Funny Stories for Kids: निक्का के जन्मदिन पर उसकी मम्मी ने उसे लाकर दिया लाल नाक वाला गुड्डा । निक्का को वह बड़ा पसंद था । रात-दिन उसे अपने साथ ही रखता था । उस गुड्डे की एक खास बात निक्का को अच्छी लगती थी । वह यह कि गुड्डा हमेशा मुसकराता रहता था । जब-जब निक्का उसकी ओर देखता, उसे लगता, गुड्डा हँसकर कह रहा है, “हैलो निक्का ! कैसे हो ?”
“अच्छा हूँ, अच्छा हूँ, बहुत अच्छा । प्यारे गुड्डे !” निक्का कहता, “तुम तो हर वक्त मुसकराते ही रहते हो । इसीलि ए मुझे इतने प्यारे लगते हो । तुम्हें खुश देखकर मेरा मन भी खिल जाता है ।” कहते-कहते निक्का खुश होकर उसकी ठुड्डी हिला देता ।
इस पर गुड्डा हँसकर कहता, “गुड…वेरी गुड !” और ही-ही हँसने लगता । उस समय उसकी लाल नाक जरा फूल जाती । देखकर निक्का को बड़ा मजा आता ।
“यह गुड्डा तो सच्ची -मुच्ची मेरा दोस्त है । मैं इस पर कोई अच्छी -सी कहानी क्यों न लिखूं ?” निक्का अपने आप से कहता और खयालों की दुनिया में खो जाता ।
उसने बहुत सोचा, पर कहानी कोई बनी नहीं । तब उसने अपने आप से कहा, “कोई बात नहीं । मुझे शायद अभी थोड़ा और इंतजार करना चाहिए । हो सकता है, तब कोई अच्छी सी कहानी बन जाए ।”
फिर एक दिन की बात, निक्का आँगन में बैठा होमवर्क कर रहा था । पास ही लाल नाक वाला उसका प्यारा गुड्डा भी था, जो बड़े प्यार से उसकी ओर दखे कर मुसकरा रहा था । ऊपर मुंडेरी पर बैठा एक शरारती तोता बड़ी दरे से उसे गौर से देख रहा था । पर निक्का ने उसकी ओर ध्यान ही नहीं दिया । वह स्कूल का काम पूरा करने में डूबा हुआ था ।
बीच-बीच में वह गुड्डे से कहता, “प्यारे गुड्डे, आज होमवर्क थोड़ा ज़्यादा है । तुम बिल्कुल बुरा मत मानना । मैं अभी तुमसे बात करता हूँ ।”
इस पर गुड्डा मुसकराकर कहता, “कोई बात नहीं । कोई बात नहीं, प्यारे निक्का । तुम पहले अपना होमवर्क पूरा कर लो । फिर हम दोनों खूब सारी बातें करेंगे ।”
गुड्डे को ‘थैंक्यू’ कहकर निक्का फिर से अपने होमवर्क में डूब गया । थोड़ी देर बाद होमवर्क पूरा हुआ, तो निक्का की निगाह अपने गुड्डे की ओर गई । पर उसे देखते ही वह बुरी तरह चौंक पड़ा , “अरे ! मेरे गुड्डे की नाक कहाँ चली गई ? ओह, मेरे गुड्डे की नाक…! यह तो बुरा हुआ । बहुत बुरा ।”
निक्का को रोना आ गया । इतना प्यारा उसका गुड्डा था । उसकी लाल नाक ही तो उसकी शान थी । इसी नाक की वजह से तो वह हमेशा मुसकराता हुआ लगता था । अब नाक नहीं है, तो लगता है, चुप-चुप सा बि सूर रहा है । निक्का के दुख का कोई ठिकाना नहीं था । वह रोते-रोते मम्मी के पास
पहुँचा । बिलखता हुआ बोला, “मम्मी , नाक…मेरे गुड्डे की नाक !” “क्या हुआ तुम्हारे गुड्डे की नाक को ?” मम्मी को कुछ समझ में नहीं आया ।
“मम्मी , मम्मी , आप खुद चलकर देख लो !” निक्का रोते-रोते बोला । इस पर मम्मी ने खुद चलकर निक्का के गुड्डे को देखा, तो समझ गईं कि निक्का क्यों दुखी है । उन्होंने प्यार से निक्का को चुप कराया । फिर बोलीं, “चिंता न कर निक्का , शायद गुड्डे की नाक कहीं गिर गई होगी । कल मैं तुम्हें
ढूँढ़ दूँगी ।”
पर मम्मी ने घर में हर जगह ढूँढ़ा । गुड्डे की नाक कहीं मिली ही नहीं । तब निक्का को दिलासा देती हुई मम्मी बोलीं, “निक्का रो मत, मैं तुझे दूसरा गुड्डा ला दूँगी ।”
पर निक्का भला कैसे मान जाता ? “नहीं-नहीं, मुझे तो यही गुड्डा चाहिए ।…मैं अपना गुड्डा नहीं बदलूंगा ।” उसने जिद की ।
मम्मी सोच में पड़ गईं । बोलीं, “तो ऐसा कर निक्का , मैं लाल रंग का चमकीला पन्नी वाला कागज ले आती हूँ । उसे गत्ते पर चिपकाकर नाक बना देंगे, और फिट कर देंगे ।” निक्का को यह आइडि या पसंद आया । बोला, “मम्मी , आप जल्दी से नाक लगा दो । मेरा गुड्डा बहुत दुखी है ।”
अगले दिन मम्मी बाजार जाकर लाल रंग का चमकीली पन्नी वाला कागज ले आईं । फि र मम्मी और निक्का कैं ची, लेई और पन्नीदार कागज लेकर बैठे । गुड्डे की नाक लग गई । बड़ी ही शानदार नाक । खूब चम-चम करती हुई । निक्का खुशी से भरकर नाच उठा । बोला, “मम्मी , मम्मी , देखो गुड्डा खुश होकर मुसकरा रहा है । यह नाक तो पहले से भी अच्छी है !” फिर उसने लाड़ से भरकर कहा, “आप…आप बहुत अच्छी हैं मम्मी । आप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हैं ।”
“अच्छा जी !…ओहो रे, मेरे प्यारे निक्का !” मम्मी जोर से हँसीं । उन्होंने प्यार से निक्का का माथा चूम लिया ।
फिर एक दिन वही तोता आया । हरा-हरा चंचल तोता । वह दोबारा गुड्डे की नाक ले जाना चाहता था । पर इस बार निक्का चौकन्ना था । उसने तोते को पकड़कर झट पिंजरे में डाल दिया ।
इस पर तोता टें-टें करके रोया । बहुत रोया । उसने सॉरी भी बोला । फिर
गरदन झुकाकर कहा, “मुझे क्या पता था निक्का , कि तुम्हें यह नाक इतनी पसंद है । मैं तो उसे अपना घर सजाने के लिए ले गया था । कहो तो अभी ला देता हूँ ।”
“अच्छा , ठीक है तोते ! पर देखो, अपना वादा पूरा करना ।” कहते हुए निक्का ने पिंजरा खोल दिया ।
और सचमुच तोता उड़ता हुआ गया, झट से गुड्डे की पहली वाली नाक ले आया । निक्का ने उसे सँभालकर रख लि या । पर उसकी फिर कभी जरूरत ही नहीं पड़ी , क्योंकि तोता अब निक्का और गुड्डे का प्या रा दोस्त बन गया था । फिर भला गुड्डे की नाक कौन ले जाता ?
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
