Funny Stories for Kids: निक्का का दोस्त था गोगा । उसके मोहल्ले में ही रहता था । तीन-चार गली छोड़कर । वह भी निक्का की तरह घुमक्कड़ था । दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर जाने कहाँ-कहाँ घूमते रहते ।
कभी वे लल्लन बाबू के बाग में खिरनियाँ और शहतूत खाने पहुँच जाते, तो कभी नदी किनारे टहलते और रेत में छोटी-छोटी चमकीली सीपियाँ ढूँढ़ते ।
वहाँ से कुछ ही आगे राजा भुल्लू शाह का पुराना किला था, जो खँडहर हो चुका था । वहाँ भी वे घूमते हुए पहुँच जाते और नीले चमकीले काँच के गोल-गोल टुकड़े इकट्ठे करते । साथ ही इमली के पेड़ों से कंताड़े तोड़-तोड़कर खाते । एक दिन की बात, मौसम सुहावना था । जाड़े की हलकी धूप खिली थी ।
निक्का ने कहा, “अरे गोगा, राजा भुल्लू शाह के किले के सामने जो बड़ा सा बाग है, वहाँ खूब सारे फूल खिले हैं । बड़े संदुर-संदुर फूल । तितलियाँ भी बहुत होंगी । लाल, हरी, नीली, पीली बहुत सारी तितलियाँ । लाल-नीली बंदकिुयों वाली भी । देखकर कि तना अच्छा लगेगा !”
गोगा बोला, “चलो, चलते हैं निक्का । हम लोग राजा भुल्लू शाह के किले में भी तो बहुत समय से नहीं घूमे । आज वहाँ खूब घूमेंगे । फिर फूलों वाले बाग की सैर करेंगे ।”
निक्का और गोगा नदी किनारे राजा भुल्लू शाह के पुराने कि ले में देर तक घूमते रहे । हर बार वहाँ कुछ न कुछ नया मि ल जाता । फिर किला खँडहर भले ही हो गया हो, पर आज भी उसकी शान के क्या कहने । इसलि ए दोनों दोस्तों को वहाँ घूमना अच्छा लगता था । कुछ लोग दूर-दूर से उस कि ले को देखने आते । निक्का और गोगा उनसे भी बातें करते, तो उन्हें नई-नई बातें पता चलती थीं ।
पुराने कि ले में देर तक घूमने के बाद निक्का और गोगा उसके सामने वाले बाग में आ गए । वहाँ सचमुच फूल ही फूल थे । गुलाब, गुड़हल, गेंदे के बड़े-बड़े फूल । साथ ही लाल कनेर, चाँदनी, बेला, चंपा, मोति या और न जाने कौन-कौन से फूल थे । बहुतों के तो उन्हें नाम भी पता नहीं थे । उन फूलों पर रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडरा रही थीं । देखकर निक्का और गोगा को बहुत मजा आया ।
गोगा बोला, “आओ निक्का , तितलि याँ पकड़ें ।”
निक्का ने हँसकर कहा, “नहीं…नहीं, तुम्हीं पकड़ो ।”
गोगा देर तक एक बड़ी -सी पीली ति तली का पीछा करता रहा । पर तितली उसकी पकड़ में नहीं आई । कभी वह कि सी फूल पर बैठती, फिर उड़कर हवा में गोते लगाने लगती । फिर गोगा को चिढ़ा ते हुए कि सी जंगली झाड़ी पर बैठ जाती और हँसने लगती । गोगा कुछ-कुछ थक गया और चाँदनी के पेड़ का सहारा लेकर खड़ा हो गया ।
तभी निक्का ने मुसकराते हुए कहा, “गोगा, तुम्हें एक बात नहीं पता । मेरी मम्मी कहती हैं, जितना तुम तितलियों के पीछे भागोगे, उतना ही ये तुमसे डरकर दूर भागेंगी । इनसे दोस्ती करनी है, तो इन्हें डराओ मत ।” गोगा को बात समझ में आ गई । बोला, “अरे ! मैंने तो यह सोचा ही नहीं था ।”
वह निक्का के पास बैठकर बातें करने लगा । दोनों दोस्त देर तक बैठे गपशप करते रहे । निक्का ने गोगा को अपनी मम्मी से सुनी बुगनी और जुगनी की मजेदार कहानी सुनाई और गोगा ने अपने छोटे भाई चिंटू की शरारतों के कारनामे । सुनकर निक्का खूब हँसता । साथ-साथ गोगा भी हँस पड़ता । आज सुबह ही चिंटू ने बड़ा कमाल कि या था । गोगा की कि ताबों पर तरह-तरह की चित्र कारी करके रँग डाला और डाँट से बचने के लि ए स्टोर में छिपकर बैठ गया । इस पर गोगा ने हँसते हुए कहा, “अरे चिंटू, तूने तो बड़े अच्छे चित्र बनाए हैं । ले, आकर इनाम ले जा !”
तब बड़ी मुश्किल से डरते-डरते वह बाहर आया और सिर झुकाकर खड़ा हो गया । मगर गोगा ने बजाय डाँटने के, हँसते हुए उसे चाॅकलेट इनाम में दी तो उसकी जान में जान आई । फिर अपने आप ही बोला, “छॉली, गोगा भैया,
आगे छे मैं ऐछे नईं कलुंगा निक्का और गोगा के बीच इसी तरह की बातें और गपशप चल रही थी । तभी अचानक निक्का ने गोगा की ओर इशारा कि या । बोला, “देखो गोगा, देखो । तुम्हा रे कंधे पर ति तली है ।…लेकिन पकड़ना मत । नहीं तो उड़ जाएगी ।” “ओहो, पर मैं तो देख भी नहीं सकता ।” गोगा धीरे से फुसफुसाकर बोला ।
निक्का ने भी उसी तरह फुसफुसाकर कहा, “कोई बात नहीं । पर मुझे तो दिखाई दे रही है न । तुम ऐसे ही बैठे रहना गोगा ।” कुछ देर बाद एक नीली-पीली ति तली आकर निक्का के कंधे पर बैठ गई । गोगा चहककर बोला, “अरे निक्का , देखो, देखो, तुम्हा रे कंधे पर भी तितली !
बड़ी संदुर सी नीली-पीली तितली ।”
“तुम मेरे कंधे पर बैठी ति तली को देखो और मैं तुम्हारे कंधे पर बैठी तितली को ।” निक्का हँसने लगा ।
“शायद ये बहनें हैं । आपस में बातें कर रही हैं ।” गोगा ने कहा तो निक्का और गोगा दोनों एक साथ खिलखिलाकर हँस पड़े ।
देर तक वे दोनों दोस्त तितलियाँ बैठी रहीं, फिर उड़ गईं। अब निक्का और गोगा उन प्यारी-प्यारी तितलियों की बात करते हुए, घर लौट रहे थे । गोगा सोच रहा था, ‘आज मैं अपनी ड्राइंग की काॅपी में ढेर सारी ति तलि यों के चित्र बनाकर चिंटू को दिखाऊँगा, तो चिंटू कि तना खुश होगा !’ और निक्का सोच रहा था, ‘वाह, यह तो कि तनी अच्छी कहानी बन गई । मैं घर जाते ही लिखूंगा ।’ आज का दिन दोनों के लिए यादगार बन गया था ।
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
