Valparai & Anamalai Hills
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Summary: वलपाराई और अन्नामलाई हिल्स की ख़ास बात

यह इलाका 3,500 से 5,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है जहां मानसून के मौसम में बादल नीचे उतर आते हैं और चाय के बागानों के बीच धुंध तैरने लगती है।

Valparai and Anaimalai Hills: मानसून में यदि आप प्रकृति के सबसे हरे-भरे रूप को देखना चाहते हैं तो तमिलनाडु और केरल की सीमा पर बसे वलपाराई और अन्नामलाई हिल्स से बेहतर जगह कम ही होगी। यह इलाका 3,500 से 5,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है जहां मानसून के मौसम में बादल नीचे उतर आते हैं और चाय के बागानों के बीच धुंध तैरने लगती है। हल्की बारिश, पहाड़ी पगडंडियां और हवा में घुली ताज़ी पत्तियों की सुगंध, यह सब मिलकर इस जगह की यात्रा को जादुई बना देता है। इस जगह पर आने वाले सैलनियों को लगता है कि जन्नत में आ गए हैं। 

Valparai & Anamalai Hills 2
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वलपाराई और अन्नामलाई की असली पहचान उनके विशाल चाय बागान हैं जो मीलों तक फैले हुए हैं। यहां की खासियत यह है कि इन बागानों के बीच-बीच में घने जंगल भी मिलते हैं जहां हाथी, बाइसन, नीलगिरि तहर और तरह-तरह के पक्षी रहते हैं। मानसून में जब बारिश की बूंदें चाय की पत्तियों पर गिरती हैं तो हवा में एक खास तरह की ताजगी घुल जाती है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है। यहां के लोग मानते हैं कि बारिश के बाद की पहली तोड़ाई से बनी चाय का स्वाद सबसे उम्दा होता है।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि पहाड़, जंगल और बागान केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि जीवनदाता हैं। यहां के पुराने किसान बारिश से पहले पहाड़ों की देवी की पूजा करते हैं ताकि मानसून समय पर आए और फसल अच्छी हो। यह परंपरा आज भी चाय बागानों में काम करने वाले लोग निभाते हैं। इसी कारण यहां के बागान केवल खेती का केंद्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक जीवन का भी अहम हिस्सा हैं।

Valparai & Anamalai Hills 3
Valparai & Anamalai Hills

वलपाराई और अन्नामलाई हिल्स पश्चिमी घाट के उस हिस्से में आते हैं जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है। यह इलाका न केवल चाय उत्पादन के लिए बल्कि अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। मानसून के समय यहां के जंगलों में नई जान आ जाती है। झरने प्रचंड हो जाते हैं, छोटी नदियां कल-कल बहने लगती हैं और जंगल में औषधीय पौधे पनपते हैं। यह क्षेत्र दक्षिण भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से निकलने वाले जल स्रोत कई राज्यों की नदियों में जीवन डालते हैं।

मानसून के दिनों में वलपाराई और अन्नामलाई की यात्रा किसी चित्रकथा में कदम रखने जैसा है। यहां तक पहुंचने के लिए घुमावदार सड़कों से गुजरना पड़ता है जहां हर मोड़ पर बादलों की परत और हरियाली आपका स्वागत करती है। रास्ते में 40 से ज्यादा हेयरपिन बेंड हैं जिनसे गुजरते हुए नीचे बहती नदियां और ऊपर तैरते बादल दिखते हैं। मानसून में झरनों के पास रुककर गरमा-गरम चाय की चुस्कियां लेना इस यात्रा का सबसे अलहदा अनुभव होता है।

वलपाराई और अन्नामलाई हिल्स मानसून में सिर्फ घूमने की जगह नहीं बल्कि एक ऐसा अनुभव हैं जहां प्रकृति अपने सबसे सुंदर और ताज़ा रूप में सामने आती है। अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर कुछ दिन सुकून और हरियाली में बिताना चाहते हैं तो यह यात्रा आपके दिल में हमेशा के लिए बस जाएगी।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...