Summary: बिना एक भी डायलॉग… फिर भी दिल जीत रही ‘गांधी टॉक्स’? विजय सेतुपति–अदिति राव का रोमांस बना सरप्राइज पैकेज!
आजकल ज़्यादातर फिल्मों में तेज़ डायलॉग, ज़ोरदार एक्शन और ऊंची आवाज़ वाला म्यूज़िक होता है। लेकिन ‘गांधी टॉक्स’ इन सबसे अलग है। यह एक साइलेंट फिल्म है, जिसमें बिना किसी डायलॉग के कहानी दिखाई जाती है और खास बात यह है कि फिर भी यह दिल को छू जाती है।
Gandhi Talks Film Review: भरपूर एक्शन, तेज शोर वाला बैकग्राउंड म्यूजिक और झन्नाटेदार गानों के बीच आजकल कमर्शियल सिनेमा का यही नया फॉर्मूला बन गया है। ऐसे समय में एक ऐसी फिल्म आ रही है जिसमें कोई डायलॉग नहीं है। सिर्फ एक सच्ची और दिल को छू लेने वाली कहानी है। कानों को सुकून देने वाला ए.आर. रहमान का संगीत है और विजय सेतुपति, अरविंद स्वामी व अदिति राव हैदरी की शानदार अदाकारी है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसका मकसद शोर मचाना नहीं, बल्कि शांति के साथ दर्शकों का मनोरंजन करना है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘गांधी टॉक्स’ की, जो 30 जनवरी 2026, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन रिलीज हुई है। तो चलिए जानते हैं, यह अनोखी साइलेंट फिल्म दर्शकों पर कितना असर छोड़ती है।
फिल्म की कहानी
कहानी महादेव यानी कि विजय सेतुपति की है, जो पढ़ा-लिखा होने के बावजूद नौकरी के लिए भटक रहा है और हर मोड़ पर उसे भ्रष्टाचार, सिफारिश और असमानता का सामना करना पड़ता है। दूसरी तरफ बोस्मैन यानी कि अरविंद स्वामी है, एक अमीर बिजनेसमैन जिसके पास सब कुछ होते हुए भी अंदर गहरा खालीपन है। फिल्म इन दो अलग दुनियाओं को टकराव की स्थिति में लाती है और बिना किसी डायलॉग के सिर्फ विजुअल्स, हाव-भाव और संगीत के जरिए समाज की कठोर सच्चाई दिखाती है।
कहानी में ट्विस्ट
फिल्म में पारंपरिक थ्रिलर जैसा बड़ा ट्विस्ट नहीं है, बल्कि कहानी धीरे-धीरे इमोशनली लेवल पर खुलती है। इंटरवल के बाद फिल्म इंसानियत और लालच के टकराव को और गहराई से दिखाती है, जहां हालात ही असली विलेन बन जाते हैं। क्लाइमैक्स किसी बड़े डायलॉग या एक्शन से नहीं, बल्कि भावनाओं और विजुअल इम्पैक्ट से असर छोड़ता है।
अभिनय कितना असरदार है
विजय सेतुपति बिना एक शब्द बोले अपने चेहरे और आंखों के जरिए दर्द, गुस्सा, बेबसी और उम्मीद को बेहद सच्चाई से दिखाते हैं, जो फिल्म को इमोशनल कनेक्शन देता है। अरविंद स्वामी अपने शांत और नियंत्रित अभिनय से एक ऐसे इंसान का चित्र बनाते हैं जो बाहरी सफलता के पीछे अंदर से टूट रहा है। अदिति राव हैदरी कहानी में कोमलता जोड़ती हैं, जबकि सिद्धार्थ जाधव अपने छोटे लेकिन प्रभावी रोल में हल्का डार्क ह्यूमर लाते हैं।
फिल्म की खासियत और कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका साइलेंट फॉर्मेट, दमदार विजुअल स्टोरीटेलिंग और ए.आर. रहमान का भावुक म्यूजिक है, जो हर सीन को इमोशनल टच देता है। वहीं इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार है, जिससे कुछ सीन्स लंबे महसूस होते हैं और हर दर्शक इस नए क्रिएशन से जुड़ नही पता है।
देखें या नहीं
अगर आपको अलग तरह का क्रिएशन और विजुअल स्टोरीटेलिंग वाला सिनेमा पसंद है, तो ‘गांधी टॉक्स’ आपके लिए एक खास अनुभव हो सकती है, क्योंकि यह फिल्म संवादों से नहीं बल्कि एहसासों से बात करती है। लेकिन अगर आप तेज रफ्तार, डायलॉग और मसाला एंटरटेनमेंट वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो यह आपको धीमी और भारी लग सकती है।

