A distressed woman sitting in the foreground while a man gestures behind her during an argument.
Emotional Loneliness in Marriage

Summary: शादी के भीतर की तन्हाई

पति के पास होने के बावजूद भावनात्मक जुड़ाव की कमी, संवादहीनता और उपेक्षा महिलाओं को गहरी तन्हाई महसूस कराती है।

Emotional Loneliness in Marriage: अक्सर समाज में यह मान्यता प्रचलित है, शादी कर लो अकेलापन दूर हो जाएगा। पर क्या सच में ऐसा है? क्या शादी व्यक्ति के अकेलेपन को दूर कर देता है। ज्यादातर रिश्ते में देखा जाता है महिला एक अच्छा पति, घर-परिवार, बच्चे होते हुए भी अकेलेपन से गुजर रही होती है। पति का साथ उनकी तन्हाई को कम नहीं कर पाता, आखिर क्यों। आइए जानते हैं इस लेख में।

जब रिश्ता शारीरिक हो भावनात्मक नहीं: पति हर रोज घर आता है। साथ खाता है। साथ एक बिस्तर पर सोता है। महिला को कपड़ा, खाना सब समय पर मिलता है। फिर भी महिला दुखी है। महिला का यह दुख अकेलेपन का है और यह अकेलापन मन का है, जो कि पति द्वारा उसकी भावनाओं की उपेक्षा और अनदेखी से उपजा है।

संवाद की जगह सिर्फ जरूरी बातचीत का रह जाना: पत्नी से जब पति सिर्फ घर की ज़रूरतें, बच्चों की पढ़ाई या परिवार के काम से ज्यादा कोई बात ना करें तब यह स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसी स्थिति में पत्नी अपने मन की बातें, अपने डर या सपने के बारे में बात नहीं कर पाती। उसे महसूस होता है उसे सुना या समझा नहीं जा रहा और धीरे-धीरे वह चुप हो जाती है। महिला की यह चुप्पी उसके तन्हाई में बदल जाती है।

An upset woman sitting in the foreground while a man looks on from the couch behind her.
Reasons for loneliness even when husband is around

महिला चाहती है उसकी भावनात्मक जरूरत समझी जाए: एक महिला अपनी सारी जिम्मेदारियां निभाती है। वह हर स्थिती स्वीकार करती है। सिर्फ इस उम्मीद में कि उस पर भी थोड़ा ध्यान दिया जाए। उससे पूछा जाए वह अच्छा महसूस कर रही है या नहीं। बीमार होने पर थोड़ी सांत्वना मिले। लेकिन इसकी जगह जब पति उसे हर बात पर कहे, तुम बेकार में इतना सोचती हो। तुम हर समय दुखी ही रहती हो। छोटी-छोटी बातें दिल पर ले लेती हो। तब महिला अपने भावनाओं को छुपाने लगती है और खुद को तन्हाई के अंधेरे कमरे में बंद कर लेती है।

भावनात्मक उपेक्षा: जब पति द्वारा महिला के भावनाओं की उपेक्षा की जाती है तो महिला मानसिक रूप से दर्द में होती है। भावनात्मक उपेक्षा में शारीरिक मार नहीं पड़ती, लेकिन उसका दर्द चुपचाप शरीर पर भी असर दिखाता है। लगातार भावनात्मक उपेक्षा के कारण महिला अकेलापन महसूस करती है। लंबे समय में यही अकेलापन महिला में तनाव, एंजायटी, अनचाहे शारीरिक दर्द का कारण बनता है। यहां तक की महिला में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भी कमी आती है।

भावनात्मक उपेक्षा के कारण महिला शारीरिक नजदीकी में भी खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं कर पाती है। बल्कि शारीरिक नजदीकी रिश्ते में एक आदत या जरूरत मात्र बनकर रह जाती है। अगर ध्यान ना दिया जाए तो महिला का मानसिक अकेलापन उसे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से बीमार कर सकता है।

स्वीकार करें: आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं, इस बात को स्वीकार करें। जब तक आप उसे समझेगी नहीं तब तक आप उसे दूर करने का प्रयास भी नहीं करेंगी।

अपने साथी से बात करें: अपने अकेलेपन, अपनी भावनाओं और उसके पीछे के कारण को अपने साथी को बताएं।

खुद पर काम करें: कई बार रिश्ते में आप पार्टनर को कितना भी समझ लें, वह समझने की कोशिश नहीं करता। ऐसे में आप खुद पर काम करें। जैसे, अपनी रुचियां पर काम करें। घर परिवार से अलग अपनी पहचान बनाएं। अपने बाकी रिश्तो में अपनापन बढ़ाएं। खुद को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाने के लिए योग और मेडिटेशन करें। अगर आपको लगे परेशानी अधिक बढ़ गई है तो काउंसलर की मदद लें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...