Exam Result Stress: बच्चों में रिजल्ट का डर अक्सर स्ट्रेस और एंग्जायटी की वजह बनता है, जिससे उनकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है। अगर आपका बच्चा भी इसी दौर से गुजर रहा है तो इन आसान और असरदार तरीकों से उसे स्ट्रेस फ्री बनाया जा सकता है। जानिए कैसे बच्चों की मदद करें रिजल्ट स्ट्रेस से बाहर निकलने में।
UP Board, CBSE और MP Board जैसे बड़े बोर्ड्स के रिजल्ट आ रहे हैं। ऐसे में लाखों बच्चे और उनके पेरेंट्स रिजल्ट को लेकर टेंशन में हैं। एग्जाम के समय तो स्ट्रेस समझ आता है, लेकिन रिजल्ट आने से पहले भी कई स्टूडेंट्स की नींद उड़ जाती है। क्या मैं पास हो जाऊंगा? क्या नंबर अच्छे आएंगे? पेरेंट्स क्या कहेंगे? ऐसे सवाल बच्चों को मानसिक रूप से थका देते हैं। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। स्ट्रेस मैनेजमेंट के कुछ आसान तरीके हैं, जो बच्चों को रिजल्ट का डर कम करने में मदद कर सकते हैं।
पेरेंट्स का सपोर्ट बेहद जरूरी

बच्चों को रिजल्ट स्ट्रेस से बचाने के लिए सबसे जरूरी है पेरेंट्स का सपोर्ट और समझदारी। कई बार हम अनजाने में ऐसा कुछ कह देते हैं जो बच्चे के मन पर असर डालता है। जैसे “अगर अच्छे नंबर नहीं आए तो क्या मुंह दिखाएंगे” या “तुमसे अच्छे तो शर्मा जी का बेटा है।” ये बातें बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और डर पैदा करती हैं। ऐसे में बच्चे को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि रिजल्ट अच्छा हो या बुरा, हम उसके साथ हैं। बातों से हिम्मत दीजिए, न कि डर।
बच्चों की तुलना किसी से न करें
रिजल्ट का समय वो दौर होता है जब पेरेंट्स, रिश्तेदार और समाज सभी नंबरों की तुलना करने लगते हैं। लेकिन हर बच्चा अलग होता है और उसकी क्षमता भी। किसी और के 90% आए हैं इसका मतलब ये नहीं कि आपके बच्चे ने कम मेहनत की। बच्चों की तुलना करने से उनका कॉन्फिडेंस टूटता है और वो खुद को फेल मानने लगते हैं। इसकी बजाय उनकी मेहनत की सराहना करें और उन्हें आगे के लिए मोटिवेट करें। कई बार ऐसा देखा गया है कि एक बार रिजल्ट खराब होने पर भी बच्चे ने अगली बार टॉप कर लिया इसलिए रिजल्ट को फाइनल जजमेंट न बनाएं। बच्चों को सीखने और सुधारने का मौका दें।
ओपन कम्युनिकेशन से बनाएं स्ट्रेस फ्री माहौल
बच्चों के साथ खुलकर बात करना बहुत जरूरी है, खासकर तब जब वे मानसिक तनाव में हों। उन्हें ऐसा माहौल दें जिसमें वे अपने डर, चिंता और सवाल आपसे शेयर कर सकें। रिजल्ट आने से पहले उनसे पूछें कि क्या वह किसी चीज को लेकर परेशान हैं? क्या उन्हें किसी बात का डर है?

जब आप खुले दिल से सुनते हैं, तो बच्चे राहत महसूस करते हैं। आप उन्हें समझा सकते हैं कि एग्जाम सिर्फ ज्ञान का टेस्ट है, जिंदगी का नहीं। साथ ही, यह समझाएं कि हर रिजल्ट कुछ सिखाता है और अगली बार बेहतर करने का मौका देता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों के साथ दिन में 15 मिनट क्वालिटी टाइम बिताना भी उनके स्ट्रेस लेवल को काफी कम करता है।
बच्चों को एक्टिविटी और रूटीन में जोड़े रखें
रिजल्ट के इंतजार के दौरान बच्चों को खाली बैठने न दें। खाली समय में दिमाग ज्यादा निगेटिव सोचता है। ऐसे में बच्चों को कुछ क्रिएटिव एक्टिविटी में बिजी रखें, जैसे डांस, पेंटिंग, म्यूजिक या उनकी कोई हॉबी। इसके साथ ही, एक फिक्स डेली रूटीन में रहना भी स्ट्रेस को कम करता है।
हेल्दी डाइट, समय पर नींद और हल्का वर्कआउट (जैसे योग या मेडिटेशन) बच्चों के मूड को बेहतर बनाते हैं। एक्सरसाइज से एंडोर्फिन नामक हार्मोन निकलता है, जो स्ट्रेस को कम करता है और बच्चों को पॉजिटिव फील करवाता है।
जरूरत पड़े तो एक्सपर्ट की मदद लें
अगर बच्चा रिजल्ट को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित है, रो रहा है या खुद को बंद कर रहा है, तो यह एक अलार्मिंग सिग्नल है। ऐसे में प्रोफेशनल काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद जरूर लें। आज कई स्कूल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट ऑफर करते हैं। एक्सपर्ट बच्चों को स्ट्रेस को मैनेज करने की सही तकनीक सिखा सकते हैं, जिससे वे ना सिर्फ इस बार बल्कि आगे भी खुद को बेहतर तरीके से संभाल सकें।
