Ganga Aarti in Canada River

Summary: गंगा नहीं फिर भी गंगा आरती! कनाडा से वायरल हुआ आयोजन का वीडियो

कनाडा की धरती पर भारतीयों द्वारा की गई गंगा आरती ने भावुक कर दिया लाखों लोगों को, लेकिन कुछ यूजर्स ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल भी उठाए।

Ganga Aarti in Canada River: भारत के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक समारोहों में से एक गंगा आरती भी है। यह एक ऐसी आस्था है जो भारतीयों को शायद ही कभी नाराज कर सकती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर कनाडा के मिसिसॉगा शहर में क्रेडिट नदी के किनारे का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। यहां प्रवासी भारतीय गंगा आरती करते हुए नजर आ रहे हैं। जिसकी तस्वीरें और वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। इस मामले ने न केवल विदेश में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई बल्कि इसने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी।

दरअसल, मिसिसॉगा के एरिनडेल पार्क में क्रेडिट नदी के तट पर आयोजित इस गंगा आरती में भारतीय मूल के लोग ट्रेडिशनल ड्रेस में शामिल हुए। दीयों की रोशनी, भक्ति भजनों और मंत्रों की गूंज ने वाराणसी और हरिद्वार के घाटों की याद दिला दी। आयोजन का उद्देश्य भारतीय डायस्पोरा को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़े रखना था। एक एनआरआई, प्रियंका गुप्ता ने इसे “कनाडा में भारत का एक हिस्सा” बताया और इसे अपने 10 साल के कनाडाई जीवन में एक “जादुई पल” करार दिया। उन्होंने इस आयोजन का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।नदी के किनारे हुई गंगा आरती को रेडियो धिशुम की टीम ने आयोजित किया था।

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जानकारी के लिए बता दें कि ये गंगा आरती रेडियो ढिशुम की टीम ने आयोजित की थी। इसमें भारतीय वाणिज्य दूतावास, टोरंटो के काउंसल संजीव सकलानी ने भी हिस्सा लिया। वीडियो को @libertywirein नाम के हैंडल से शेयर किया गया है जिसपर लोगों ने मिली जुली प्रतिक्रियाएं दीं।

हालांकि, जब भारतीय समुदाय कनाडा क्रेडिट नदी के तट पर गंगा आरती करने का फैसला किया गया, लेकिन नेटिज़न्स ज़्यादा उत्साहित नहीं हुए। टोरंटो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस शाम को ‘भावपूर्ण’ बताते हुए। कुछ लोगों ने इस कदम की सराहना की और बताया कि ‘आरती’ का स्थान से कम और भक्ति से ज़्यादा संबंध है, जबकि कुछ ने इसे पूरी तरह से ‘नाटक’ करार दिया। कई लोगों ने तो यहाँ तक सवाल उठाया कि ऐसी नदी पर ‘गंगा आरती’ क्यों की जाए जो गंगा नहीं है।

कई लोगों ने इस आयोजन को सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में सराहा, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी आलोचना भी हुई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्रेडिट नदी पर गंगा आरती करना कितना उचित है। एक यूजर ने लिखा, “क्रेडिट नदी गंगा नहीं है। वे किसकी पूजा कर रहे हैं?” एक अन्य ने टिप्पणी की, “किसी भी नदी के किनारे आरती करने से वह गंगा आरती नहीं हो जाती। अगर इतना ही शौक है, तो भारत लौटकर असली गंगा की सफाई करें।” कुछ ने इसे भारतीय परंपराओं का “मजाक” और “पवित्रता का अपमान” तक बता दिया। दूसरी ओर, समर्थकों ने तर्क दिया कि यह आयोजन भौगोलिक सीमाओं से परे आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

मेरा नाम नमिता दीक्षित है। मैं एक पत्रकार हूँ और मुझे कंटेंट राइटिंग में 3 साल का अनुभव है। मुझे एंकरिंग का भी कुछ अनुभव है। वैसे तो मैं हर विषय पर कंटेंट लिख सकती हूँ लेकिन मुझे बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल के बारे में लिखना ज़्यादा पसंद...