टोकोफ़ोबिया से मुक्ति: शांत और सकारात्मक प्रसव के लिए 5 असरदार मानसिक ट्रिक्स
डर और चिंता (टोकोफ़ोबिया) को दूर कर अपनी डिलीवरी को सकारात्मक और शांत अनुभव बनाने के लिए 5 आसान मानसिक उपाय जानें। आत्मविश्वास बढ़ाने, जानकारी जुटाने और सकारात्मक सोच अपनाने से आप प्रसव के डर को आसानी से कम कर सकती हैं।
Mental Tips to Reduce Labor Fear: गर्भावस्था हर महिला के लिए जीवन का सबसे खूबसूरत समय होता है। आने वाले बच्चे के बारे में सोचकर किसी भी गर्भवती महिला के मन में उत्साह के साथ-साथ थोड़ी चिंता और डर के विचार भी आते हैं। यह चिंता, जिसे टोकोफ़ोबिया भी कहा जाता है पूरी तरह से सामान्य है। लेकिन बहुत ज्यादा डर आपके प्रसव के अनुभव को नकारात्मक रूप से प्रभावित भी कर सकता है। मानसिक रूप से मजबूत होकर आप इस खूबसूरत यात्रा को शांत और सकारात्मक बना सकती हैं। कुछ छोटी-छोटी बातों का ख़ास ख्याल रखने पर आप आसानी से प्रसव के डर को कम कर सकती हैं। आपको हमेशा यह याद रखना चाहिए आपका शरीर एक अनोखी रचना है, जिसे प्रकृति ने बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से तैयार किया हुआ है। किसी भी तरह के डर को अपने ऊपर हावी न होने दें।
मानसिक शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर आप अपनी प्रेगनेंसी को डरमुक्त,शांत और एक सकारात्मक अनुभव में बदल सकती हैं।
डिलीवरी के बारे में जानें

डर अक्सर किसी बात की पूरी जानकारी ना होने से बढ़ता है। ऐसे में हर गर्भवती महिला को डिलीवरी की प्रक्रिया, डिलीवरी से पहले और उसके दौरान होने वाले दर्द और किसी भी खतरे के बारे में पहले से ही साड़ी जानकारी पनि डॉक्टर से ले लेनी चाहिए। इसके लिए प्रसवपूर्व देखभाल यानी Antenatal केयर का हिस्सा बनें ,अच्छी किताबें पढ़ें।ऐसा करने पर आप मानसिक रूप से मजबूत बनी रहेंगी साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
शांत रहने की कला सीखें
प्रसव के दौरान कॉन्ट्रैक्शन के समय आपका शांत रहे, इसके लिए गहरी श्वास और ध्यान गर्भावस्था के दौरान ही शुरू कर दें। दिन में दो बार 15-20 मिनट के लिए शांत जगह पर बैठें। 4 सेकंड में गहरी सांस अंदर लें, 4 सेकंड रोकें और 6 सेकंड में धीरे-धीरे बाहर निकालें। ध्यान केंद्रित करने के लिए किसी मंत्र या सकारात्मक शब्द का प्रयोग करें। यह प्रैक्टिस आपके शरीर को तनाव के समय भी शांत बनाए रखेगी। इस तरह प्रसव पीड़ा के समय भी आपका मन परेशान नहीं होता है।
सकारात्मक कल्पना करें
अपने मन में प्रसव के अनुभव की एक सकारात्मक और मजबूत छवि बनाएँ। अपनी आँखें बंद करें और उस पल की कल्पना करें जब आप शांत हैं, आपका शरीर आराम से काम कर रहा है, और आप अपने बच्चे को अपनी गोद में ले रही हैं। हर बार सोने से पहले ये कल्पना जरूर करें। विज़ुअलाइज़ेशन आपके दिमाग को सकारात्मक उम्मीदें देता है , जिससे चिंता कम होती है।
अपनों का सहारा लें

डर को दबाने से वह और बढ़ता है। गर्भवती महिला को अपने साथी या किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या अपने डॉक्टर के साथ चिंताओं को साझा करना चाहिए। अपनी डर वाली बातों को साफ़-साफ़ उनके सामने रखें। अगर डर बहुत अधिक है, तो एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलने में संकोच न करें। अपनी बात कहने से मन का बोझ हल्का होता है और आपको यह एहसास होता है कि आप अकेली नहीं हैं। एक मजबूत सपोर्ट भावनात्मक सुरक्षा का एहसास करवाता है।
नकारात्मक कहानियों से दूरी बनाएं
दूसरों के कड़वे और डरावने अनुभव सुनना आपके डर को बढ़ा सकता है, खासकर जब आप संवेदनशील दौर से गुजर रही हों। ऐसे लोगों से बात करने से बचें जो अपनी मुश्किल डिलीवरी की कहानियाँ सुनाते हैं। अगर कोई ऐसा अनुभव साझा करना भी चाहे तो प्यार भरे शब्दों में उनसे इस टॉपिक से हटकर कुछ और बात करने के लिए कहें। किसी पॉडकास्ट या किताब का सहारा लें और डिलीवरी के सफल और सकारात्मक प्रसव अनुभवों को पढ़ें या सुनें।
