Overview: दस दिनों तक ही क्यों मनाते हैं गणेश उत्सव
गणेश उत्सव 10 दिन तक मनाया जाता है और फिर जल में बप्पा की मूर्ति विसर्जित कर दी जाती है। 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाने की परंपरा महाभारत ग्रंथ से जुड़ी है।
Ganesh Utsav 2025: बुधवार 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी के साथ ही गणेश उत्सव की शुरुआत भी हो गई है जोकि पूरे 10 दिनों तक मनाई जाएगी। गणेश उत्सव या गणेशोत्सव वैसे तो महाराष्ट्र में बड़े ही धूमधाम के साथ ही मनाया जाता है। लेकिन यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में एक है जिसे भगवान गणेश के जन्म के प्रतीक के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का आगमन होता है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को गणपति का विसर्जन कर दिया जाता है।
दस दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान पूरे 10 दिनों तक बप्पा की मूर्ति की पूजा-उपासना की जाती है और फिर विधि-विधान और प्रेमपूर्वक जल में उनका विसर्जन कर दिया जाता है। गणेश उत्सव के इन 10 दिनों में चारों और माहौल मंत्र, जाप,पूजा, आरती आदि से भक्ति भाव में डूबा रहता है और इसके बाद भक्त बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आना का जयकारा लगाते हुए गणपति का विसर्जन कर देते हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि, आखिर हम गणेश उत्सव 10 दिनों तक ही क्यों मनाते हैं। इससे कम या इससे अधिक क्यों नहीं। आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य।
महाभारत से जुड़े हैं गणेश विसर्जन के तार

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुखकर्ता के रूप में पूजा जाता है। सभी देवताओं में भगवान गणेश सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं। मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले भी गणपति की पूजा शुभता और संपन्नता के लिए की जाती है। बात करें गणेश उत्सव की तो इसे 10 दिनों तक मनाने का रहस्य महाभारत से जुड़ा है। इससे जुड़ी कथा के अनुसार, एक बार महर्षि वेदव्यास जी ने भगवान गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने की प्रार्थना की।
भगवान गणेश ने बिना रुके पूरे 10 दिनों में महाभारत लिख डाला। लेकिन इसके बाद गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। तब दसवें दिन भगवान गणेश को वेद-व्यास जी ने नदी में स्नान कराया गया, जिससे उनके शरीर का तापमान कम हुआ। यही कारण है कि 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाने के बाद भगवान गणेश की मूर्ति को जल में विसर्जित किया जाना अनिवार्य होता है। 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाने और इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की मूर्ति को जल में विसर्जित करने की यह परंपरा आज भी चली आ रही है।
डेढ़,3, 5, 7 दिनों में भी कर सकते हैं विसर्जन

कुछ लोग घर या ऑफिस में भी बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं। यदि आप 10 दिनों तक गणपति की स्थापना करने में असमर्थ हैं तो डेढ़, तीन, पांच या सात दिन में भी गणपति का विसर्जन कर सकते हैं। इससे भी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा। हालांकि पूजा पंडालों या मंदिर आदि में गणपति की स्थापना करने के बाद 10वें दिन अनंत चतुर्दशी पर ही विसर्जन किया जाता है।
10 दिवसीय गणेश उत्सव का महत्व

हिंदू धर्म में 10 अंक को पूर्णता का प्रतीक माना गया है। 10 इंद्रियां, 10 दिशाएं और धर्म के 10 स्तंभ इन सभी का संबंध पूर्णता और समग्रता से होता है। इसके अलावा 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान बप्पा के 10 स्वरूपों की भी पूजा की जाती है जोकि इस प्रकार हैं- पहले दिन गणाधिप, दूसरे दिन उमा पुत्र,तीसरे दिन अघनाशन, चौथे दिन विनायक, पांचवे दिन ईश पुत्र, छठे दिन सर्वसिद्धि प्रदायक, सातवें दिन एकदंत, आठवें दिन इभवक्र, नौवें दिन मूषक वाहन और दसवें दिन कुमार गुरु के रूप में। दस दिनों बप्पा अपने भक्तों के जीवन को सुख-समृद्धि से भर देते हैं।
