Summary:जानें माँ दुर्गा और राधा रानी में क्या है भिन्नता
नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है। इस अवसर पर माँ दुर्गा शक्ति की देवी के रूप में और राधा रानी प्रेम की देवी के रूप में पूजी जाती हैं।
Maa Durga and Radha Rani Difference: नवरात्रि का पावन त्योहार शुरू हो चूका है। हर तरफ नवरात्रि के अलग-अलग रंग दिखाई दे रहे हैं। कहीं देवी के नौ रूपों की पूजा की जा रही है, तो कहीं डांडिया व गरबा की धूम है। इन्हीं सब के बीच इन दिनों संत प्रेमानंद महाराजजी का भी एक वीडियो काफी ज्यादा चर्चा में है, जिसमें एक भक्त ने उनसे पूछा है कि माँ दुर्गा और राधा रानी में क्या अंतर है? इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंदजी ने इतने बेहतरीन तरीके से दिया है कि लोग इस वीडयो को काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
दरअसल सनातन धर्म में माँ दुर्गा और राधा रानी शक्ति की देवी हैं। देवी माँ के ये दोनों स्वरूप अलग-अलग हैं और इनका महत्व भी अलग है। माँ दुर्गा यानी दुर्ग अर्थात किला, जो साधक को हर संकट से सुरक्षित रखती हैं। जबकि राधा रानी स्वयं कृष्ण प्रेम की अधिष्ठात्री हैं। वे केवल भक्ति और प्रेम की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण की अंतरंग शक्ति भी हैं। आइए विस्तार से जानें कि माँ दुर्गा और राधा रानी में क्या अंतर है।
क्या है माँ दुर्गा और राधा रानी में अंतर?

प्रेमानंद महाराजजी ने बताया कि ‘राधा रानी और माँ दुर्गा में अत्यंत सूक्ष्म अंतर है और वह अंतर है केवल प्रेम का अंतर। माँ दुर्गा आद्याशक्ति हैं, रुद्ररूपिणी हैं और वीर भाव की देवी हैं, जबकि प्यारी राधा रानी महाप्रेम की मूर्ति हैं। वह जहाँ पर भी होती हैं वहां सिर्फ और सिर्फ प्रेम की ही बात की जाती है। राधा रानी नीलकमल पर विराजती हैं, जबकि माँ दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं और वे शेर पर विराजती हैं। उन्हें अष्टभुजा, सोलह भुजा व बत्तीस भुजा के रूप में दर्शाया जाता है।
क्या है राधा रानी का स्वरूप और महत्व

राधा रानी प्रेम और करुणा की देवी हैं। उनका हर कार्य कृष्ण के प्रेम में डूबा हुआ होता है। राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका और उनकी आत्मा के रूप में जाना जाता है। राधा रानी का स्वरूप काफी कोमल और करुणामयी है। वे भक्ति, दया और प्रेम की मूर्ति मानी जाती हैं, इसलिए उन्हें भक्ति की देवी भी कहा जाता है।
क्या है माँ दुर्गा का स्वरूप और महत्व

माँ दुर्गा शक्ति और पराक्रम की देवी मानी जाती हैं। उन्हें आदिशक्ति और रुद्ररूपिणी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप तेज और वीर है। वे दुष्टों का संहार करती हैं और धर्म की रक्षा करती हैं।
माँ दुर्गा और राधा रानी में प्रेमानंद महाराजजी ने समझाया अंतर

प्रेमानंद महाराज के अनुसार राधा रानी और माँ दुर्गा की शक्ति मूल रूप से एक ही है, लेकिन जब बात प्रेम की आती है तो दोनों में फर्क दिखाई देता है। राधा रानी के चरणों में फूल बिछाए जाते हैं और यह भय बना रहता है कि कहीं किशोरी जी के चरणों में कोई कांटा न लग जाए। वहीं माँ दुर्गा राक्षसों के गले पर पैर रखकर लंबी जीभ निकालती हैं और उनका संहार करती हैं, बस दोनों ही शक्तियों में यही अंतर है।
