ही मन सोचा लो अब ये भी इतने गौर से देख रहा है, पक्का थोड़ी देर में मेरे वजन को लेकर ताना मारेगा।

छत पर घूमते हुए उन दोनों ने काफी देर तक बातें की और उन बातों में कहीं भी अनुष्का के वजन का जिक्र भी नहीं था। बातों के बीच आकाश ने अनुष्का को ध्यान से देखते हुए कहा, पहली बार किसी ऐसी लड़की से मिल रहा हूँ जो इतनी सादगी से तैयार हुई है, ना मेकअप, न हेयर स्टाइल और ना ही स्टाइलिश कपड़े। फिर भी आप बहुत अच्छी लग रही हैं। अनुष्का ने कहा , सच बताऊँ तो मैं खुद पहली बार किसी ऐसे लड़के से मिल रही हूँ जिसने मेरे वजन को लेकर अब तक मुझे नहीं टोका।
सबका अपना-अपना नजरिया है अनुष्का, बेशक ये हमारी पहली मुलाक़ात है, लेकिन मेरा मन कह रहा है आखिरी तो बिलकुल नहीं होगी। दोनों मुस्कुराने लगे, और नीचे सबके पास जा कर दोनों ने एक दूसरे को अच्छी तरह जान लेने का थोड़ा समय और माँगा लेकिन साथ ही ये भी बता दिया की उन दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया है।

