Digital Burnout Impact: डिजिटल बर्नआउट महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर डालता है, लेकिन कुछ सरल तरीके अपनाकर इससे बचा जा सकता है। संतुलित डिजिटल उपयोग और समय पर ब्रेक लेना इसकी रोकथाम में मदद करता है।
आज की तेज रफ्तार वाली दुनिया में स्मार्टफोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। काम हो, मनोरंजन हो या परिवार से जुड़ना सब कुछ स्क्रीन के जरिए होता है। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया कि घंटों स्क्रीन के सामने बैठने के बाद थकान, चिड़चिड़ापन या बेचैनी क्यों बढ़ जाती है? यह डिजिटल बर्नआउट का संकेत है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बर्नआउट को एक व्यावसायिक समस्या माना है, और डिजिटल युग में यह महिलाओं को विशेष रूप से प्रभावित कर रहा है। घर, ऑफिस और सोशल मीडिया की जिम्मेदारियां निभाते हुए महिलाएं अक्सर अधिक स्क्रीन टाइम की शिकार होती हैं, जो उनकी शारीरिक और
मानसिक सेहत पर असर डालता है। इस लेख में हम समझेंगे कि डिजिटल बर्नआउट क्या है और इसे कैसे हराया जा सकता है खासकर महिलाओं के स्वास्थ्य और फिटनेस के नजरिए से।
डिजिटल बर्नआउट क्या है
डिजिटल बर्नआउट वह स्थिति है जब लंबे समय तक डिजिटल डिवाइसेज का अत्यधिक उपयोग मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक थकान पैदा कर देता है। यह सामान्य बर्नआउट का एक रूप है, लेकिन इसका मुख्य कारण स्क्रीन टाइम, नोटिफिकेशंस और लगातार कनेक्टेड रहना है।
अध्ययनों के अनुसार, औसतन लोग रोज 7-8 घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं, और महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ वर्क-फ्रॉम-होम में इससे अधिक प्रभावित होती हैं। महामारी के बाद यह समस्या और बढ़ गई, जब रिमोट वर्किंग और ऑनलाइन सोशललाइजिंग आम हो गया। परिणामस्वरूप, महिलाओं में तनाव, चिंता और डिप्रेशन के मामले बढ़े हैं। डिजिटल बर्नआउट सिर्फ थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है और उत्पादकता घटाती है।
डिजिटल बर्नआउट के लक्षण महिलाओं में कैसे दिखतें है?
महिलाएं अक्सर मल्टीटास्किंग करती हैं। काम, बच्चों की देखभाल, घर संभालना और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना। इससे डिजिटल बर्नआउट के लक्षण जल्दी उभरते हैं-
शारीरिक लक्षण: आंखों में जलन, सिरदर्द, गर्दन और कंधों में दर्द, नींद की कमी, थकान और इम्यूनिटी कम होना।
मानसिक लक्षण: एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, चिंता बढ़ना, मोटिवेशन की कमी और निर्णय लेने में कठिनाई।
भावनात्मक लक्षण: अलगाव महसूस होना, निराशा, सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी
देखकर हीन भावना और बर्नआउट का चक्र।
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव (जैसे मासिक धर्म या मेनोपॉज) के कारण ये लक्षण और तीव्र हो सकते हैं। अगर अनदेखा किया जाए, तो यह डिप्रेशन या क्रॉनिक फटीग तक पहुंच सकता है।
महिलाओं पर डिजिटल बर्नआउट का विशेष प्रभाव
महिलाएं अक्सर घर और काम के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष करती हैं। सोशल मीडिया पर परफेक्ट जीवनशैली देखकर दबाव बढ़ता है, जो फिटनेस गोल्स को प्रभावित करता है। व्यायाम करने का मन नहीं करता, पौष्टिक खाना भूल जाती हैं और नींद प्रभावित होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बर्नआउट अधिक रिपोर्ट करती हैं क्योंकि वे घरेलू जिम्मेदारियों और काम दोनों निभाती हैं। डिजिटल युग में यह ‘ऑलवेज ऑन’ कल्चर महिलाओं की
मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
डिजिटल बर्नआउट से बचाव के प्रभावी उपाय

सौभाग्य से, डिजिटल बर्नआउट को हराना संभव है। महिलाओं के स्वास्थ्य और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए ये मंत्र अपनाएं-
स्क्रीन टाइम सीमित करें
रोजाना स्क्रीन टाइम ट्रैक करें। शाम 7 बजे के बाद फोन ऑफ या डू नॉट डिस्टर्ब मोड ऑन करें। पॉमोडोरो टेक्नीक अपनाएं- 25 मिनट काम, 5 मिनट ब्रेक।
डिजिटल डिटॉक्स करें
सप्ताह में एक दिन पूरी तरह ऑफलाइन रहें। सुबह-शाम टहलने निकलें, किताब पढ़ें या
परिवार से बात करें। इससे माइंड रिचार्ज होता है और तनाव कम होता है।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल

ध्यान, माइंडफुलनेस और ब्रिथिंग एक्सरसाइज करें। दोस्तों से मिलें, हॉबीज को समय दें। अगर लक्षण गंभीर हों, तो प्रोफेशनल सहायता लें।
फिटनेस और व्यायाम को प्राथमिकता दें
योग, वॉकिंग, डांस या स्ट्रेचिंग जैसी एक्टिविटीज अपनाएं। व्यायाम एंडॉॢफन्स रिलीज करता है, जो तनाव कम करता है। रोज 30 मिनट व्यायाम से नींद बेहतर होती है और ऊर्जा बढ़ती है।
पौष्टिक आदतें अपनाएं
7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, पौष्टिक आहार लें और हाइड्रेटेड रहें। ब्लू लाइट फिल्टर ग्लासेस का इस्तेमाल करें ताकि आंखों पर दबाव कम हो।
तकनीक का सकारात्मक उपयोग
सिर्फ डिटॉक्स ही उपाय नहीं है। मेडिटेशन ऐह्रश्वस, फिटनेस ट्रैकर्स और हेल्थ रिमाइंडर का सही इस्तेमाल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बढ़ाने में मदद करता है। डिजिटल दुनिया का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करना ही समाधान है।
महिलाओं के लिए खास टिप्स
महिलाओं को शरीर के चक्र को ध्यान में रखते हुए डिजिटल ब्रेक लेना चाहिए। मासिक धर्म या मेनोपॉज के दौरान नींद, मूड और ऊर्जा स्तर पर असर अधिक होता है। इस दौरान हल्का व्यायाम, पौष्टिक खाना और डिजिटल ब्रेक बेहद जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को भी लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से बचना चाहिए।
संतुलित डिजिटल जीवन की ओर
डिजिटल बर्नआउट आधुनिक जीवन की चुनौती है, लेकिन इसे हराकर हम स्वस्थ
और ऊर्जावान रह सकते हैं।
