Changing Fitness Trends: महिलाओं की फिटनेस हर उम्र में बदलती है और हर चरण के साथ उसकी जरूरतें भी। फर्टिलिटी से मेनोपॉज तक, सही भोजन, व्यायाम और मानसिक शांति ही महिलाओं की वास्तविक शक्ति है।
आज की महिला एक साथ कई भूमिकाएं निभाती है- मां, बेटी, प्रोफेशनल, केयरगिवर और अपनी खुद की पहचान। ऐसे में महिलाओं की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है, पर अक्सर सबसे ज्यादा अनदेखी भी होती है।
किशोरावस्था से लेकर मां बनने की यात्रा और फिर मेनोपॉज तक, हर चरण में शरीर बदलता है और उसी के साथ महिलाओं के फिटनेस की जरूरतें भी। इसी सफर को समझना हर महिला का अधिकार है- क्योंकि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का नहीं बल्कि शरीर, मन और हार्मोनतीनों को संतुलित रखने का विज्ञान है।
फर्टिलिटी फेज: शरीर को पौष्टिकता और संतुलन की जरूरत

फर्टिलिटी उम्र में शरीर ऊर्जा से भरा रहता है, पर आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में अनियमित पीरियड्स, पीसीओएस और हार्मोनल असंतुलन बढ़ रहे हैं।
इस समय फिटनेस का लक्ष्य होना चाहिए-
1. हार्मोन संतुलित करना
2. ओव्यूलेशन सपोर्ट करना
3. तनाव कम करना
क्या करें
1. योगासन जैसे- भुजंगासन, तितली आसन और सूर्य नमस्कार हार्मोन संतुलित करते हैं।
2. डेली 30 मिनट वॉक या जॉगिंग ओव्यूलेशन को सपोर्ट करती है।
3. आयरन, फोलेट और ओमेगा-3 से भरपूर डाइट फर्टिलिटी मजबूत करती है।
क्या न करें
1. ज्यादा स्ट्रेस, क्रैश डाइट, अत्यधिक वर्कआउट- ये सभी हार्मोन बिगाड़ते हैं।
प्रेग्नेंसी फेज: धीरे चलना भी फिटनेस है

1. गर्भावस्था शरीर और मन- दोनों पर गहरा असर डालती है।
2. इस दौरान महिलाओं को फिटनेस के नाम पर दबाव नहीं, बल्कि सपोर्ट चाहिए।
जरूरी बातें
1. हल्की वॉक, प्रेग्नेंसी योग, स्ट्रेचिंग
2. कैल्शियम, प्रोटीन और आयरन से भरपूर भोजन
3. पर्याप्त नींद
लाभ
1. अच्छी नींद
2. पीठ दर्द और सूजन में कमी
3. मानसिक शांति
4. हेल्दी डिलीवरी की संभावना बढ़ती है डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी प्रकार का कठिन वर्कआउट नहीं करना चाहिए।
पोस्ट-प्रेग्नेंसी: शरीर को फिर से अपनाने का समय
1. डिलीवरी के बाद सबसे बड़ी चुनौती है- अपनी पहचान और शरीर को फिर से समझना।
2. यह वह स्टेज है जहां महिलाएं अक्सर जल्दबाजी में ‘पुरानी बॉडी’ पाने की कोशिश करती हैं, जो बिल्कुल गलत है।
फोकस होना चाहिए
1.पेल्विक फ्लोर स्ट्रेंथ
2. धीरे-धीरे वजन कम करना
3.मानसिक स्वास्थ्य
क्या मदद करेगा
1. 20-30 मिनट वॉक
2. केगल एक्सरसाइज
3. हल्का पिलेट्स
4. प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन इस समय शरीर को कोमलता और धैर्य
दोनों की जरूरत होती है।
30+ का दशक: हार्मोन और फिटनेस का नया संतुलन

1. यह उम्र करियर, रिश्तों और जिम्मेदारियों का सबसे व्यस्त समय होता है।
2.यही कारण है कि इस उम्र में थकान, अनियमित पीरियड्स और वजन बढ़ना आम है।
फिटनेस मंत्रा
1. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग- सप्ताह में 2-3 दिन
2.स्किन और हार्मोन के लिए हेल्दी फैट (घी, नट्स, सीड्स)
3.7 घंटे नींद
4. स्ट्रेस कम करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की खास बात यह है कि यह हड्डियां मजबूत करती है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है।
40+ प्री-मेनोपॉज की शुरुआत और शरीर का बदलना
40 की उम्र में महिलाएं चुपचाप कई बदलावों से गुजरती हैं-
1. मेटाबॉलिज्म धीमा
2. वजन जल्दी बढ़ना
3. मूड स्विंग, थकान
4. हार्मोनल उतार-चढ़ाव
इस उम्र की फिटनेस जरूरतें
1. वेट ट्रेनिंग-हड्डियों की मजबूती के लिए
2. योग-तनाव और नींद सुधारने के लिए
3. हाई प्रोटीन डाइट
4. कैल्शियम+विटामिन डी नियमित वर्कआउट से मेनोपॉज के लक्षण
धीमे और कम तकलीफदेह हो जाते हैं।
मेनोपॉज स्टेज: खुद से दोबारा जुड़ने का समय
1 मेनोपॉज जीवन का अंत नहीं- एक नया आरंभ है। इस समय शरीर में एस्ट्रोजन कम होने से
2.हड्डियां कमजोर
3. नींद की समस्या
4. गर्माहट (हॉट फ्लैशेस)
5. वजन बढ़ना
6. मूड स्विंग
ये आम बदलाव हैं, डरने की नहीं समझने की जरूरत है।
क्या मदद करता है
1. वॉक+योग+मध्यम स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
2. पौधों वाले एस्ट्रोजन (सोया, अलसी, तिल)
3. गहरी सांसें और ध्यान
4. भरपूर पानी, हाइड्रेशन
आभार: आलेख डॉ. तृह्रिश्वत रहेजा (डायरेक्टर ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी- सीके बिरला हॉस्पिटल) से बातचीत पर आधारित है।
